Mirzapur News: विन्ध्याचल में क्षेत्रीय वैदिक सम्मेलन का शुभारंभ, डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य बोले- जीवन जीने की वैज्ञानिक पद्धति हैं वेद

मीरजापुर के विन्ध्याचल में त्रिदिवसीय क्षेत्रीय वैदिक सम्मेलन का शुभारंभ डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने किया। उन्होंने वेदों को जीवन की वैज्ञानिक पद्धति बताते हुए सनातन मूल्यों पर विचार रखे।

By INA News Desk
Sep 13, 2026 - 22:38
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Mirzapur News: विन्ध्याचल में क्षेत्रीय वैदिक सम्मेलन का शुभारंभ, डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य बोले- जीवन जीने की वैज्ञानिक पद्धति हैं वेद

  • मीरजापुर में वैदिक विद्वानों का समागम: उप मुख्यमंत्री ने किया त्रिदिवसीय सम्मेलन का उद्घाटन, नई पीढ़ी को सनातन परंपरा से जोड़ने पर बल

  • Keshav Prasad Maurya Mirzapur Visit: विन्ध्य धाम में गूंजी वेदों की ऋचाएं, डिप्टी सीएम ने गिनाईं कॉरिडोर और धार्मिक विकास की उपलब्धियां

  • विन्ध्याचल पहुंचे उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य: वैदिक सम्मेलन के उद्घाटन के बाद पिछड़ा वर्ग आयोग उपाध्यक्ष के आवास पर की आत्मीय भेंट

मीरजापुर: उत्तर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने रविवार को मीरजापुर जनपद भ्रमण के दौरान विन्ध्याचल स्थित होटल विन्ध्य रेजीडेंसी सभागार में आयोजित तीन दिवसीय क्षेत्रीय वैदिक सम्मेलन का मुख्य अतिथि के रूप में दीप प्रज्वलन कर विधिवत शुभारंभ किया। महर्षि सांदीपनि राष्ट्रीय वेद विद्या प्रतिष्ठान उज्जैन एवं श्री मां विंध्यवासिनी श्रवण वेद पाठशाला समिति के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस सम्मेलन में देश भर से आए मूर्धन्य वैदिक विद्वानों, संतों, आचार्यों और विद्यार्थियों ने सहभागिता की।

सम्मेलन के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए उप मुख्यमंत्री ने कहा कि वेद केवल पूजा-पद्धति या कर्मकांड से जुड़े धार्मिक ग्रंथ नहीं हैं, अपितु वे मानव जीवन को संतुलित, स्वस्थ और अनुशासित ढंग से जीने की एक संपूर्ण वैज्ञानिक पद्धति हैं। उन्होंने कहा कि आज के तकनीकी युग में युवा पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक पहचान और जड़ों से जोड़े रखने के लिए ऐसे आयोजनों की निरंतर आवश्यकता है। भारतीय ज्ञान परंपरा का प्रकाश सदियों से दुनिया को दिशा दिखाता रहा है और आधुनिक शोध भी वेदों में वर्णित सिद्धांतों की प्रामाणिकता को स्वीकार कर रहे हैं।

वैदिक परंपरा और वेद विद्यालयों के विस्तार की रूपरेखा

उप मुख्यमंत्री ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के बाल स्वयंसेवक के रूप में अपने अनुभवों को साझा करते हुए शाखा गीत की पंक्तियों का उल्लेख किया और कहा कि भारत की आध्यात्मिक भूमि पर वेदों की गूंज अनंत काल तक बनी रहनी चाहिए। उन्होंने कहा कि केंद्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार और प्रदेश सरकार प्राचीन ज्ञान की रक्षा तथा इसे लुप्त होने से बचाने के लिए निरंतर कार्य कर रही है।

उन्होंने बताया कि महर्षि सांदीपनि राष्ट्रीय वेद विद्या प्रतिष्ठान उज्जैन से संबद्ध देशभर में लगभग 100 वेद विद्यालय संचालित हो रहे हैं, जहां वेद बटुकों को चारों वेदों की विभिन्न शाखाओं का व्यवस्थित और प्रामाणिक अध्ययन कराया जा रहा है। विभिन्न जनपदों में नए वेद विद्यालयों की स्थापना से प्राचीन गुरुकुल परंपरा को आधुनिक परिप्रेक्ष्य में नया जीवन मिल रहा है।

अशोक सिंघल के संकल्प और धार्मिक तीर्थों के कायाकल्प का उल्लेख

अपने संबोधन के दौरान केशव प्रसाद मौर्य ने विश्व हिंदू परिषद के पूर्व अंतरराष्ट्रीय कार्याध्यक्ष स्वर्गीय अशोक सिंघल के योगदान को याद किया। उन्होंने कहा कि पूज्य अशोक सिंघल जी का स्पष्ट संकल्प था कि देश के घर-घर तक वैदिक शिक्षा का विस्तार होना चाहिए।

उन्होंने विन्ध्य धाम और काशी विश्वनाथ धाम के बदलते स्वरूप की चर्चा करते हुए कहा कि एक समय था जब संकरी गलियों के कारण श्रद्धालुओं को घंटों तक असुविधा का सामना करना पड़ता था। आज भव्य कॉरिडोर निर्माण के बाद लाखों श्रद्धालु प्रतिदिन सुगमता और सुरक्षा के साथ दर्शन कर पा रहे हैं। मां विंध्यवासिनी के पावन धाम में आने वाले भक्तों के लिए सुरक्षा, पेयजल, विश्राम और आवागमन के व्यापक प्रबंध किए गए हैं, जिससे क्षेत्र के पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी नई गति मिली है।

पौराणिक महत्व और विन्ध्य क्षेत्र की महिमा

उप मुख्यमंत्री ने विन्ध्य क्षेत्र के आध्यात्मिक महत्व का विस्तार से वर्णन करते हुए कहा कि विन्ध्याचल पर्वत पर मां विंध्यवासिनी साक्षात विराजमान हैं। उन्होंने द्वापर युग के संदर्भ का उल्लेख करते हुए कहा कि भगवान श्रीकृष्ण की योगमाया के रूप में माता अष्टभुजी और मां महाकाली का यह त्रिकोण स्थल वैश्विक स्तर पर आस्था का अनूठा केंद्र बिंदु है। उन्होंने आयोजन के संयोजक पंडित अगस्त्य द्विवेदी के प्रयासों की सराहना की, जिन्होंने प्रयागराज के महर्षि भारद्वाज वेद विद्यालय से शिक्षा-दीक्षा प्राप्त करने के उपरांत विन्ध्य क्षेत्र में इस वृहद वैदिक अनुष्ठान की रूपरेखा तैयार की।

कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे महर्षि सांदीपनि राष्ट्रीय वेद विद्या प्रतिष्ठान उज्जैन के सचिव प्रोफेसर विरुपाक्ष वि. जड्डीपाल का स्वागत करते हुए उन्होंने कहा कि पूरे देश में वेद शिक्षा के प्रसार का जो दायित्व यह संस्थान निभा रहा है, वह अत्यंत सराहनीय है।

मंच पर प्रमुख विद्वानों और जनप्रतिनिधियों की रही उपस्थिति

उद्घाटन सत्र में संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय वाराणसी के पूर्व कुलपति प्रोफेसर राजाराम शुक्ल, पूर्व सचिव प्रोफेसर किशोर मिश्रा, नगर विधायक रत्नाकर मिश्र, विधान परिषद सदस्य श्याम नारायण सिंह उर्फ विनीत सिंह, भाजपा जिलाध्यक्ष लाल बहादुर सरोज, राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग के उपाध्यक्ष सोहन लाल श्रीमाली और नगर पालिका अध्यक्ष श्याम सुंदर केसरी सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे। आयोजकों द्वारा सभी अतिथियों का मां विंध्यवासिनी का चित्र और अंगवस्त्रम भेंट कर पारंपरिक अभिनंदन किया गया।

पिछड़ा वर्ग आयोग उपाध्यक्ष के आवास पर पहुंचे डिप्टी सीएम

वैदिक सम्मेलन के उद्घाटन के उपरांत उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य अपने निर्धारित प्रोटोकॉल के तहत ओझला पुल स्थित राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग के उपाध्यक्ष सोहन लाल श्रीमाली के आवास एवं जनसंपर्क कार्यालय पहुंचे। वहां उन्होंने आयोग उपाध्यक्ष के परिजनों से मुलाकात की और उनका कुशलक्षेम पूछा। इस दौरान स्थानीय विकास योजनाओं, सामाजिक सरोकारों और संगठनात्मक विषयों पर अनौपचारिक चर्चा हुई। उपाध्यक्ष सोहन लाल श्रीमाली और उनके परिजनों ने अंगवस्त्रम व स्मृति चिह्न भेंट कर उप मुख्यमंत्री का स्वागत किया।

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