UP Medical Education: उत्तर प्रदेश में 36 से बढ़कर 85 हुए मेडिकल कॉलेज, एमबीबीएस की 13,600 सीटों पर नीट यूजी काउंसलिंग शुरू
उत्तर प्रदेश में मेडिकल कॉलेजों की संख्या बढ़कर 85 और एमबीबीएस सीटें 13,600 हो गई हैं। 14 सितंबर से नीट यूजी-2026 के दूसरे चरण की राज्य स्तरीय काउंसलिंग शुरू हो रही है।
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यूपी में डॉक्टरों की नई पौध: आठ वर्षों में जुड़ीं 8,910 अतिरिक्त एमबीबीएस सीटें, सरकारी मेडिकल कॉलेजों का नेटवर्क तीन गुना बढ़ा
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UP NEET UG Counselling 2026: 14 सितंबर से दूसरे चरण की ऑनलाइन च्वाइस फिलिंग, प्रदेश में चिकित्सा शिक्षा के अवसरों का ऐतिहासिक विस्तार
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चिकित्सा शिक्षा का नया हब बना यूपी: 45 राजकीय और 40 निजी मेडिकल कॉलेज तैयार, स्वास्थ्य तंत्र को मिलेगा प्रशिक्षित मानव संसाधन
लखनऊ: उत्तर प्रदेश में चिकित्सा शिक्षा के बुनियादी ढांचे ने पिछले आठ वर्षों में अभूतपूर्व प्रगति दर्ज की है। प्रदेश में डॉक्टर बनने की आकांक्षा रखने वाले लाखों युवाओं के लिए उपलब्ध अवसरों का दायरा कई गुना बढ़ चुका है। राज्य में राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (नीट यूजी-2026) के द्वितीय चरण की राज्य स्तरीय ऑनलाइन काउंसलिंग 14 सितंबर से औपचारिक रूप से प्रारंभ होने जा रही है। इस दाखिला प्रक्रिया के बीच चिकित्सा शिक्षा एवं प्रशिक्षण महानिदेशालय द्वारा जारी किए गए अद्यतन आंकड़े यह स्पष्ट करते हैं कि उत्तर प्रदेश अब देश के भीतर डॉक्टरों की नई पीढ़ी तैयार करने वाले अग्रणी राज्यों की पहली पंक्ति में मजबूती से खड़ा हो चुका है।
वर्ष 2017 से पहले जहां राज्य में सीमित संख्या में मेडिकल संस्थान थे, वहीं 20 अगस्त 2026 तक के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार प्रदेश में मेडिकल कॉलेजों की कुल संख्या बढ़कर 85 तक पहुंच चुकी है। इसके साथ ही एमबीबीएस की कुल प्रवेश क्षमता 4,690 से बढ़कर 13,600 सीटों के उच्च स्तर पर पहुंच गई है। आठ वर्षों की इस अवधि में 49 नए मेडिकल कॉलेजों की स्थापना हुई है और 8,910 अतिरिक्त एमबीबीएस सीटों का प्रत्यक्ष विस्तार हुआ है। यदि वर्ष 2012 के आंकड़ों से तुलना की जाए, जब राज्य में कुल 2,740 सीटें थीं, तो यह वृद्धि लगभग पांच गुना बैठती है।
राजकीय क्षेत्र में तीन गुना तक बढ़ा मेडिकल संस्थानों का संजाल
उत्तर प्रदेश में आम और मध्यमवर्गीय परिवारों के मेधावी छात्र-छात्राओं को सुलभ व किफायती चिकित्सा शिक्षा मुहैया कराने में राजकीय क्षेत्र का योगदान सर्वाधिक उल्लेखनीय रहा है। वर्ष 2017 में पूरे उत्तर प्रदेश में मात्र 15 राजकीय मेडिकल कॉलेज संचालित थे, जिसके कारण अधिकांश मेधावियों को सीटें न मिलने पर अन्य राज्यों का रुख करना पड़ता था।
वर्तमान में प्रदेश के भीतर संचालित राजकीय मेडिकल कॉलेजों की संख्या तीन गुना बढ़कर 45 हो चुकी है। सरकारी मेडिकल कॉलेजों में एमबीबीएस सीटों की क्षमता वर्ष 2017 के 1,990 से बढ़कर अब 5,350 तक पहुंच गई है। यानी सरकारी क्षेत्र में ही 3,360 अतिरिक्त सीटों की शुद्ध वृद्धि हुई है। प्रत्येक जनपद में उच्चस्तरीय चिकित्सा और शैक्षणिक व्यवस्था स्थापित करने के उद्देश्य से चलाई जा रही 'एक जिला, एक मेडिकल कॉलेज' की नीति ने इस विस्तार में धुरी का काम किया है।
निजी क्षेत्र में भी 5,550 अतिरिक्त सीटों का हुआ सृजन
सरकारी पहलों के साथ-साथ निजी क्षेत्र में भी चिकित्सा शिक्षा के अवसरों का तेजी से विस्तार हुआ है। वर्ष 2017 तक राज्य में 21 निजी मेडिकल कॉलेज कार्यरत थे, जिनकी संख्या अब बढ़कर 40 हो चुकी है। इन निजी संस्थानों में उपलब्ध एमबीबीएस सीटों का आंकड़ा भी 2,700 से बढ़कर 8,250 तक पहुंच गया है।
निजी क्षेत्र में 5,550 अतिरिक्त सीटों के जुड़ने से स्थानीय स्तर पर मेडिकल की पढ़ाई करने के इच्छुक छात्रों को व्यापक विकल्प मिले हैं। सरकारी और निजी दोनों क्षेत्रों के इस संयुक्त विस्तार ने प्रदेश के चिकित्सा शिक्षा ढांचे को राष्ट्रीय स्तर पर एक मजबूत पहचान दी है।
नीट यूजी-2026: 14 सितंबर से द्वितीय चरण की काउंसलिंग प्रक्रिया
सीटों में हुए इस बड़े इजाफे के बीच उत्तर प्रदेश में नीट यूजी-2026 के दूसरे चरण की ऑनलाइन काउंसलिंग का विस्तृत कार्यक्रम घोषित कर दिया गया है। चिकित्सा शिक्षा एवं प्रशिक्षण महानिदेशालय (DGME), उत्तर प्रदेश द्वारा जारी समय-सारिणी के अनुसार यह प्रक्रिया 14 सितंबर से 25 सितंबर 2026 तक संचालित होगी।
राज्य कोटे की 85 प्रतिशत राजकीय सीटों और निजी मेडिकल व डेंटल कॉलेजों की शत-प्रतिशत सीटों पर प्रवेश के लिए जारी कार्यक्रम का विवरण इस प्रकार है:
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ऑनलाइन पंजीकरण एवं धरोहर राशि भुगतान: 14 सितंबर (शाम 5:00 बजे) से 17 सितंबर (सुबह 11:00 बजे तक)।
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राज्य मेरिट सूची का प्रकाशन: 17 सितंबर 2026।
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ऑनलाइन च्वाइस फिलिंग: 17 सितंबर (शाम 5:00 बजे) से 19 सितंबर (शाम 5:00 बजे तक)।
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सीट आवंटन परिणाम घोषणा: 21 सितंबर 2026।
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आवंटन पत्र डाउनलोड एवं नोडल केंद्रों पर प्रवेश प्रक्रिया: 22 सितंबर से 25 सितंबर 2026 तक।
अस्पतालों के बुनियादी ढांचे और जनस्वास्थ्य सेवाओं को संबल
महानिदेशक, चिकित्सा शिक्षा नेहा शर्मा ने बताया कि राज्य सरकार का मुख्य ध्यान केवल मेडिकल कॉलेजों की संख्या बढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि चिकित्सा शिक्षा से जुड़े संपूर्ण इंफ्रास्ट्रक्चर को आधुनिक बनाना है। प्रत्येक नए मेडिकल कॉलेज के साथ 300 से 500 बिस्तरों वाले संबद्ध अस्पतालों, आधुनिक जांच प्रयोगशालाओं, नर्सिंग कॉलेजों और छात्रावासों का निर्माण कराया गया है।
उन्होंने कहा कि इन संस्थानों से प्रतिवर्ष प्रशिक्षित होकर निकलने वाले हजारों चिकित्सक राज्य के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (पीएचसी), सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (सीएचसी) और जिला चिकित्सालयों में सेवाएं देंगे। इससे ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में विशेषज्ञ डॉक्टरों की दशकों पुरानी कमी को दूर करने में सहायता मिलेगी और राज्य की स्वास्थ्य वितरण प्रणाली आत्मनिर्भर बनेगी।
डॉक्टर-मरीज अनुपात में सुधार की ओर कदम
विशेषज्ञों का मानना है कि प्रतिवर्ष 13,600 से अधिक एमबीबीएस चिकित्सकों का तैयार होना प्रदेश के जनस्वास्थ्य मानकों में बड़ा सकारात्मक बदलाव लाएगा। विश्व स्वास्थ्य संगठन के मानकों के अनुरूप आबादी के अनुपात में डॉक्टरों की उपलब्धता सुनिश्चित करने की दिशा में यह एक बड़ा कदम है।
मेडिकल कॉलेजों के क्षेत्रीय विकेंद्रीकरण से अब पूर्वांचल, बुंदेलखंड, रुहेलखंड और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के युवाओं को अपने ही गृह क्षेत्र के समीप चिकित्सा शिक्षा के अवसर प्राप्त हो रहे हैं। आने वाले वर्षों में यह तंत्र न केवल स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता को सुधारेगा, बल्कि मेडिकल अनुसंधान और आपातकालीन चिकित्सा प्रबंधन में भी उत्तर प्रदेश को अग्रणी बनाएगा।
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