UP Mining Areas Development: खनन प्रभावित क्षेत्रों में 1548 करोड़ से बदली तस्वीर, 8,397 परियोजनाओं से गांवों तक पहुंचीं बुनियादी सुविधाएं

उत्तर प्रदेश में जिला खनिज फाउंडेशन (DMF) निधि से 1548 करोड़ रुपये की लागत से 8,397 परियोजनाएं संचालित हैं। खनन प्रभावित क्षेत्रों में शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार को गति मिली है।

By INA News Desk
Sep 27, 2026 - 22:28
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UP Mining Areas Development: खनन प्रभावित क्षेत्रों में 1548 करोड़ से बदली तस्वीर, 8,397 परियोजनाओं से गांवों तक पहुंचीं बुनियादी सुविधाएं

उत्तर प्रदेश में खनन गतिविधियों से सीधे और परोक्ष रूप से प्रभावित क्षेत्रों में रहने वाले नागरिकों के जीवन स्तर को ऊंचा उठाने और वहां बुनियादी नागरिक सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए राज्य सरकार 'जिला खनिज फाउंडेशन' (डीएमएफ) निधि का सुनियोजित उपयोग कर रही है। भूतत्व एवं खनिकर्म विभाग द्वारा जारी आधिकारिक प्रगति रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2017 से लेकर अगस्त 2026 तक प्रदेश भर के खनन प्रभावित क्षेत्रों में कुल 8,397 विकास परियोजनाओं को धरातल पर उतारा गया है। इन जनकल्याणकारी और अवस्थापना विकास योजनाओं पर अब तक 1548 करोड़ रुपये से अधिक की धनराशि व्यय की जा चुकी है।

खदानों से प्राप्त होने वाले वैधानिक राजस्व के एक निश्चित अंश से सृजित होने वाली इस निधि का मुख्य उद्देश्य खनन प्रभावित इलाकों में पर्यावरण संरक्षण, शिक्षा, आधुनिक स्वास्थ्य सेवा, शुद्ध पेयजल, ग्रामीण सड़कों और स्थानीय आजीविका का सुदृढ़ पारिस्थितिकी तंत्र तैयार करना है। विगत नौ वर्षों में किए गए इन प्रयासों से सोनभद्र, मिर्जापुर, बांदा, हमीरपुर, महोबा, झांसी, जालौन और ललितपुर जैसे प्रमुख खनन बहुल जनपदों के दूरदराज गांवों की सामाजिक-आर्थिक तस्वीर में सकारात्मक परिवर्तन दिखाई देने लगा है।

3,419 प्राथमिक विद्यालयों का कायाकल्प और आधुनिक शिक्षा

डीएमएफ निधि के आवंटन में शिक्षा क्षेत्र को शीर्ष प्राथमिकताओं में रखा गया है। भूतत्व एवं खनिकर्म विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, विभिन्न जनपदों में प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक शिक्षा से संबंधित 3,419 परियोजनाओं को पूरा किया गया है।

इसके तहत पुराने व जर्जर स्कूल भवनों का जीर्णोद्धार कराने के साथ-साथ बालक-बालिकाओं के लिए पृथक शौचालय, शुद्ध पेयजल संयंत्र और बाउंड्रीवॉल का निर्माण कराया गया। परिषदीय विद्यालयों में आधुनिक तकनीकी शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए स्मार्ट कक्षाओं की स्थापना, कंप्यूटर सिस्टम्स की उपलब्धता और वैज्ञानिक सोच विकसित करने हेतु 'स्पेस लैब' जैसी अत्याधुनिक सुविधाएं भी स्थापित की गई हैं। इससे खनन क्षेत्रों के वंचित वर्ग के बच्चों को भी डिजिटल युग की गुणवत्तापूर्ण शिक्षा से जुड़ने का अवसर प्राप्त हो रहा है।

प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में आधुनिक उपकरण और मजबूत चिकित्सा तंत्र

खनन और परिवहन के कारण स्थानीय आबादी पर पड़ने वाले संभावित स्वास्थ्य प्रभावों को कम करने के लिए स्वास्थ्य क्षेत्र में 323 महत्वपूर्ण परियोजनाओं पर कार्य किया गया है।

इन परियोजनाओं के तहत जिला अस्पतालों, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (CHC) और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (PHC) में नवीन नैदानिक (डायग्नोस्टिक) और जीवन रक्षक चिकित्सा उपकरण उपलब्ध कराए गए हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल एक्स-रे मशीनें, पैथोलॉजी जांच उपकरण, ऑक्सीजन कंसंट्रेटर और आपातकालीन एंबुलेंस सेवाओं को मजबूत किया गया है, जिससे स्थानीय ग्रामीणों को मामूली जांच और इलाज के लिए दूरदराज के महानगरों की दौड़ लगाने से राहत मिली है।

गांवों में पक्की सड़कें, सामुदायिक भवन और हरियाली का विस्तार

खनन प्रभावित ग्रामीण अंचलों में भौतिक बुनियादी ढांचे के सुदृढ़ीकरण हेतु 516 अवस्थापना परियोजनाओं का क्रियान्वयन किया गया है। इसके अंतर्गत सार्वजनिक आयोजनों और प्रशासनिक संवाद के लिए सर्वसुविधायुक्त सामुदायिक भवनों (पंचायत भवनों) का निर्माण व मरम्मत कराया गया।

अवैध खनन और खनिजों के ओवरलोडिंग परिवहन पर प्रभावी रोकथाम के लिए निगरानी जांच मार्गों (चेकिंग रोड) का निर्माण और उनका समय-समय पर सुदृढ़ीकरण सुनिश्चित किया गया है। इसके अतिरिक्त खनन जनित धूल और वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए खदान क्षेत्रों के आसपास सघन वृक्षारोपण अभियान चलाए गए हैं तथा भूजल स्तर को रिचार्ज करने के लिए वर्षा जल संचयन (रेन वाटर हार्वेस्टिंग) प्रणालियों की स्थापना की गई है। ग्रामीण क्षेत्रों में सौर ऊर्जा लाइटें, सोलर पंप और पाइपलाइन पेयजल आपूर्ति की व्यवस्था भी इसी निधि से की गई है।

महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों के लिए 3,070 विशेष कल्याणकारी योजनाएं

सामाजिक सुरक्षा और पोषण के क्षेत्र में डीएमएफ निधि का व्यापक दायरा तैयार किया गया है। महिलाओं और शिशुओं के स्वास्थ्य संरक्षण के लिए कुल 3,070 परियोजनाएं संचालित की जा रही हैं।

  • आंगनबाड़ी केंद्रों का आधुनिकीकरण: नवीन भवनों के निर्माण के साथ-साथ कुपोषण की सटीक निगरानी हेतु डिजिटल वजन मशीनें, लंबाई मापने वाले स्टेडियोमीटर और पोषण किट उपलब्ध कराए गए हैं।

  • बुजुर्गों के लिए सुविधाएं: ग्रामीण क्षेत्रों में वरिष्ठ नागरिकों के विश्राम के लिए रात्रि आश्रय केंद्र, सामुदायिक रसोई (किचन) और सुलभ पेयजल हेतु नए हैंडपंप स्थापित किए गए हैं।

  • सुरक्षित आवागमन: ग्रामीणों और विद्यार्थियों के सुरक्षित पैदल आवागमन के लिए मुख्य मार्गों के किनारे पक्के फुटपाथ और सीसी इंटरलॉकिंग मार्गों का निर्माण कराया गया है।

स्थानीय युवाओं को रोजगार: कौशल विकास और स्वरोजगार पर जोर

खनन प्रभावित क्षेत्रों के युवाओं और महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने के लिए कई व्यावहारिक रोजगारोन्मुख कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं। स्थानीय स्तर पर आजीविका संवर्धन के तहत युवाओं को वैज्ञानिक मशरूम उत्पादन, आधुनिक डेयरी फार्मिंग, पशुपालन और मूल्य संवर्धन का तकनीकी प्रशिक्षण दिया जा रहा है।

इसके साथ ही राष्ट्रीय व राज्य कौशल विकास मिशन के समन्वय से सिलाई-कढ़ाई, इलेक्ट्रीशियन, प्लंबिंग और मोटर मैकेनिक जैसे ट्रेडों में रोजगारपरक प्रशिक्षण उपलब्ध कराया जा रहा है। इस नीतिगत पहल का परिणाम यह हुआ है कि खनन पर प्रत्यक्ष निर्भरता कम होकर स्थानीय युवाओं के लिए गांवों में ही नए उद्यम और स्वरोजगार के टिकाऊ रास्ते खुल रहे हैं।

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