यूपी में रजिस्ट्री के बाद स्वतः होगा दाखिल-खारिज, यूनिक प्रॉपर्टी आईडी से पारदर्शी होगी व्यवस्था, मुख्य सचिव ने की समीक्षा
उत्तर प्रदेश में संपत्ति रजिस्ट्री के बाद अब स्वतः नामांतरण होगा। मुख्य सचिव की बैठक में यूनिक प्रॉपर्टी आईडी, ई-नगरसेवा और नक्शा परियोजना के एकीकरण पर जोर दिया गया।
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में संपत्ति के क्रय-विक्रय, पंजीकरण और नामांतरण (दाखिल-खारिज) की प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी, सुगम और तकनीक आधारित बनाने के लिए योगी सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। अब प्रदेश में रजिस्ट्री होते ही स्वतः नामांतरण की आधुनिक व्यवस्था लागू की जा रही है। मुख्य सचिव की अध्यक्षता में आयोजित स्टाम्प एवं रजिस्ट्रेशन विभाग की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में यूनिक प्रॉपर्टी आईडी के निर्माण, दस्तावेजों के ऑनलाइन प्रमाणीकरण, ई-नगरसेवा और केंद्रीय 'नक्शा' पोर्टल के समन्वय तथा साइबर तहसील व्यवस्था को प्रभावी बनाने पर विस्तृत चर्चा की गई।
यूनिक प्रॉपर्टी आईडी से बनेगी हर संपत्ति की विशिष्ट पहचान
बैठक में जानकारी दी गई कि राज्य में सभी श्रेणियों की संपत्तियों के प्रबंधन हेतु अलग-अलग विभागों द्वारा यूनिक प्रॉपर्टी आईडी बनाई जा रही है। कृषि भूमि के लिए खसरा संख्या आधारित आईडी कार्यरत है, जबकि ग्रामीण आबादी की भूमि के लिए 13 अंकों की घरौनी कोड तैयार किया जा रहा है। इसी प्रकार नगर विकास विभाग द्वारा प्रदेश के जिला मुख्यालयों के नगर निकायों में ई-नगरसेवा पोर्टल के तहत 17 अंकों की विशिष्ट प्रॉपर्टी आईडी तैयार की जा रही है। वर्तमान में ई-नगरसेवा पोर्टल पर 56.57 लाख संपत्तियां सफलतापूर्वक पंजीकृत की जा चुकी हैं।
'नक्शा' परियोजना से तय होगा विधिक स्वामित्व
नगरीय संपत्तियों के सटीक सत्यापन के लिए पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर 10 नगर निकायों का चयन किया गया है। इनमें गोरखपुर नगर निगम, झांसी नगर निगम, नगर पालिका परिषद नवाबगंज (बाराबंकी), हरदोई और चित्रकूटधाम सहित पांच निकायों में ई-नगरसेवा और 'नक्शा' दोनों प्रणालियां लागू की जा रही हैं। नक्शा परियोजना के जरिए 'अर्बन प्रॉपर्टी कार्ड' तैयार किया जाएगा, जिससे संपत्ति के मालिकाना हक की कानूनी पुष्टि होगी। केंद्र के नक्शा डेटाबेस और राज्य के ई-नगरसेवा डेटाबेस के बीच एपीआई एकीकरण किया गया है, जिससे रियल-टाइम वेरिफिकेशन संभव होगा। इस पायलट परियोजना को 31 दिसंबर 2026 तक पूरा करने की समयसीमा तय की गई है।
बिक्री अधिकार के लिए मान्य दस्तावेजों की सूची होगी स्पष्ट
धोखाधड़ी रोकने के उद्देश्य से संपत्ति विक्रय अधिकार के साक्ष्य के रूप में दस्तावेजों को चिह्नित किया जा रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों में खतौनी और घरौनी को प्रथम दृष्टया वैध स्वामित्व साक्ष्य माना गया है। वहीं शहरी और औद्योगिक क्षेत्रों में विकास प्राधिकरणों द्वारा जारी आवंटन पत्र, रजिस्ट्री, बैनामा और लीज डीड जैसे दस्तावेजों को आधार बनाया जाएगा।
अभिलेखों के ऑनलाइन सत्यापन हेतु समिति का गठन
राजस्व अभिलेखों के डिजिटलीकरण, प्रमाणीकरण और विवाद की स्थिति में मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) तैयार करने के लिए महानिरीक्षक निबंधन की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय समिति गठित की गई है। यह समिति राजस्व परिषद और संबंधित विभागों के साथ मिलकर कार्यप्रणाली का खाका तैयार करेगी।
पायलट आधार पर शुरू होगी स्वतः नामांतरण व्यवस्था
पंजीकरण के तत्काल बाद स्वतः नामांतरण लागू करने के लिए पायलट प्रोजेक्ट के तहत विभिन्न एजेंसियों को जोड़ा जा रहा है। इसमें राजस्व विभाग द्वारा चयनित गांव, नगर विकास विभाग का नगर निकाय, औद्योगिक विकास विभाग से यमुना प्राधिकरण और आवास विभाग की ओर से लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए) शामिल हैं। इन संस्थाओं को रजिस्ट्रेशन पोर्टल से सीधे एपीआई के माध्यम से जोड़ा जाएगा, जिससे रजिस्ट्री होते ही संबंधित निकाय या प्राधिकरण को विवरण स्वतः प्राप्त हो जाएगा और नामांतरण की प्रक्रिया बिना किसी मानवीय अवरोध के पूरी हो सकेगी।
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