यूपी में समाज कल्याण योजनाओं को तकनीक से मिली रफ्तार, ऑनलाइन आवेदन व डीबीटी से सीधे लाभार्थियों को लाभ
योगी सरकार ने समाज कल्याण योजनाओं में डिजिटल प्रणाली लागू कर पारदर्शिता बढ़ाई है। पेंशन, छात्रवृत्ति और पारिवारिक लाभ योजना का पैसा सीधे बैंक खातों में पहुंच रहा है।
उत्तर प्रदेश में कमजोर और वंचित वर्गों के उत्थान के लिए संचालित समाज कल्याण योजनाओं को पारदर्शी, सुगम और परिणामोन्मुखी बनाने के लिए राज्य सरकार ने डिजिटल कार्यप्रणाली को प्राथमिकता दी है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कुशल मार्गदर्शन में विभाग ने ऑनलाइन आवेदन, डिजिटल सत्यापन और प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) जैसी आधुनिक व्यवस्थाओं को पूरी तरह लागू किया है, जिससे बिचौलियों की भूमिका समाप्त हो गई है और वास्तविक पात्र व्यक्तियों तक योजनाओं का लाभ बिना किसी बाधा के पहुंच रहा है।
प्रदेश में संचालित वृद्धावस्था पेंशन योजना, दशमोत्तर व पूर्वदशम छात्रवृत्ति योजना तथा राष्ट्रीय पारिवारिक लाभ योजना जैसी महत्वपूर्ण योजनाओं को पूरी तरह डिजिटल प्लेटफॉर्म से आबद्ध कर दिया गया है। इससे लाभार्थियों को आवेदन प्रस्तुत करने से लेकर आर्थिक सहायता की प्राप्ति तक अनावश्यक रूप से सरकारी कार्यालयों के चक्कर लगाने से मुक्ति मिली है। आधार-आधारित डिजिटल सत्यापन प्रणाली लागू होने से फर्जीवाड़े पर प्रभावी अंकुश लगा है और वास्तविक जरूरतमंदों की पहचान सुनिश्चित हुई है, जिससे आम जनता में प्रशासनिक व्यवस्था के प्रति विश्वास सुदृढ़ हुआ है।
प्रक्रियाओं के सरलीकरण के साथ-साथ समाज कल्याण विभाग ने जनशिकायतों के त्वरित और गुणवत्तापूर्ण निस्तारण के लिए एक सुदृढ़ तंत्र विकसित किया है। आवेदन, पात्रता निर्धारण अथवा भुगतान में आने वाली किसी भी तकनीकी या प्रशासनिक बाधा की नियमित समीक्षा की जा रही है। लंबित प्रकरणों की निगरानी उच्च स्तर से किए जाने से विभागीय कार्यसंस्कृति में उत्तरदायित्व और जवाबदेही तय हो रही है।
समाज कल्याण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) असीम अरुण ने विभागीय प्राथमिकताओं को स्पष्ट करते हुए कहा कि शासन का मूल ध्येय 'अंत्योदय' की भावना के अनुरूप समाज के अंतिम पायदान पर खड़े प्रत्येक पात्र व्यक्ति तक कल्याणकारी योजनाओं का लाभ पूरी शुचिता और गरिमा के साथ पहुंचाना है। उन्होंने कहा कि डिजिटल नवाचारों, त्वरित शिकायत निवारण और निरंतर मॉनिटरिंग के माध्यम से विभाग यह सुनिश्चित कर रहा है कि किसी भी नागरिक को अपने वैध अधिकारों के लिए कठिनाइयों का सामना न करना पड़े।
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