उत्तर प्रदेश में एग्रीगेटर नीति के तहत पहला लाइसेंस जारी, यात्रियों की सुरक्षा और किराए पर कड़े नियम

उत्तर प्रदेश में एग्रीगेटर नियमावली के तहत पहला लाइसेंस जारी किया गया। मनमाने किराए पर रोक लगाने के साथ चालकों और यात्रियों की सुरक्षा के नए नियम लागू हुए हैं।

By INA News Desk
Sep 10, 2026 - 22:48
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उत्तर प्रदेश में एग्रीगेटर नीति के तहत पहला लाइसेंस जारी, यात्रियों की सुरक्षा और किराए पर कड़े नियम

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में परिवहन सेवाओं को सुगम, सुरक्षित और किफायती बनाने के उद्देश्य से लागू की गई मोटरयान समूहक व वितरण सेवा प्रदाता नियमावली के अंतर्गत पहला आधिकारिक लाइसेंस जारी कर दिया गया है। परिवहन राज्य मंत्री दयाशंकर सिंह ने बताया कि विभागीय पोर्टल पर प्राप्त आवेदनों की तकनीकी व प्रशासनिक जांच के बाद चार कंपनियों के आवेदन नियमानुसार पूर्ण पाए गए, जिसके आधार पर लाइसेंस स्वीकृति की प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई।

निर्धारित प्रक्रिया के तहत ग्रीन एसएम इंडिया प्राइवेट लिमिटेड ने पांच लाख रुपये की लाइसेंस फीस और पच्चीस लाख रुपये की बैंक गारंटी जमा कर प्रदेश में एग्रीगेटर के रूप में काम करने का पहला अनुमति पत्र प्राप्त कर लिया है। इस नई नीति से प्रदेश में पूंजी निवेश को बढ़ावा मिलेगा और बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर पैदा होंगे। व्यवस्था का मूल ध्येय यात्रियों को आसान आवागमन उपलब्ध कराने के साथ सामान, पैकेज और पार्सल वितरण के लिए चालकों को व्यापारियों व ई-कॉमर्स कंपनियों से डिजिटल माध्यम से जोड़ना है।

नियमावली के तहत राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में प्रदूषण नियंत्रण के लिए संचालित वाहनों की ऑनलाइन निगरानी की जाएगी और कंपनियों को अपने बेड़े में इलेक्ट्रिक वाहनों को शामिल करना अनिवार्य होगा। महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा के लिए वाहनों में वास्तविक समय की ट्रैकिंग प्रणाली, चालकों का पुलिस सत्यापन, मानसिक परीक्षण और नियमित प्रशिक्षण अनिवार्य किया गया है। यात्रियों की शिकायतों के त्वरित समाधान के लिए प्रत्येक कंपनी को शिकायत निवारण अधिकारी तैनात करना होगा तथा सभी यात्रियों को यात्रा के दौरान दुर्घटना बीमा का संरक्षण मिलेगा।

चालकों के कल्याण को ध्यान में रखते हुए सेवा प्रदाता कंपनियों द्वारा प्रत्येक चालक के लिए पांच लाख रुपये का स्वास्थ्य बीमा और दस लाख रुपये का जीवन सुरक्षा बीमा अनिवार्य किया गया है। मनमाने किराए पर सख्ती से रोक लगाते हुए मांग आधारित वृद्धि को मूल किराए के अधिकतम पचास प्रतिशत तक सीमित कर दिया गया है। इसके अतिरिक्त, यदि बुकिंग के बाद वाहन समय पर नहीं पहुंचता है तो चालक पर सौ रुपये का जुर्माना लगेगा, जिसकी क्षतिपूर्ति यात्री को अगली यात्रा में दी जाएगी। नियमों की अनदेखी करने पर कंपनियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई और दंडात्मक जुर्माने का प्रावधान भी लागू रहेगा।

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