Election News: यूपी में फार्म-7 पर झूठी घोषणा करने वालों की खैर नहीं, एक साल की जेल या जुर्माना; मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने दिए सख्त निर्देश
उत्तर प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा ने प्रदेश के समस्त जिला निर्वाचन अधिकारियों एवं निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण
- मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने फार्म-7 में जानबूझकर झूठा कथन या मिथ्या घोषणा करने पर विधिक कार्यवाही करने के दिये कड़े निर्देश
- मिथ्या घोषणा करने पर एक वर्ष तक के कारावास अथवा जुर्माने या दोनों से दंडित करने का प्रावधान
- मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने सभी जिला निर्वाचन अधिकारियों एवं निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारियों को निर्देशों का कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित करने के दिए निर्देश
लखनऊ: उत्तर प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा ने प्रदेश के समस्त जिला निर्वाचन अधिकारियों एवं निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारियों को फार्म-7 के माध्यम से दाखिल किए जाने वाले आवेदनों के संबंध में भारत निर्वाचन आयोग द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।
मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने बताया कि लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा-31 के अनुसार मतदाता सूची की तैयारी, पुनरीक्षण अथवा शुद्धि या किसी प्रविष्टि को मतदाता सूची में शामिल करने अथवा हटाने के संबंध में जानबूझकर मिथ्या कथन या घोषणा लिखित रूप में करना दंडनीय अपराध है। इसके लिए दोषी व्यक्ति को एक वर्ष तक के कारावास अथवा जुर्माने या दोनों से दंडित किए जाने का प्रावधान है।
उन्होंने स्पष्ट किया है कि फार्म-7 में भी आवेदक से इस संबंध में निर्धारित घोषणा प्राप्त की जाती है। यदि निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी की जांच में फार्म-7 के माध्यम से की गई आपत्ति मिथ्या पाई जाती है, तो संबंधित आवेदक के विरुद्ध लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा-31 के अंतर्गत नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने बताया कि भारत निर्वाचन आयोग के दिनांक 09 अक्टूबर, 2026 के निर्देशों के क्रम में सभी संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया गया है कि फार्म-7 के माध्यम से प्राप्त आपत्तियों की जाँच एवं निस्तारण नियमानुसार किया जाए तथा मिथ्या या मनगढ़ंत आपत्ति पाए जाने पर विधिक प्रावधानों के अनुरूप कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
उन्होंने यह भी निर्देश दिए हैं कि इन विधिक प्रावधानों एवं आयोग के दिशा-निर्देशों का प्रिंट मीडिया, इलेक्ट्रॉनिक मीडिया, सोशल मीडिया तथा अन्य माध्यमों से व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाए, ताकि आमजन को फार्म-7 दाखिल करते समय सही एवं तथ्यपरक जानकारी देने तथा मिथ्या घोषणा करने के विधिक परिणामों के प्रति जागरूक किया जा सके।
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