US Boat Accident: अलास्का के बर्फीले समंदर में पलटी नाव, 62 घंटे तक लहरों से लड़ा 15 वर्षीय किशोर, भाइयों के शवों को भी थामे रखा

अमेरिका के अलास्का में नाव डूबने के बाद 15 साल का किशोर 62 घंटे तक समुद्र में मौत से लड़ता रहा। उसने अपने मृत भाइयों को भी थामे रखा। कोस्ट गार्ड ने सुरक्षित निकाला।

By INA News Desk
Sep 16, 2026 - 16:52
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US Boat Accident: अलास्का के बर्फीले समंदर में पलटी नाव, 62 घंटे तक लहरों से लड़ा 15 वर्षीय किशोर, भाइयों के शवों को भी थामे रखा
  • US Boat Accident: अलास्का के बर्फीले समंदर में पलटी नाव, 62 घंटे तक लहरों से लड़ा 15 वर्षीय किशोर, भाइयों के शवों को भी थामे रखा
  • Alaska Sea Survival: 62 घंटे तक मौत के मुंह में रहकर जिंदा लौटा अमेरिकी किशोर, भाइयों को खोने का दर्द और अदम्य साहस की रूह कंपा देने वाली दास्तान
  • समुद्र में 62 घंटे का खौफनाक मंजर: नाव डूबने के बाद लाइफ जैकेट के सहारे टिका रहा 15 साल का लड़का, रेस्क्यू टीम ने बचाया
  • Miracle At Sea: अलास्का के ठंडे पानी में मौत को मात देकर लौटा किशोर, तीन दिनों तक भाइयों के शवों को सीने से लगाए रखा

वाशिंगटन/एंकोरेज। संयुक्त राज्य अमेरिका के सुदूर राज्य अलास्का के बेहद ठंडे और तूफानी समुद्री क्षेत्र से एक रोंगटे खड़े कर देने वाली घटना सामने आई है। समुद्र में एक नाव अचानक अनियंत्रित होकर पलट गई, जिसके बाद 15 वर्षीय एक अमेरिकी किशोर करीब 62 घंटे यानी लगभग तीन दिन और तीन रातों तक अथाह गहरे पानी में जिंदगी और मौत के बीच झूलता रहा। बर्फीले पानी, भूख, प्यास और जानलेवा हाइपोथर्मिया के खतरे के बीच उसने न सिर्फ अपनी सांसों को बचाए रखा, बल्कि अपने साथ नाव में सवार सगे भाइयों के शवों को भी लहरों में बहने से रोके रखा।

जब बचाव दल की नजर इस बदहवास किशोर पर पड़ी, तो उसकी हालत देखकर अनुभवी राहतकर्मी भी दंग रह गए। उसे तुरंत एयरलिफ्ट कर नजदीकी अस्पताल ले जाया गया, जहां उसका उपचार जारी है। चिकित्सकों के अनुसार, अलास्का के उस समुद्री हिस्से का तापमान इतना कम होता है कि आम तौर पर एक वयस्क व्यक्ति भी कुछ ही घंटों में चेतना खो देता है, ऐसे में 15 साल के बच्चे का 62 घंटे तक जीवित बच निकलना किसी चिकित्सकीय चमत्कार से कम नहीं माना जा रहा है।

  • नाव पलटने से शुरू हुआ खौफनाक मंजर

घटना के संदर्भ में जुटाई गई प्राथमिक जानकारियों के मुताबिक, यह किशोर अपने भाइयों और परिजनों के साथ एक निजी नाव पर सवार होकर निकला था। अलास्का का तटीय क्षेत्र अपने अप्रत्याशित मौसम, तेज हवाओं और अचानक उठने वाली विशालकाय लहरों के लिए जाना जाता है। यात्रा के दौरान समुद्र में मौसम अचानक बिगड़ गया और तेज लहरों के भारी दबाव के कारण नाव का संतुलन बिगड़ गया। देखते ही देखते नाव पलट गई और उस पर सवार लोग गहरे समुद्र में गिर पड़े।

हादसे के बाद समुद्र की तेज धाराएं उन्हें एक-दूसरे से दूर खींचने लगीं। किशोर और उसके भाइयों ने लाइफ जैकेट पहन रखी थी, जिसकी बदौलत वे पानी की सतह पर तैरते रहे। हालांकि, पानी का तापमान इतना जमा देने वाला था कि कुछ ही समय बाद अत्यधिक ठंड और शारीरिक थकावट के चलते उसके भाइयों ने दम तोड़ दिया। अपने सगे भाइयों को अपनी आंखों के सामने निष्प्राण होते देखना उस किशोर के लिए असहनीय मानसिक आघात था, लेकिन उसने हिम्मत नहीं हारी।

  • अकेलेपन, भूख और बर्फीले पानी से 62 घंटे का संघर्ष

भाइयों की मृत्यु के बाद भी उस 15 वर्षीय लड़के ने मानवीय भावनाओं और असाधारण साहस का ऐसा परिचय दिया, जिसकी मिसाल मिलना दुर्लभ है। उसने अपने भाइयों के बेजान शरीरों को अपने हाथों से मजबूती से थामे रखा ताकि समुद्र का बहाव उन्हें कहीं दूर न ले जाए। वह दिन के उजाले से लेकर रात के घने अंधेरे तक उसी स्थिति में तैरता रहा।

समुद्री विशेषज्ञों का कहना है कि इतने लंबे समय तक खारे पानी में रहने से शरीर में पानी की गंभीर कमी (डिहाइड्रेशन) होने लगती है और त्वचा गलने लगती है। इसके अलावा समुद्र के खारे पानी का लगातार चेहरे और आंखों पर पड़ना असहनीय जलन पैदा करता है। किशोर लगातार जागता रहा, क्योंकि यदि वह आंखें मूंद लेता या हाथ ढीले छोड़ देता तो लहरें उसके भाइयों के शवों को बहा ले जातीं और वह खुद भी डूब सकता था।

  • रेस्क्यू टीम का तलाशी अभियान और चमत्कारिक बचाव

नाव के समय पर वापस न लौटने और संपर्क टूटने के बाद स्थानीय सुरक्षा एजेंसियों और अमेरिकी कोस्ट गार्ड (US Coast Guard) को अलर्ट किया गया। सूचना मिलते ही कई गश्ती नौकाएं और आधुनिक सेंसर्स से लैस हेलीकॉप्टर्स समुद्र में उतारे गए। विशाल समुद्री क्षेत्रफल और खराब दृश्यता के कारण शुरुआती घंटों में बचाव दल को कुछ हासिल नहीं हुआ।

लापता होने के करीब 62 घंटे बीत जाने के बाद, तलाशी में जुटे एक हेलीकॉप्टर के दल को पानी की सतह पर लाइफ जैकेट के कुछ चमकीले निशान और तैरते हुए शरीर दिखाई दिए। जब बचाव नौका मौके पर पहुंची, तो उन्होंने देखा कि 15 साल का यह लड़का अर्ध-बेहोशी की हालत में था, लेकिन उसके हाथ अभी भी अपने भाइयों के शवों को जकड़े हुए थे। राहत दल ने तुरंत अत्यंत सतर्कता के साथ तीनों को पानी से बाहर निकाला।

  • अस्पताल में उपचार जारी, डॉक्टर्स भी हैरान

बचावकर्मियों ने तत्काल किशोर को प्राथमिक उपचार दिया और विशेष हीटिंग कंबल व उपकरणों के सहारे उसके गिरते शरीर के तापमान को नियंत्रित करने का प्रयास किया। इसके बाद उसे उन्नत चिकित्सा सुविधा के लिए अस्पताल पहुंचाया गया। डॉक्टरों का कहना है कि लड़का 'गंभीर हाइपोथर्मिया' और 'एक्यूट ट्रॉमा' की स्थिति में था, लेकिन समय रहते मिल गई चिकित्सा सहायता से उसकी जान बचा ली गई है।

चिकित्सकों और स्थानीय अधिकारियों का कहना है कि इतनी विकट परिस्थितियों में जीवित बचे रहने के लिए केवल शारीरिक मजबूती नहीं, बल्कि असीम मानसिक दृढ़ता और अपने भाइयों के प्रति उस किशोर के अटूट प्रेम ने सबसे बड़ी भूमिका निभाई। इस दर्दनाक हादसे ने जहां एक परिवार की खुशियां छीन लीं, वहीं उस किशोर के अदम्य जिजीविषा और कर्तव्यबोध ने पूरी दुनिया का ध्यान खींचा है।

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