Colorado Bear Menace: घरों और दुकानों में भोजन की तलाश में पहुंच रहे जंगली भालू, प्रशासन ने जारी की सख्त एडवाइजरी

अमेरिका के कोलोराडो में भोजन की तलाश में जंगली भालू लगातार बस्तियों और दुकानों में घुस रहे हैं। 2026 में 7,000 से अधिक घटनाएं दर्ज होने के बाद अलर्ट जारी।

By INA News Desk
Aug 31, 2026 - 13:11
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Colorado Bear Menace: घरों और दुकानों में भोजन की तलाश में पहुंच रहे जंगली भालू, प्रशासन ने जारी की सख्त एडवाइजरी
कोलोराडो में भालुओं का आतंक
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अमेरिका के कोलोराडो राज्य में इन दिनों वन्यजीवों और इंसानों के बीच टकराव का एक गंभीर संकट पैदा हो गया है। प्राकृतिक पर्यावास में भोजन की भारी कमी और बदलते मौसम चक्र के चलते काले भालू भोजन की तलाश में लगातार रिहायशी बस्तियों, निजी आवासों और वाणिज्यिक दुकानों में प्रवेश कर रहे हैं। राज्य के वन्यजीव संरक्षण विभाग के अनुसार, वर्ष 2026 के शुरुआती महीनों से लेकर अब तक बस्तियों के निकट भालू देखे जाने और घरों में घुसपैठ की 7,000 से अधिक घटनाएं दर्ज की जा चुकी हैं। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए स्थानीय प्रशासन और वन्यजीव विशेषज्ञों ने नागरिकों के लिए विशेष सुरक्षा दिशा-निर्देश जारी किए हैं तथा आपातकालीन गश्ती दल तैनात कर दिए हैं।

कोलोराडो के पर्वतीय और शहरी सीमांत क्षेत्रों में जंगली भालुओं के आबादी वाले क्षेत्रों में घुसने की घटनाओं में अप्रत्याशित वृद्धि हुई है। भोजन की तलाश में भटक रहे ये जानवर बस्तियों के कचरे के डिब्बों, कारों की डिक्की, घरों के किचन और स्थानीय किराना दुकानों के दरवाजे तोड़कर अंदर पहुंच रहे हैं। अब तक दर्ज 7,000 से अधिक मामलों में कई ऐसी घटनाएं शामिल हैं जहां भालुओं ने इंसानी मौजूदगी के बावजूद घरों के अंदर घुसकर खाद्य सामग्री को नुकसान पहुंचाया। इस अप्रत्याशित व्यवहार ने स्थानीय निवासियों और व्यापारियों में भारी डर का माहौल पैदा कर दिया है।

कोलोराडो पार्क एवं वन्यजीव विभाग के अधिकारियों के अनुसार, यह समस्या मुख्य रूप से भालुओं की प्राकृतिक भोजन प्रणाली पर पड़े दबाव के कारण उत्पन्न हुई है। जंगलों में प्राकृतिक जामुन, फल, नट्स और अन्य वनस्पतियों की कमी होने पर भालू हाइपरफैगिया की अवस्था में अत्यधिक भोजन तलाशते हैं। इस शारीरिक चक्र के दौरान उन्हें दैनिक रूप से हजारों कैलोरी की आवश्यकता होती है, जिसके लिए वे मानव बस्तियों की ओर रुख करते हैं जहां बचा हुआ भोजन और कचरा आसानी से उपलब्ध हो जाता है।

पिछले कुछ महीनों में ऐसे कई वीडियो और सीसीटीवी फुटेज सामने आए हैं, जिनमें भालू घरों की खिड़कियों और दरवाजों को धकेलकर अंदर जाते दिखाई दे रहे हैं। कुछ मामलों में वे स्थानीय बेकरी और डिपार्टमेंटल स्टोर्स के स्टोररूम तक पहुंच गए। वन्यजीव रेंजरों ने कई भालुओं को सुरक्षित पकड़कर घने जंगलों में वापस छोड़ा है, लेकिन भोजन की गंध और सुलभता के कारण जानवर बार-बार बस्तियों की ओर लौटने लगे हैं, जिससे प्रशासनिक संसाधनों पर भी भारी दबाव पड़ रहा है।

कोलोराडो वन्यजीव विभाग के मुख्य अधिकारियों का कहना है कि मानव बस्तियों में असुरक्षित तरीके से रखा गया कचरा और पालतू पशुओं का भोजन भालुओं को आकर्षित करने का सबसे बड़ा कारण है। विभाग ने सख्त चेतावनी दी है कि जो भालू इंसानी भोजन के आदी हो जाते हैं, वे आगे चलकर आक्रामक हो सकते हैं और उन्हें सार्वजनिक सुरक्षा के लिए खतरा माना जाता है।

स्थानीय नागरिक संगठनों और पर्यावरणविदों ने जोर देकर कहा है कि जंगलों के समीप रहने वाले लोगों को कचरा प्रबंधन को लेकर कड़े नियमों का पालन करना चाहिए। कई नगर पालिकाओं ने 'भालू-रोधी कचरा पेटियों' का उपयोग अनिवार्य कर दिया है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि वे रात के समय घरों से बाहर निकलने में डर महसूस कर रहे हैं और खिड़की-दरवाजे हर समय बंद रखने को मजबूर हैं।

इन लगातार घटनाओं के कारण कोलोराडो के पर्यटन और दैनिक व्यापारिक गतिविधियों पर भी असर देखा जा रहा है। कई पर्वतीय ट्रैकिंग ट्रेल्स और कैंपिंग स्थलों पर अतिरिक्त सुरक्षा चेतावनी बोर्ड लगाए गए हैं। स्थानीय लोगों के दैनिक जीवन में भारी सतर्कता आ गई है, विशेषकर सुबह और शाम के समय जब भालुओं की सक्रियता चरम पर होती है।

इसके अलावा, वन्यजीवों और इंसानों के बीच सीधे टकराव की आशंकाएं बढ़ गई हैं। हालांकि प्रशासन ने समय रहते हस्तक्षेप करके बड़ी जनहानि को टाला है, लेकिन वाहनों की टक्कर और आवासीय परिसरों में संपत्ति को काफी नुकसान पहुंचा है।

वन्यजीव विभाग ने सघन निगरानी के लिए संवेदनशील क्षेत्रों में अतिरिक्त कैमरे, ट्रैकिंग उपकरण और त्वरित प्रतिक्रिया टीमें तैनात की हैं। प्रशासन ने स्थानीय निवासियों से अपील की है कि वे पक्षियों के दाना-पानी के बर्तनों, पालतू जानवरों के खुले भोजन और खुले कचरे को तुरंत हटाएं। जो लोग नियमों का उल्लंघन करते हुए भालुओं के लिए भोजन सुलभ छोड़ेंगे, उन पर भारी जुर्माना लगाने की प्रक्रिया भी शुरू की जा रही है। अधिकारियों का लक्ष्य शीतकालीन निष्क्रियता से पहले जानवरों को प्राकृतिक वनों की ओर वापस लौटाना है।

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