Varanasi : जनजातीय गौरव बिरसा मुंडा पर आधारित राष्ट्रीय संगोष्ठी का उद्घाटन करेंगे सीएम योगी आदित्यनाथ

सेमिनार की संयोजक प्रो अंजना सिंह ने बताया कि इस राष्ट्रीय सेमिनार का उद्देश्य बिरसा मुंडा की बहुआयामी विरासत का पता लगाना है, जो एक दूरदर्शी नेता थे, जिन्हों

By INA News Desk
Jul 17, 2025 - 22:13
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Varanasi : जनजातीय गौरव बिरसा मुंडा पर आधारित राष्ट्रीय संगोष्ठी का उद्घाटन करेंगे सीएम योगी आदित्यनाथ
CM योगी (Yogi) आदित्यनाथ
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सार-

  • बिरसा मुंडा की विरासत आदिवासी सशक्तिकरण और राष्ट्रीय आंदोलन के लिए उत्प्रेरक विषय पर केंद्रित है राष्ट्रीय सेमिनार 
  • वसंत महिला महाविद्यालय एवं आइसीएसएसआर के संयुक्त तत्वाधान में 18 -19 जुलाई को वाराणसी में होगा सेमिनार 
  • ख्याति प्राप्त विद्वान, शोधकर्ता, शिक्षक और छात्र अपने विचार करेंगे साझा, 100 से अधिक शोध पत्र किये जायेंगे प्रस्तुत

बिरसा मुंडा की विरासत आदिवासी सशक्तिकरण और राष्ट्रीय आंदोलन के लिए उत्प्रेरक विषय पर केंद्रित एक राष्ट्रीय सेमिनार का आयोजन वसंत महिला महाविद्यालय में आयोजित किया जा रहा है। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ शुक्रवार (18 जुलाई) को जनजातीय गौरव बिरसा मुंडा पर आधारित राष्ट्रीय संगोष्ठी का उद्घाटन 18 जुलाई को करेंगे। सेमिनार का उद्देश्य संबंधित क्षेत्र में शोध, संवाद एवं विचार-विमर्श को बढ़ावा देना है। यह दो दिवसीय आयोजन 18-19 जुलाई को वसंत महिला महाविद्यालय एवं भारतीय सामाजिक विज्ञान अनुसंधान परिषद (आइसीएसएसआर) के संयुक्त तत्वाधान में आयोजित हो रहा है। देश के अनेक ख्याति प्राप्त विद्वान, शोधकर्ता, शिक्षक और छात्र इस अवसर पर अपने विचार साझा करेंगे। 100 से अधिक शोध पत्र प्रस्तुत किये जायेंगे। मुख़्य वक्ता पद्मश्री अशोक भगत होंगेl कार्यक्रम की अध्यक्षता प्राचार्या अलका सिंह करेंगीl 

सेमिनार की संयोजक प्रो अंजना सिंह ने बताया कि इस राष्ट्रीय सेमिनार का उद्देश्य बिरसा मुंडा की बहुआयामी विरासत का पता लगाना है, जो एक दूरदर्शी नेता थे, जिन्होंने आदिवासी अधिकारों, सामाजिक न्याय और पर्यावरण संरक्षण का समर्थन किया। सेमिनार में उनके ऐतिहासिक महत्व की जांच , उनकी समकालीन प्रासंगिकता का विश्लेषण और उनके आदर्शों को आगे बढ़ाने की रणनीतियों पर चर्चा होगी। 

दो दिवसीय राष्ट्रीय सेमिनार बिरसा मुंडा के जीवन, संघर्षों और योगदानों को एक महत्वपूर्ण व्यक्तित्व के रूप में फिर से देखने और फिर से व्याख्या करने का प्रयास होगा , जिसने आदिवासी चेतना को आकार दिया और सामाजिक-राजनीतिक आंदोलनों को प्रेरित किया। यह शिक्षाविदों, शोधकर्ताओं और कार्यकर्ताओं के लिए ऐतिहासिक, समाजशास्त्रीय, मानवशास्त्रीय और राजनीतिक दृष्टिकोण से आदिवासी मुद्दों की जांच करने के लिए एक मंच प्रदान करेगा, जिसमें विरासत, पहचान और प्रतिरोध पर ध्यान केंद्रित किया गया है। 

कार्यक्रम की जानकारी देते हुए डॉ.संवेदना सिंह ने बताया कि उद्घाटन सत्र के बाद दो दिनों के दौरान सात तकनीकी सत्र होंगे ,अकादमिक संवाद के माध्यम से विद्वान, शोधकर्ता, छात्र और कार्यकर्ता बिरसा मुंडा के आंदोलन के बहुआयामी प्रभाव का पता लगाएंगे।

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