Sambhal: हमें ‘राष्ट्र’ से नहीं, ‘गीत’ के कुछ अल्फाज़ों से आपत्ति - मदरसों में वंदे मातरम अनिवार्य करने पर भड़के सांसद जियाउर्रहमान बर्क।
पश्चिम बंगाल के मदरसों में ‘वंदे मातरम’ अनिवार्य किए जाने के फैसले पर सम्भल से सपा सांसद Zia Ur Rehman Barq ने तीखी
उवैस दानिश, सम्भल
पश्चिम बंगाल के मदरसों में ‘वंदे मातरम’ अनिवार्य किए जाने के फैसले पर सम्भल से सपा सांसद Zia Ur Rehman Barq ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। सांसद बर्क ने कहा कि देशभक्ति किसी शब्द को जबरन बुलवाने से साबित नहीं होती, बल्कि वक्त आने पर इंसान के कर्म और कुर्बानी यह तय करते हैं कि कौन कितना वफादार है।
उन्होंने कहा कि राष्ट्रगान का मुस्लिम समाज समेत सभी धर्मों के लोग सम्मान करते हैं, लेकिन राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम’ को लेकर संविधान सभा के समय भी मतभेद और आपत्तियां सामने आई थीं। बर्क ने कहा हमें ‘राष्ट्र’ से कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन गीत के कुछ ऐसे अल्फाज़ हैं जिनका हमारे मजहब से टकराव होता है। संविधान हमें धार्मिक आज़ादी देता है और उसी अधिकार के तहत हम अपनी आस्था के अनुसार फैसले लेते हैं। सपा सांसद ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि ऐसे मुद्दे देश के असली सवालों से ध्यान भटकाने के लिए उठाए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि राष्ट्रगीत गाने से न बेरोजगारी खत्म होगी और न ही महंगाई कम होगी। सरकार को शिक्षा, रोजगार, महंगाई, पेट्रोल-डीजल और गैस संकट जैसे मुद्दों पर ध्यान देना चाहिए। बर्क ने हिंदू समाज से भी अपील करते हुए कहा कि इस तरह के मुद्दों पर खुश होने के बजाय देश की तरक्की और जनता की समस्याओं पर सोचने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि अगर सरकार वास्तव में जनता के हित में काम करना चाहती है तो अंतरराष्ट्रीय हालातों के बीच टैक्स में राहत देकर आम लोगों को राहत पहुंचानी चाहिए। अंत में सांसद बर्क ने कहा कि मुस्लिम समाज को बार-बार अपनी देशभक्ति साबित करने की जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा, हमारा इतिहास गवाह है और भविष्य में भी जब देश को जरूरत पड़ेगी, मुस्लिम समाज हर कुर्बानी देने के लिए हमेशा आगे रहेगा।
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