25 शादियाँ, 25 शिकार ! मैट्रीमोनियल साइट्स के जरिए जाल बिछाकर 25 महिलाओं की जिंदगी बर्बाद करने वाला शातिर महाठग ग्रेटर नोएडा से गिरफ्तार

उत्तर प्रदेश के हाईटेक शहर ग्रेटर नोएडा में एक ऐसी सनसनीखेज और हैरान कर देने वाली आपराधिक वारदात सामने आई है, जिसने वैवाहिक विज्ञापनों

Jun 16, 2026 - 12:59
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25 शादियाँ, 25 शिकार ! मैट्रीमोनियल साइट्स के जरिए जाल बिछाकर 25 महिलाओं की जिंदगी बर्बाद करने वाला शातिर महाठग ग्रेटर नोएडा से गिरफ्तार
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  • शारीरिक रूप से अक्षम और तलाकशुदा महिलाओं को सहानुभूति के जाल में फंसाकर करोड़ों रुपये ऐंठने वाला 'महाठग दूल्हा' चढ़ा पुलिस के हत्थे
  • फर्जी पहचान, अलग-अलग नाम और महंगी गाड़ियों का रूतबा दिखाकर शादियां करने वाले आरोपी को सुरक्षा एजेंसियों ने दबोचा

उत्तर प्रदेश के हाईटेक शहर ग्रेटर नोएडा में एक ऐसी सनसनीखेज और हैरान कर देने वाली आपराधिक वारदात सामने आई है, जिसने वैवाहिक विज्ञापनों और ऑनलाइन मैट्रीमोनियल वेबसाइट्स की सुरक्षा प्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सुरक्षा एजेंसियों और पुलिस प्रशासन की संयुक्त कार्रवाई में एक ऐसे शातिर ठग को गिरफ्तार किया गया है, जिसने अपनी पहचान छुपाकर एक या दो नहीं, बल्कि 25 से अधिक बेबस महिलाओं को शादी का झांसा देकर अपने जाल में फंसाया और उनसे करोड़ों रुपये की ठगी की। यह शातिर अपराधी ग्रेटर नोएडा के एक रिहायशी इलाके में फर्जी पहचान पत्र के सहारे छुपकर रह रहा था और लगातार नए शिकार की तलाश में था। इस गिरोह का जाल केवल उत्तर प्रदेश तक ही सीमित नहीं था, बल्कि महाराष्ट्र, दिल्ली और देश के कई अन्य राज्यों में भी इसने अपनी जड़ें फैला रखी थीं। पुलिस टीमों ने तकनीकी साक्ष्यों, सर्विलांस डेटा और गुप्त सूचनाओं के आधार पर जाल बिछाकर इस कलयुगी दूल्हे को दबोचने में सफलता हासिल की है, जिसके बाद से पूरे क्षेत्र में इस अनोखे जालसाज की कार्यप्रणाली को लेकर काफी चर्चा हो रही है।

इस पूरे संगठित अपराध की पृष्ठभूमि और इसके पीछे काम करने वाले शातिर दिमाग की दास्तान किसी थ्रिलर फिल्म की पटकथा जैसी प्रतीत होती है। आरोपी का असली नाम अनुजकुमार चंद्रप्रकाश त्रिवेदी है, लेकिन वह अलग-अलग राज्यों और शहरों में अपनी सहूलियत के हिसाब से नाम बदल लेता था। कहीं वह खुद को अजय अग्रवाल बताता था, तो कहीं अजय संतोष सिंह और कहीं जयप्रकाश रमेशचंद्र गुप्ता के नाम से अपनी फर्जी पहचान पेश करता था। उसने समाज के उस संवेदनशील वर्ग को अपना निशाना बनाया जो अपनों के सहारे की तलाश में था। आरोपी मुख्य रूप से ऐसी महिलाओं की तलाश करता था जो या तो शारीरिक रूप से अक्षम थीं, मानसिक रूप से कमजोर थीं, या फिर तलाकशुदा और अकेली थीं। ऐसी बेबस महिलाओं और उनके परिवारों के प्रति अत्यधिक सहानुभूति और सम्मान दिखाकर वह पहले उनका विश्वास जीतता था और फिर शादी का नाटक रचकर उनके जीवन भर की गाढ़ी कमाई को धीरे-धीरे साफ कर देता था। इस पूरे महाफ्रॉड का मामला तब प्रकाश में आया जब महाराष्ट्र के ठाणे जिले के अंतर्गत आने वाले नयानगर पुलिस स्टेशन में एक 75 वर्षीय बुजुर्ग महिला ने शिकायत दर्ज कराई। शिकायत के अनुसार, आरोपी ने अजय अग्रवाल बनकर उनकी 45 वर्षीय बेटी के लिए दिए गए वैवाहिक विज्ञापन पर संपर्क किया और साल 2019 में उससे शादी कर ली। इसके बाद उसने परिवार का भरोसा जीतकर मीरा रोड स्थित उनका फ्लैट बिकवा दिया और एक नया मकान बनाने के नाम पर किस्तों में लगभग 82 लाख रुपये नकद ऐंठ लिए। इसके बाद वह महिला को दिल्ली ले गया और रेलवे स्टेशन पर उसके गहने लेकर रफूचक्कर हो गया।

इस शातिर ठग की कार्यप्रणाली बेहद चालाकी भरी थी और वह हर एक शिकार को फंसाने के लिए एक नई और कस्टमाइज्ड कहानी तैयार करता था। महिलाओं के सामने खुद को बेहद अमीर, सुशिक्षित और प्रतिष्ठित बिजनेसमैन या उच्च पदों पर कार्यरत अधिकारी के रूप में पेश करने के लिए वह किराए की महंगी लग्जरी गाड़ियों का इस्तेमाल करता था। इतना ही नहीं, वह अपनी जालसाजी को पुख्ता रूप देने के लिए फर्जी दस्तावेज, जाली आधार कार्ड और बैंक की फर्जी पासबुक भी दिखाता था ताकि सामने वाले परिवार को उसकी माली हालत पर रत्ती भर भी शक न हो। जब शादी संपन्न हो जाती थी, तो वह घरेलू जरूरतों, नए व्यापार की शुरुआत या किसी पारिवारिक आपातकाल का बहाना बनाकर पत्नी और ससुराल पक्ष से बड़ी रकम अपने खातों में ट्रांसफर करवा लेता था। जब उसे लगता था कि अब इस परिवार से और अधिक पैसा वसूलना मुमकिन नहीं है, तो वह एक सुनियोजित साजिश के तहत कीमती जेवरात और नकदी समेटकर अचानक गायब हो जाता था और अपना मोबाइल फोन हमेशा के लिए बंद कर लेता था।

पुलिस प्रशासन द्वारा की गई सघन पूछताछ में इस बात के पुख्ता प्रमाण मिले हैं कि इस पूरे काले कारोबार में आरोपी का सगा बेटा भी बराबर का हिस्सेदार था। उसका बेटा भी पिता की इस आपराधिक गतिविधि में पूरी तरह से मदद करता था, चाहे वह फर्जी पहचान पत्र तैयार करना हो, बैंक खातों का प्रबंधन करना हो या फिर पीड़ितों को गुमराह करने के लिए अलग-अलग तरह के बहाने बनाना हो। सुरक्षा एजेंसियों ने इस मामले में आरोपी के बेटे को भी सह-आरोपी बनाते हुए उसके खिलाफ कानूनी शिकंजा कस दिया है। जांच के दौरान यह भी पता चला है कि आरोपी के खिलाफ महाराष्ट्र के अमरावती में भी इसी तरह का एक बड़ा मामला दर्ज है, जहां उसने अजय संतोष सिंह बनकर एक अन्य महिला से लगभग 25 लाख रुपये की धोखाधड़ी की थी। पुलिस ने आरोपी के पास से तीन महंगे मोबाइल फोन, एटीएम कार्ड और 'जयप्रकाश गुप्ता' के नाम पर बना एक जाली आधार कार्ड बरामद किया है, जिसका उपयोग वह पुलिस की आंखों में धूल झोंकने के लिए कर रहा था।

इस हाईप्रोफाइल मामले की परतें खुलने के बाद पुलिस ने आरोपी द्वारा ठगी के पैसों से खरीदी गई संपत्तियों और वाहनों को भी जब्त करना शुरू कर दिया है। इसी क्रम में पुलिस ने ठगी की रकम से खरीदी गई लगभग 20 लाख रुपये मूल्य की एक लग्जरी कार को अपने कब्जे में ले लिया है, जिसका इस्तेमाल आरोपी नए शिकार को प्रभावित करने के लिए करता था। जांच अधिकारी अब उन तमाम बैंक खातों की कड़ियों को जोड़ने में जुटे हैं, जिनका इस्तेमाल इस ठगी के पैसे को इधर से उधर ट्रांसफर करने के लिए किया गया था। पुलिस का मानना है कि चूंकि यह आरोपी पिछले कई सालों से देश के अलग-अलग हिस्सों में सक्रिय था, इसलिए इसकी ठगी का शिकार बनी महिलाओं की संख्या 25 से भी कहीं अधिक हो सकती है। कई महिलाएं और उनके परिवार समाज में बदनामी और लोकलाज के डर से पुलिस के पास शिकायत दर्ज कराने नहीं आते थे, जिसका फायदा उठाकर यह अपराधी लगातार बचता रहा।

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