AI का बढ़ता खतरा: क्या आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस अगले 10 साल में मानवता के लिए बन सकता है संकट?

Artificial intelligence (AI) ने चार साल में हमारी दुनिया बदल कर रख दी है. कभी वो गणित के अनसुलझे सवालों को सुलझा लेता है तो कभी

By INA News Desk
Sep 14, 2026 - 13:04
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AI का बढ़ता खतरा: क्या आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस अगले 10 साल में मानवता के लिए बन सकता है संकट?
दिल्ली में AI Summit के दौरान डोरियो और सैम ने हाथ भी नहीं मिलाया था
Milind Khandekar
Managing Editor, TAK Channels | Host, Saptahik Sabha | Writes ‘Hisab Kitab’ | Simplifying Business & Politics

Artificial intelligence (AI) ने चार साल में हमारी दुनिया बदल कर रख दी है. कभी वो गणित के अनसुलझे सवालों को सुलझा लेता है तो कभी हमारी नौकरी खाने पर आ जाता है. अब Anthropic AI के रिसर्चर ने यह कहकर इस्तीफ़ा दिया है कि AI दस साल में मानवता को ख़त्म कर सकता है, इस दावे से सनसनी फ़ैल गई है कि क्या AI की अंधी दौड़ में सावधानी से मुँह मोड़ लिया जा रहा है?

  • हिसाब-किताब AI के ख़तरे का 

जैकब कॉक्सन Anthropic (Claude) में रिसर्च का काम करते थे. यह कंपनी दावा करती रही है कि Open AI (ChatGPT) के मुक़ाबले ज़्यादा ज़िम्मेदार है, बल्कि Claude बनाने वाले डारियो अमोडेई ने Open AI को यह कहकर छोड़ा था कि वो पैसे बनाने के लिए जल्दबाज़ी कर रही है. जैकब भी Open AI में काम कर चुके हैं. उन्होंने Anthropic से पिछले हफ़्ते इस्तीफ़ा दे दिया. उनका आरोप है कि मानवता पर ख़तरे को लेकर AI कंपनियाँ गंभीर नहीं हैं।

जैकब की आशंका पर Anthropic के CEO और फाउंडर डारियो अमोडेई ने भी एक तरह से मुहर लगा दी है. उन्होंने जैकब के आरोपों पर सीधे जवाब तो नहीं दिया है लेकिन उन्होंने AI के ख़तरे पर ब्लॉग लिखा है. उन्होंने AI कंपनियों से अपील की है कि डेवलपमेंट के काम को धीमा करें। AI के ख़तरे को देखकर सुरक्षा चाक-चौबंद की जानी चाहिए वरना 6 से 12 महीनों में AI एजेंट का झुंड इंटरनेट को ठप करने की ताक़त रखता है. Open AI के फाउंडर सैम अल्टमन और xAI के फाउंडर एलन मस्क ने डारियो का समर्थन किया है।

डारियो के ब्लॉग से पहले Anthropic की सुरक्षा रिपोर्ट भी आई है। रिपोर्ट में बताया गया है कि Claude AI का दुरुपयोग करने की कोशिश कैसे और कहाँ की गई है।

  • उत्तरी यमन में Claude की मदद से मिसाइल बनाने की कोशिश की गई.

Claude की मदद से Bio Weapon बनाने की कोशिश भी हुई है। चिकनगुनिया और एवियन इन्फ्लूएंजा वायरस के साथ छेड़छाड़ की गई थी. इसका इस्तेमाल बीमारी फैलाने के लिए हो सकता था। मतलब मानवता को नष्ट करने की कोशिश में AI की मदद लेने के सबूत मिले हैं।

जैकब जिस ख़तरे की बात कर रहे हैं वो यह नहीं है। अभी तो आदमी ही AI का इस्तेमाल करते हुए ख़तरे पैदा कर रहा है, लेकिन AI हमसे तेज़ हो गया तो क्या होगा? अभी तो वो हमारे कहने पर चल रहा है लेकिन साथ में वो खुद भी सीख रहा है। जब वो हमारे क़ाबू से बाहर निकल जाएगा तो दो तरह के खतरों की बात हो रही है।

  • AI खुद Bio weapon बनाकर हमें खत्म कर सकता है, मानो कोई वायरस ही बनाकर छोड़ दे।

दूसरा ख़तरा है कि AI हमारी ज़िंदगी के हर हिस्से में है.  बिजली सप्लाई हो, एयरपोर्ट, रेलवे, सेना. वहाँ से भी AI तबाही मचा सकता है।

सबको इन ख़तरों के बारे में पता है लेकिन कोई इस रेस में पीछे नहीं छूटना चाहता है. एक रेस अमेरिका और चीन में चल रही है। दूसरी रेस अमेरिकी कंपनियों जैसे Open AI और Anthropic में चल रही है। ये कंपनियाँ IPO लाने की तैयारी कर रही हैं। अमेरिका की सरकार भी कंपनियों को कसने के मूड में नहीं है क्योंकि चीन के आगे बढ़ने का डर है। एक-दूसरे से आगे निकलने की होड़ दुनिया को ख़तरे में डाल सकती है और यह बात तो अब डारियो ही कह रहे हैं।

Milind Khandekar
Managing Editor, TAK Channels | Host, Saptahik Sabha | Writes ‘Hisab Kitab’ | Simplifying Business & Politics

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