'बारह साल, बारह सवाल': अखिलेश यादव ने बैंकिंग व्यवस्था पर केंद्र सरकार को घेरा, निजीकरण और ग्रामीण संकट पर उठाए तीखे सवाल

By Vijaylaxmi Singh Jadaun (Lawyer) सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने वित्तीय सेवा विभाग (DFS) को टैग करते हुए 'बारह साल, बारह सवाल' के जरिए केंद्र सरकार की बैंकिंग नीतियों, निजीकरण, केवाईसी नियमों और साइबर फ्रॉड पर तीखे सवाल दागे हैं।

By INA News Desk
Oct 17, 2026 - 14:22
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'बारह साल, बारह सवाल': अखिलेश यादव ने बैंकिंग व्यवस्था पर केंद्र सरकार को घेरा, निजीकरण और ग्रामीण संकट पर उठाए तीखे सवाल
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  • बैंक मजबूत हुए तो बेचे क्यों जा रहे? सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने वित्तीय सेवा विभाग से पूछे 12 सीधे सवाल
  • केवाईसी, साइबर ठगी और भारी ब्याज दर पर अखिलेश यादव का प्रहार: पूछा- बैंक कर्मियों और आम जनता पर इतना दबाव क्यों?
  • अखिलेश यादव का वित्तीय सेवा विभाग से सीधा सवाल: जब बैंक सशक्त हैं तो ग्रामीण इलाकों में ATM और शाखाएं बंद क्यों?

लखनऊ: समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने देश की बैंकिंग व्यवस्था और वित्तीय नीतियों को लेकर केंद्र सरकार पर बड़ा राजनीतिक हमला बोला है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर केंद्रीय वित्त मंत्रालय के वित्तीय सेवा विभाग (@DFS_India) को सीधे टैग करते हुए उन्होंने 'बारह साल, बारह सवाल' शीर्षक से एक विस्तृत प्रश्नमाला जारी की है। सपा प्रमुख ने सवाल उठाया है कि यदि सरकार के दावों के अनुसार देश के बैंक वास्तव में मजबूत और मुनाफे में हैं, तो फिर आम जनता, किसानों, युवाओं और बैंक कर्मचारियों को जमीनी स्तर पर इतनी परेशानियों का सामना क्यों करना पड़ रहा है?

अखिलेश यादव ने अपने पहले ही सवाल में सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के विनिवेश और निजीकरण की योजना पर आपत्ति जताई। उन्होंने पूछा कि जब सरकारी बैंक वित्तीय रूप से सशक्त हो चुके हैं, तो फिर उन्हें निजी हाथों में सौंपने की तैयारी क्यों की जा रही है? इसके साथ ही उन्होंने गरीब खाताधारकों के बैंक खातों से न्यूनतम बैलेंस और अन्य शुल्कों के नाम पर की जाने वाली कटौती को लेकर भी सरकार को कठघरे में खड़ा किया।

  • केवाईसी प्रक्रिया, ग्रामीण शाखाएं और लोन डिफॉल्टर्स पर सवाल

बैंकिंग सेवाओं की जटिलताओं को रेखांकित करते हुए सपा मुखिया ने कहा कि बार-बार केवाईसी (KYC) कराने के नाम पर आम खाताधारकों को उनके अपने ही पैसे निकालने से रोका जा रहा है। वहीं दूसरी तरफ, बैंकों से खरबों रुपये का कर्ज लेकर देश छोड़कर भाग जाने वाले बड़े आर्थिक अपराधियों को पकड़कर वापस लाने और सजा दिलाने में विफलता पर उन्होंने तीखा तंज कसा।

ग्रामीण भारत में वित्तीय समावेशन के दावों पर सवाल उठाते हुए अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि ग्रामीण अंचलों में बैंकों की शाखाएं और एटीएम बंद किए जा रहे हैं, जिसके चलते गांव के लोगों को नकदी निकालने के लिए दूर-दराज भटकना पड़ता है। उन्होंने यह भी पूछा कि आज भी किसानों, छात्रों और छोटे व्यापारियों को बिना गारंटर या बिचौलियों के आसानी से संस्थागत ऋण क्यों नहीं मिल पा रहा है?

अखिलेश यादव के 12 प्रमुख सवाल

बैंक मजबूत हैं तो निजीकरण क्यों?

गरीबों के खातों से पैसे क्यों कट रहे हैं?

बार-बार केवाईसी के नाम पर रोक क्यों?

बड़े बकायेदारों को पकड़कर सजा कब मिलेगी?

गांवों में बैंक शाखाएं और ATM बंद क्यों हो रहे हैं?

किसानों-छात्रों को बिना गारंटर लोन क्यों नहीं मिलता?

साइबर ठगी के शिकार गरीबों का पैसा तुरंत वापस क्यों नहीं?

होम और एजुकेशन लोन पर इतना भारी ब्याज क्यों?

फेल डिजिटल ट्रांजेक्शन का पैसा दिनों तक होल्ड क्यों?

मामूली चूक पर सिबिल स्कोर खराब कर युवाओं को डिफॉल्टर क्यों बनाया जा रहा?

बुजुर्गों व कम पढ़े-लिखों के लिए फ्रॉड सुरक्षा काउंटर क्यों नहीं?

नई बैंक भर्तियां क्यों रुकी हैं और कर्मचारियों पर इतना दबाव क्यों?

साइबर ठगी, सिबिल स्कोर और कर्मचारियों का तनाव

डिजिटल दौर की सुरक्षा चुनौतियों का जिक्र करते हुए पूर्व मुख्यमंत्री ने सवाल किया कि ऑनलाइन और साइबर वित्तीय धोखाधड़ी का शिकार होने वाले गरीब नागरिकों का पैसा तुरंत वापस क्यों नहीं मिलता और उन्हें थानों व बैंक शाखाओं के चक्कर काटने पर क्यों मजबूर किया जाता है। उन्होंने बुजुर्गों और कम पढ़े-लिखे नागरिकों की सहायता के लिए हर बैंक शाखा में विशेष सहायता डेस्क न होने की बात भी उठाई। इसके अलावा, डिजिटल लेन-देन विफल होने पर ग्राहकों का पैसा कई दिनों तक होल्ड पर रखे जाने और सिबिल (CIBIL) स्कोर में मामूली तकनीकी चूक के कारण युवाओं को डिफॉल्टर घोषित कर उनका करियर प्रभावित किए जाने पर भी उन्होंने गहरी चिंता व्यक्त की।  अखिलेश यादव ने आवास ऋण (Home Loan) और शिक्षा ऋण (Education Loan) पर ली जाने वाली उच्च ब्याज दरों को आम परिवारों की कमर तोड़ने वाला बताया। उन्होंने बैंक कर्मियों की मांगों, नई भर्तियों की कमी और काम के अत्यधिक दबाव का उल्लेख करते हुए कहा कि कर्मचारियों पर अत्यधिक तनाव का सीधा असर बैंकों की ग्राहक सेवा की गुणवत्ता पर पड़ रहा है।

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