AMU Women's College Protest: अब्दुल्ला हॉल में खराब खाने पर भड़कीं छात्राएं, सड़क पर प्रदर्शन के दौरान प्रॉक्टोरियल टीम से धक्का-मुक्की
AMU के विमेंस कॉलेज स्थित अब्दुल्ला हॉल में रविवार को मेस के खाने की खराब गुणवत्ता को लेकर छात्राओं ने जोरदार प्रदर्शन किया। प्रॉक्टोरियल टीम से धक्का-मुक्की के बाद कैंपस में तनाव है।
- AMU Women's College Protest: अब्दुल्ला हॉल में खराब खाने पर भड़कीं छात्राएं, सड़क पर प्रदर्शन के दौरान प्रॉक्टोरियल टीम से धक्का-मुक्की
- AMU News: मेस के भोजन की गुणवत्ता को लेकर छात्राओं का हंगामा, डिप्टी प्रॉक्टर के गिरने की सूचना के बाद कैंपस में तनाव
- अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय: विमेंस कॉलेज की छात्राओं का फूटा आक्रोश, प्रॉक्टोरियल टीम से तीखी नोकझोंक के बाद अधिकारी मौके पर
- AMU Abdullah Hall Controversy: छात्राओं ने लगाया घटिया खाने और दुर्व्यवहार का आरोप, प्रशासन के साथ टकराव के बाद स्थिति संभालने की कवायद
अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (एएमयू) के विमेंस कॉलेज परिसर स्थित अब्दुल्ला हॉल में रविवार को मेस के खाने की गुणवत्ता को लेकर छात्राओं का असंतोष अचानक उग्र आंदोलन में बदल गया। लंबे समय से खराब और अस्वास्थ्यकर भोजन परोसे जाने का आरोप लगाते हुए बड़ी संख्या में छात्राएं हॉस्टल की सीमाओं से बाहर निकलकर सड़क पर उतर आईं और प्रशासनिक लापरवाही के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी। सड़क पर धरने और प्रदर्शन की सूचना मिलते ही विश्वविद्यालय की सुरक्षा और अनुशासन व्यवस्था संभालने वाली प्रॉक्टोरियल टीम मौके पर पहुंची, जहां दोनों पक्षों के बीच तीखी बहस के बाद धक्का-मुक्की की नौबत आ गई।
प्रत्यक्षदर्शियों और परिसर से मिले विवरण के मुताबिक, इस अप्रत्याशित टकराव के दौरान एक डिप्टी प्रॉक्टर के जमीन पर गिरने की घटना भी सामने आई, जिससे मौके पर अफरा-तफरी का माहौल बन गया। छात्राओं का आरोप है कि अनुशासन के नाम पर पहुंचे दल के सदस्यों ने उनके साथ सख्ती दिखाई और धक्का दिया, जबकि प्रशासनिक पक्ष का कहना है कि स्थिति को नियंत्रित करने और रास्ता खुलवाने के दौरान भीड़ के दबाव से धक्का-मुक्की हुई। इस घटनाक्रम के बाद पूरे विमेंस कॉलेज और अब्दुल्ला हॉल क्षेत्र में तनाव का माहौल व्याप्त हो गया है।
- लंबे समय से सुलग रहा था असंतोष
अब्दुल्ला हॉल में रहने वाली छात्राओं का कहना है कि यह आक्रोश किसी एक दिन के खाने को लेकर अचानक पैदा नहीं हुआ है, बल्कि पिछले कई हफ्तों से भोजन की गुणवत्ता लगातार गिर रही थी। छात्राओं का दावा है कि मेस में तैयार की जाने वाली दाल, रोटियां और सब्जियां न केवल स्वादहीन थीं, बल्कि कई मौकों पर स्वास्थ्य मानकों के लिहाज से भी बेहद घटिया पाई गईं।
छात्राओं का कहना है कि उन्होंने हॉल के वार्डन और संबंधित प्रोवोस्ट कार्यालय में कई बार लिखित व मौखिक शिकायतें दर्ज कराई थीं। हर बार सुधार का आश्वासन तो दिया गया, लेकिन भोजन की गुणवत्ता में कोई ठोस बदलाव नहीं आया। रविवार को जब दोपहर और शाम के खाने के दौरान फिर से वही स्थिति दोहराई गई, तो छात्राओं का धैर्य जवाब दे गया। सैकड़ों की संख्या में छात्राएं अपनी थालियां और बैनर लेकर हॉस्टल के बाहर जमा हो गईं और मुख्य मार्ग पर प्रदर्शन शुरू कर दिया।
- प्रॉक्टोरियल टीम के पहुंचते ही बढ़ा गतिरोध
हॉस्टल से बाहर सड़क पर छात्राओं के प्रदर्शन की खबर मिलते ही विश्वविद्यालय प्रशासन में हड़कंप मच गया। सुरक्षा अधिकारी और प्रॉक्टोरियल टीम के सदस्य तुरंत मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने छात्राओं से सड़क खाली करने और वापस हॉस्टल परिसर में जाकर वार्ता करने का आग्रह किया। हालांकि, छात्राएं इस बात पर अड़ गईं कि जब तक वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी और मेस प्रबंधन मौके पर आकर लिखित आश्वासन नहीं देते, वे अपना प्रदर्शन समाप्त नहीं करेंगी।
इसी बातचीत के दौरान दोनों पक्षों के बीच कहासुनी तेज हो गई। देखते ही देखते नोकझोंक धक्का-मुक्की में तब्दील हो गई। भीड़ के अनियंत्रित होने से एक डिप्टी प्रॉक्टर संतुलन बिगड़ने के कारण सड़क पर गिर पड़े, जिन्हें साथी सुरक्षाकर्मियों ने तुरंत सहारा देकर उठाया। घटना के बाद छात्राओं ने आरोप लगाया कि महिला सुरक्षाकर्मियों की गैर-मौजूदगी या अपर्याप्त उपस्थिति के बावजूद उनके साथ अनावश्यक बलप्रयोग की कोशिश की गई, जिससे स्थिति और बिगड़ गई।
- कैंपस में प्रशासनिक हलचल और शांति की कोशिशें
धक्का-मुक्की की घटना के बाद परिसर में तनाव गहराने पर विश्वविद्यालय के अन्य वरिष्ठ अधिकारियों, प्राध्यापकों और महिला फैकल्टी सदस्यों को अब्दुल्ला हॉल भेजा गया। प्रशासनिक अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर छात्राओं के प्रतिनिधिमंडल को अलग बैठाकर समझाने-बुझाने की प्रक्रिया शुरू की। सुरक्षा के लिहाज से आसपास के रास्तों पर अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात कर दिया गया है ताकि मामला और अधिक न भड़के।
प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, अधिकारियों ने छात्राओं की शिकायतों को विस्तार से सुना है और मेस के ठेकेदार व खाद्य सामग्री की आपूर्ति करने वाले वेंडरों की जांच कराने का भरोसा दिया है। हालांकि, छात्राएं केवल आश्वासन से संतुष्ट होने को तैयार नहीं हैं। उनका कहना है कि जब तक मेस समिति में छात्राओं का प्रत्यक्ष प्रतिनिधित्व सुनिश्चित नहीं होता और जिम्मेदार अधिकारियों पर लापरवाही की जवाबदेही तय नहीं होती, उनका विरोध किसी न किसी रूप में जारी रहेगा।
- आवासीय विश्वविद्यालयों में मेस प्रबंधन की चुनौती
देश के प्रमुख आवासीय विश्वविद्यालयों में छात्रावासों का खान-पान हमेशा से एक संवेदनशील मुद्दा रहा है। छात्र-छात्राओं के मासिक शुल्क का एक बड़ा हिस्सा मेस डाइट में जाता है, जिसके बदले उन्हें पौष्टिक और स्वच्छ भोजन की अपेक्षा होती है। एएमयू के विमेंस कॉलेज की इस घटना ने एक बार फिर यह स्पष्ट कर दिया है कि समय रहते छात्रों की बुनियादी शिकायतों का निवारण न किए जाने पर छोटे विवाद भी बड़े प्रशासनिक संकट का रूप ले लेते हैं। फिलहाल विश्वविद्यालय प्रशासन छात्राओं को शांत कर स्थिति को सामान्य बनाने और घटना की आंतरिक जांच की रूपरेखा तैयार करने में जुटा है
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