Ballia News: सीएम योगी से मिली बलिया की दिव्यांग बेटी रागिनी, दो ट्राइसिकल के बाद अब इलाज और पक्के आवास का मिला भरोसा
बलिया की सात वर्षीय दिव्यांग छात्रा रागिनी ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात की। ट्राइसिकल मिलने के बाद अब सरकार उसके पैर के ऑपरेशन, पढ़ाई और परिवार के आवास का जिम्मा उठाएगी।
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- Lucknow News: मनियर की सात वर्षीय रागिनी से आत्मीयता से मिले मुख्यमंत्री योगी, शिक्षा से लेकर गांव की सड़क तक का दिया समाधान
लखनऊ/बलिया। मानवीय संवेदना, त्वरित प्रशासनिक निर्णय और कमजोर वर्ग के प्रति शासन की जवाबदेही का एक भावुक दृश्य राजधानी लखनऊ में देखने को मिला, जब बलिया जनपद की सात वर्षीय दिव्यांग बालिका रागिनी ने अपने माता-पिता के साथ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से उनके सरकारी आवास पर भेंट की। बांसडीह विधानसभा क्षेत्र से भारतीय जनता पार्टी की विधायक केतकी सिंह के सहयोग से आयोजित इस मुलाकात के दौरान मुख्यमंत्री ने अत्यंत आत्मीयता के साथ रागिनी से बातचीत की और उसकी शारीरिक परेशानी, विद्यालयी शिक्षा तथा पारिवारिक पृष्ठभूमि की विस्तृत जानकारी ली। मुख्यमंत्री ने नन्हीं रागिनी के सिर पर हाथ रखकर आशीर्वाद दिया और स्पष्ट घोषणा की कि बालिका के पैर के जटिल ऑपरेशन का संपूर्ण खर्च राज्य सरकार वहन करेगी। इसके साथ ही परिवार को पक्का आवास और गांव के संपर्क मार्ग को ठीक कराने का भी निर्देश दिया गया।
यह पूरा मामला प्रशासनिक संवेदनशीलता की उस नजीर को पेश करता है, जहां एक सामान्य नागरिक की गुहार शासन के शीर्ष स्तर पर पहुंचते ही बिना किसी औपचारिक विलंब के समाधान में बदल गई।
सड़क हादसे में फ्रैक्चर हुआ था पैर, स्कूल जाने में होती थी असहनीय पीड़ा
बलिया जिले के विकासखंड मनियर अंतर्गत ग्राम पंचायत दिघेड़ा के मजरे रानीपुर निवासी देवेंद्र की सात वर्षीय पुत्री रागिनी गांव के ही प्राथमिक विद्यालय में कक्षा एक की छात्रा है। रागिनी के परिजनों के अनुसार, कुछ वर्ष पूर्व एक सड़क दुर्घटना में उसके पैर में गंभीर चोट आई थी और हड्डी फ्रैक्चर हो गई थी। परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर होने और दैनिक मजदूरी पर निर्भर रहने के कारण उसका समुचित व आधुनिक ऑर्थोपेडिक उपचार नहीं कराया जा सका। समय बीतने के साथ पैर की बनावट और चलने-फिरने की क्षमता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा, जिससे रागिनी को सामान्य बच्चों की तरह चलने में अत्यधिक कठिनाई होती थी।
शारीरिक सीमाओं के बावजूद रागिनी के भीतर पढ़ने और स्कूल जाने की गहरी ललक थी। जब वह जमीन के सहारे या किसी के सहारे चलकर प्राथमिक विद्यालय जाती थी, तो उसकी पीड़ा देखकर स्थानीय ग्रामीणों का दिल पसीज जाता था। हाल ही में रागिनी का एक संक्षिप्त वीडियो सोशल मीडिया पर प्रसारित हुआ, जिसमें उसने स्कूल आने-जाने के लिए हाथ से चलने वाली ट्राइसिकल उपलब्ध कराने की मासूम इच्छा व्यक्त की थी।
सोशल मीडिया वीडियो पर मुख्यमंत्री का सीधा संज्ञान
जैसे ही यह मामला मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के संज्ञान में आया, उन्होंने बिना किसी पत्राचार के सीधे बलिया के जिलाधिकारी को फोन कर तत्काल हस्तक्षेप करने के निर्देश दिए। जिला प्रशासन ने त्वरित गति से कार्रवाई करते हुए चौबीस घंटे के भीतर बालिका के घर पर दो आधुनिक ट्राइसिकल भिजवाईं ताकि एक वाहन घर से स्कूल आवागमन में प्रयुक्त हो सके और दूसरा आवश्यकतानुसार वैकल्पिक उपयोग में रहे।
ट्राइसिकल पाकर रागिनी की चेहरे पर लौटी मुस्कान के बाद विधायक केतकी सिंह ने परिवार को लखनऊ लाकर मुख्यमंत्री से सीधे मिलवाने की पहल की। शुक्रवार को हुई इस मुलाकात ने रागिनी के भविष्य को एक नई दिशा दे दी।
ऑपरेशन से लेकर पक्के मकान तक: चौतरफा मदद का मिला संबल
मुख्यमंत्री आवास पर हुई इस मुलाकात में रागिनी की मां बबिता और पिता देवेंद्र ने अपनी व्यथा साझा की। परिजनों ने बताया कि गरीबी के कारण वे किसी बड़े सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल में ऑपरेशन कराने का सामर्थ्य नहीं रखते।
इस पर मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि प्रदेश के शीर्ष चिकित्सा संस्थान (केजीएमयू अथवा पीजीआई) के विशेषज्ञों से रागिनी के पैर की स्थिति का परीक्षण कराकर आवश्यक सर्जरी की तत्काल योजना बनाई जाए। मुख्यमंत्री ने आश्वस्त किया कि इलाज का कोई भी आर्थिक भार परिवार पर नहीं आने दिया जाएगा। इसके अतिरिक्त:
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ग्रामीण विकास विभाग को निर्देशित किया गया कि प्रधानमंत्री या मुख्यमंत्री ग्रामीण आवास योजना के अंतर्गत रागिनी के परिवार को प्राथमिकता के आधार पर पक्का आवास आवंटित किया जाए।
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बालिका की प्राथमिक से लेकर उच्च शिक्षा तक किसी भी प्रकार की पाठ्य सामग्री, छात्रवृत्ति या सहायता की कमी न होने पाए।
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रानीपुर गांव में रागिनी के घर से प्राथमिक विद्यालय तक जाने वाले खड़ंजे और क्षतिग्रस्त संपर्क मार्ग का तुरंत सुदृढ़ीकरण और निर्माण कराया जाए, ताकि ट्राइसिकल संचालन में कोई बाधा न आए।
परिजनों ने जताया आभार, विधायक बोलीं- यह जनसरोकार का शासन
मुख्यमंत्री के इस रुख से अभिभूत रागिनी की मां बबिता ने कहा कि उन्होंने कभी सोचा भी नहीं था कि लखनऊ में सरकार का मुखिया उनकी नन्हीं बेटी की परेशानी को इतने अपनेपन से सुनेगा। उन्होंने कहा कि ट्राइसिकल मिलने से बेटी की स्कूल जाने की समस्या दूर हो गई थी, और अब पैर ठीक होने की उम्मीद जगने से परिवार का सबसे बड़ा दुख दूर होने जा रहा है।
विधायक केतकी सिंह ने इस पहल पर टिप्पणी करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का यह व्यवहार यह साबित करता है कि प्रदेश में वास्तविक लोककल्याणकारी व्यवस्था कार्य कर रही है। जब सत्ता का शीर्ष नेतृत्व समाज के सबसे निर्बल, साधनहीन और दिव्यांग बच्चों के प्रति इतना सजग रहता है, तो जनता का व्यवस्था के प्रति विश्वास सुदृढ़ होता है। उन्होंने कहा कि रागिनी केवल बलिया की नहीं, बल्कि समूचे प्रदेश की बेटी है और उसकी प्रतिभा को निखारने का हर प्रयास पूरा किया जाएगा।
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