Bangladesh Political Turmoil: ढाका में तेज हुई कूटनीतिक हलचल, हिंसक श्रमिक प्रदर्शनों के बीच विदेशी राजदूतों से मिले स्पीकर हफीज उद्दीन अहमद
बांग्लादेश में हिंसक श्रमिक आंदोलन के बीच संसद के स्पीकर मेजर (रिटायर्ड) हफीज उद्दीन अहमद द्वारा विदेशी राजदूतों से बैठकों के बाद राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं।
- Bangladesh Diplomatic Meetings Row: संसद परिसर में विदेशी दूतों के साथ सिलसिलेवार बैठकें, राजनीतिक गलियारों में नए सत्ता समीकरणों की चर्चा
- Dhaka Diplomatic Alert: पाकिस्तान उच्चायुक्त और ईयू राजदूत से मिले संसद अध्यक्ष, अशांति के बीच राष्ट्रीय सरकार के कयास
- Bangladesh Crisis Update: परिधान कामगारों के हिंसक आंदोलन के बीच बढ़ी कूटनीतिक सक्रियता, संसद सचिवालय में बैठकों का दौर जारी
बांग्लादेश में पिछले एक सप्ताह से जारी श्रमिकों का व्यापक आंदोलन हिंसक रूप ले चुका है, जिसके समानांतर राजधानी ढाका के सत्ता गलियारों में असाधारण कूटनीतिक और राजनीतिक गतिविधियां देखी जा रही हैं। औद्योगिक क्षेत्रों में भड़की अशांति और तोड़फोड़ के बीच बांग्लादेशी संसद (जातीय संसद) के स्पीकर मेजर (रिटायर्ड) हफीज उद्दीन अहमद द्वारा विभिन्न शक्तिशाली देशों के राजनयिकों के साथ लगातार की जा रही उच्चस्तरीय बैठकों ने राजनीतिक विश्लेषकों का ध्यान आकर्षित किया है। संसद सचिवालय में पिछले पंद्रह दिनों के भीतर यूरोपीय देशों, एशियाई ताकतों और पश्चिमी राजनयिक मिशनों के प्रमुखों के साथ हुई इन अनौपचारिक व औपचारिक चर्चाओं के बाद देश में संभावित राजनीतिक पुनर्गठन और नए सत्ता समीकरणों को लेकर बहस छिड़ गई है।
संसद सचिवालय से प्राप्त आधिकारिक विवरणों के अनुसार, बैठकों का यह सिलसिला नवंबर के पहले सप्ताह में अत्यधिक सघन हो गया। 1 नवंबर को दोपहर करीब एक बजे बांग्लादेश में पाकिस्तान के उच्चायुक्त सैयद अहमद मारूफ के स्थान पर कार्यवाहक/प्रतिनिधि स्तर पर राजनयिक गतिविधियों के बीच उच्चायुक्त इमरान हैदर ने संसद भवन स्थित स्पीकर कार्यालय में मेजर (रिटायर्ड) हफीज उद्दीन अहमद से मुलाकात की। यह बैठक बंद कमरे में लगभग एक घंटे तक चली। कूटनीतिक विशेषज्ञों का कहना है कि सामान्य परिस्थितियों में संसदीय अध्यक्ष का विदेशी राजदूतों से इस प्रकार लगातार द्विपक्षीय विमर्श करना नियमित प्रोटोकॉल का हिस्सा नहीं माना जाता, विशेषकर तब जब देश में अंतरिम प्रशासनिक ढांचा सक्रिय हो और संसद के संचालन को लेकर विधिक जटिलताएं बनी हुई हों।.

उसी दिन सुबह 11 बजे स्पीकर हफीज उद्दीन अहमद ने नॉर्वे के राजदूत हाकोन अरल्ड गुलब्रांडसेन के साथ भी एक लंबी बैठक की थी। इस बैठक में नॉर्वे के उप-राजदूत अलेक्जेंडर फ्लेक ब्लाइड भी उपस्थित रहे। इसके उपरांत 3 नवंबर को यूरोपीय संघ (ईयू) के राजदूत माइकल मिलर ने स्पीकर कार्यालय पहुंचकर लगभग 40 मिनट तक राजनीतिक व आर्थिक परिस्थितियों पर विचार-विमर्श किया। राजनयिक सूत्रों का कहना है कि इन वार्ताओं में बांग्लादेश के मौजूदा मानवाधिकार परिदृश्य, निर्यात उन्मुख उद्योगों की स्थिरता, आगामी चुनावी प्रक्रिया की रूपरेखा और संसद के पुनर्गठन जैसे विषयों पर प्राथमिक रूप से चर्चाएं केंद्रित रहीं। यूरोपीय संघ बांग्लादेश के तैयार वस्त्र (आरएमजी) उद्योग का सबसे बड़ा खरीदार है, ऐसे में वहां के औद्योगिक संकट को लेकर यूरोपीय राजनयिकों की सक्रियता स्वाभाविक मानी जा रही है।
संसदीय परिसर में जारी इस कूटनीतिक हलचल के पीछे देश भर में भड़का श्रमिक असंतोष एक मुख्य कारक बनकर उभरा है। गाजीपुर, सावर, आशुलीया, टोंगी और नारायणगंज जैसे प्रमुख औद्योगिक केंद्रों में गारमेंट और विनिर्माण इकाइयों के हजारों श्रमिक सड़कों पर उतर आए हैं। न्यूनतम वेतन में संशोधन, बकाया भत्तों के भुगतान, और यूनियनों के वैधानिक अधिकारों की मांग को लेकर शुरू हुआ यह आंदोलन कई स्थानों पर सुरक्षा बलों के साथ हिंसक झड़पों में बदल गया है। कई कारखानों में आगजनी और मशीनरी को नुकसान पहुंचाए जाने की घटनाएं सामने आई हैं, जिसके कारण उद्योग मालिकों ने दर्जनों उत्पादन इकाइयां अनिश्चितकाल के लिए बंद करने की घोषणा कर दी है।
श्रमिक आंदोलन के तेजी से हिंसक होने के चलते कानून-व्यवस्था की स्थिति पर गंभीर दबाव बन गया है। सुरक्षा एजेंसियों का आकलन है कि आर्थिक असंतोष का लाभ उठाकर विभिन्न राजनीतिक गुट अपने संगठनात्मक प्रभाव को पुनः स्थापित करने का प्रयास कर रहे हैं। बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) के कार्यकारी अध्यक्ष तारिक रहमान के लंदन से दिए जा रहे निर्देशों और पार्टी के वरिष्ठ नेताओं की बढ़ती गतिविधियों के बीच राजनीतिक हलकों में यह चर्चा जोर पकड़ रही है कि क्या मौजूदा अंतरिम व्यवस्था के स्थान पर एक सर्वदलीय अथवा राष्ट्रीय सरकार (नेशनल गवर्नमेंट) के गठन की भूमिका तैयार की जा रही है। मेजर (रिटायर्ड) हफीज उद्दीन अहमद स्वयं बीएनपी के एक अत्यंत प्रभावशाली और वरिष्ठ रणनीतिकार रहे हैं, जिसके कारण उनकी प्रत्येक राजनयिक पहल को पार्टी की आगामी सत्ता रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है।
संसद सचिवालय के अधिकारियों ने इन बैठकों को केवल औपचारिक शिष्टाचार भेंट (कर्टसी कॉल) बताया है, लेकिन राजनयिक समीक्षकों का मानना है कि समय का चुनाव इसे अत्यंत संवेदनशील बनाता है। शेख हसीना सरकार के पतन के बाद से देश में संस्थागत शून्यता को भरने के प्रयास जारी हैं। अंतरराष्ट्रीय समुदाय, विशेष रूप से पश्चिमी देश और बहुपक्षीय वित्तीय संस्थान, बांग्लादेश में राजनीतिक स्थिरता और पारदर्शी चुनावी प्रक्रिया की जल्द बहाली पर जोर दे रहे हैं। विदेशी राजदूतों द्वारा स्पीकर से मिलने का एक विधिक कारण यह भी देखा जा रहा है कि संवैधानिक रूप से संसद अध्यक्ष का पद राज्य की निरंतरता और संवैधानिक वैधता का एक औपचारिक प्रतीक माना जाता है।
मौजूदा स्थिति में कानून प्रवर्तन एजेंसियों और सेना के संयुक्त गश्ती दस्तों ने ढाका और आसपास के औद्योगिक क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी है। गृह मंत्रालय और श्रम मंत्रालय के प्रतिनिधियों ने कारखाने मालिकों तथा मजदूर संघों के प्रतिनिधियों के साथ कई दौर की वार्ताएं की हैं, ताकि गतिरोध को समाप्त किया जा सके। इसके बावजूद कारखानों के गेटों पर मजदूरों का जमावड़ा बना हुआ है। राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि जब तक औद्योगिक क्षेत्रों में शांति बहाल नहीं होती और निर्वाचन आयोग की ओर से चुनाव रोडमैप पर स्पष्टता नहीं आती, तब तक ढाका के कूटनीतिक और संसदीय गलियारों में बैठकों और कयासों का यह सिलसिला निरंतर जारी रहेगा।
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