Special Article: भारत -उज्बेकिस्तान संबंधों का नया दौर
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उज्बेकिस्तान यात्रा सफलतापूर्वक संपन्न हो गयी है। इस यात्रा का उद्देश्य मध्य एशिया में भारत की रणनीतिक
लेखक: मृत्युंजय दीक्षित
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उज्बेकिस्तान यात्रा सफलतापूर्वक संपन्न हो गयी है। इस यात्रा का उद्देश्य मध्य एशिया में भारत की रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करना और इस क्षेत्र के साथ सभ्यतागत संबंधों को पुनः प्रगाढ़ करना था। प्रधानमंत्री मोदी का ताशकंद हवाई अड्डे पर राष्ट्रपति शौकत मिर्जियोयेव ने स्वयं उपस्थित रहकर स्वागत किया। इस यात्रा के दौरान दोनों देशों के प्रतिनिधिमंडलों ने विकसित भारत -2047 और यांगी उज्बेकिस्तान - 2030 के साझा विजन पर चर्चा की। ताशकंद और दिल्ली के मध्य संबंध अत्यंत ऐतिहासिक, आर्थिक, राजनयिक व सामरिक महत्व के रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इस यात्रा का समय की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है क्योंकि पाकिस्तान भारत के खिलाफ नित नई रणनीति बना रहा है और मक्का समझौते के अंतर्गत इस्लामिक नाटो का गठन किया जा रहा है। उज्बेकिस्तान दुनिया का एक बड़ा मुस्लिम देश है जहाँ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का भव्य स्वागत भारत विरोधी ताकतों को एक संदेश है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास़्त्री के समारक पर भी गए और वहां पर पुष्पांजलि भी अर्पित की। स्वर्गीय लाल बहादुर शास़्त्री जी का 11 जनवरी 1966 को ताशकन्द में ही निधन हो गया था।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उज़्बेकिस्तान दौरे उनको उज्बेकिस्तान का सर्वोच्च राजकीय सम्मान ओली दाराजी दाराजली दोस्तलिक प्रदान किया गया। राष्ट्रपति शौकत मिर्जियोयेव ने कुकसराय राष्ट्रपति भवन में यह सम्मान दिया। भारत -उज्बेकिस्तान की ऐतिहासिक मित्रता और व्यापक रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के योगदान के लिए यह सम्मान मिला। इसके साथ ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को मिलने वाले अंतरराष्ट्रीय सम्मानों की संख्या बढ़कर 36 हो गयी है। यह सम्मान भारत के प्रभाव की बढ़ती वैश्विक मान्यता का प्रतीक है। हर भारतीय के लिए यह गर्व का क्षण है। प्रधानमंत्री की यात्रा के दौरान उज्बेकिस्तान में दोनों देशों के मध्य यूरेनियम समेत कई क्षेत्रों में 11 समझौते भी हुए। इसमें संस्कृति, आयुर्वेद, खनिज संसाधन, पर्यटन, शिक्षा, पर्यावरण, वित्त और वैज्ञानिक शोध समेत 11 समझौतों और अन्य कदमों की घोषणा की गई है।
बौद्ध स्थलों के संरक्षण में सहयोग- भारत -उज्बेकिस्तान के प्राचीन बौद्ध स्थलों फयषज टीपा और करा टीपा के संरक्षण और पुनरुद्धार में भी सहयोग करेगा। ये दोनों ऐतिहासिक स्थल उज्बेकिस्तान के तेरमेज क्षेत्र में स्थित हैं। इसके लिए भारत के विदेश मंत्रालय और उज्बेकिस्तान की सांस्कृतिक विरासत एजेंसी के बीच लेटर ऑफ़ इंटेंट हुआ है। दोनों देशों के अभिलेखागारों के बीच भी सहयोग का समझौता हुआ है।
अब उज्बेकिस्तान में भी यूपीआई की दस्तक - भारत के डिजिटल भुगतान तंत्र यूपीआई को विस्तार मिलने जा रहा है। एनपीसीआई इंटरनेशनल पेमेंट्स लिमिटेड और उज्बेकिस्तान के नेशनल इंटरबैक प्रोसेसिंग सेंटर के मध्य वाणिज्यिक समझौता हुआ है। साथ ही हिंदी भाषा के लिए 100 लाल बहादुर शास्त्ऱी छात्रवृत्तियां प्रदान करने का व्यापक समझौता हुआ है।
इस अवसर पर उज्बेकिस्तान ने भारतीय नागरिकों के लिए 30 दिन के वीजा -फ्री सिस्टम की शुरूआत की । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उज्बेकिस्तान यात्रा कई मायने में महत्वपूर्ण रही है क्योंकि वर्तमान समय में भारत के लिए मध्य एशिया मात्र भूगोल नहीं रहा अपितु एक ऐसा क्षेत्र बन गया है जहां चीन, रूस, तुर्किए अमेरिका और यूरोपीय देश अपना प्रभाव बढ़ाने का प्रयास कर रहे हैं। भारत के सामने इस वृहद क्षेत्र में कनेक्टिविटी की चुनौती भी है। पाकिस्तान की वजह से भारत का मध्य एशिया तक सीधा सड़क मार्ग नहीं है। भारत का उज्बेकिस्तान से रक्षा सहयोग बेहद अनिवार्य है । दोनों देशों ने 2019 में ही रक्षा क्षेत्र में संयुक्त कार्यसमूह का गठन किया था। अगस्त 2026 में इस समूह की बैठक उज्बेकिस्तान में ही हुई थी। दोनों देशों की सेनाएं नियमित रूप से दस्तलिक नामक संयुक्त सैन्य अभ्यास भी करती हैं।इस रक्षा सहयोग का सबसे अहम पहलू आतंकवाद और कट्टरपंथ से मुकाबला है। अफगानिस्तान के बेहद करीब होने के कारण वहां की अस्थिरता का असर उसके पड़ोसी देशों पर ही नहीं अपितु पूरे मध्य एशिया पर पड़ सकता है।
भारत और उज्बेकिस्तान के मध्य रक्षा सहयोग केवल प्रशिक्षण व अभ्यास तक ही सीमित नही है अपितु दोनों देश आतंकवाद विरोधी अभियानों और कठिन भौगोलिक परिस्थितियों में सुरक्षा अभियानों से जुड़े अनुभव साझा कर सकते हैं। प्रधानमंत्री मोदी की यात्रा के माध्यम से द्विपक्षीय व्यापार को भी लगभग 3 अरब डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा है। मुक्त व्यापार समझौते पर भी चर्चा हुई है। वर्तमान समय में वैश्विक फलक पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत की छवि व साख लगातार बढ़त पर है। विश्व का हर देश भारत का यूपीआई अपनाना चाहता है और साथ ही भारत के साथ मुक्त व्यापार समझौता भी करना चाहता है।
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