Special Article: हनुमान अंश की अपार सफलता ओैर भारतीय सिनेमा का नया परिदृश्य 

निर्माता निर्देशक विशाल चतुर्वेदी की आध्यात्मिक संत बाबा नीब करौली के जीवन पर बनी फिल्म हनुमान अंश सफलता के नये आयाम छू

By INA News Desk
Sep 19, 2026 - 13:18
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Special Article: हनुमान अंश की अपार सफलता ओैर भारतीय सिनेमा का नया परिदृश्य 
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लेखक: मृत्युंजय दीक्षित

निर्माता निर्देशक विशाल चतुर्वेदी की आध्यात्मिक संत बाबा नीब करौली के जीवन पर बनी फिल्म हनुमान अंश सफलता के नये आयाम छू रही है। फिल्म के प्रति आम जनमानस में इतना उत्साह है कि एक लंबे अंतराल के बाद कोई फिल्म 5 वां सप्ताह छू सकी है। देश के अनेकानेक सिनेमाघरों में हनुमान अंश अभी भी हाउसफुल चल रही है तथा अनेक सिनेप्रेमी फिल्म देखने के लिए कतार में लगे हैं। बॉलीवुड के इतिहास में लंबे अंतराल के बाद कोई ऐसी फिल्म आई है जिसके विषय में हर कोई बात कर रहा है हर जगह बात हो रही है। 
हनुमान अंश ने सिनेमा जगत के कई मिथकों को ध्वस्त कर दिया है। हनुमान अंश की सफलता से यह बात स्पष्ट हो गई है कि भारत का जनमानस बॉलीवुड सिनेमा की गंदगी व बेसिरपैर की कहानियों से ऊब चुका है तथा कुछ अच्छा देखना चाहता है। हनुमान अंश ने अपनी लोकप्रियता के माध्यम से फिल्मों की सफलता के लिए एक लंबी रेखा खींच दी है। फिल्म के सफलता के लिए किसी बड़े नायक -नायिका, केवल हिंसा औरअश्लीलता परोसने वाला फार्मूला टूट गया है। 
हनुमान अंश की सफलता सिर्फ करोड़ों की कमाई तक ही सीमित नहीं है। फिल्म की शुरुआत बहुत छोटी थी, न बड़े स्टार का सहारा था, न हजारों स्क्रीन और न ही सुनियोजित प्रचार फिर भी मात्र दो करोड़ में बनी हनुमान अंश ने करोड़ों की कमाई वाली फिल्मों के क्लब में स्थान बना लिया। जिस फिल्म के निर्माताओं ने स्वयं कोई प्रचार नहीं किया उसका प्रचार सोशल मीडिया पर उसके दर्शक कर रहे हैं ।बॉलीवुड के बड़े -बड़े दिग्गज फिल्म की सफलता को लेकर हैरान हो रहे हैं। 
हनुमान अंश की यात्रा:  बिना किसी भारी भरकम प्रचार और मात्र 2 करोड़ के बजट से बनी यह फिल्म केवल 3 से 25 सिनेमाघरों में घिसट -घिसट कर शुरू हुई थी और आज देश के 1200 से 1500 स्क्रीन और रोजना 5,000 से 9,000 शोज तक जा पहुंची है। एक अनुमान के अनुसार प्रदर्शन के 40वें दिन तक एक करोड़ लोग इस फिल्म को देख चुके हैं तथा इतने ही लोग अपनी बारी की प्रतीक्षा कर रहे हैं। फिल्म की सफलता का यह आलम है कि अब नीब करौली बाबा से जुड़े सभी स्थलों का पर्यटन की दृष्टि से विकास किया जा रहा है तथा बाबा के धाम कैंचीधाम में भी भक्तों व पर्यटकों की भारी भीड़ उमड़ रही है। उत्तराखंड व छत्तीसगढ़ में हनुमान अंश को टैक्स फ्री कर दिया गया है। पहले बॉलीवुड में 10 साल की बड़ी हिट फिल्मों में दंगल, घुरंधर, एनिमल, पठान, छावा, कंतारा, धारा 370 पर बनी फिल्मों के नाम लेते थे किंतु इस एक फिल्म ने इस लिस्ट को सदा -सदा के लिए बदल दिया है ।  
कई स्थानों पर हनुमान अंश के दर्शक भगवा वस़्त्र व साड़ी पहनकर नंगे पांव जा रहे हैं, कई जगह सिनेमा हॉल  मंदिर में परिवर्तित हो गए हैं जहां हनुमान चालीसा का पाठ तथा फिल्म के समापन के बाद हनुमान चालीसा व प्रसाद का वितरण हो रहा है। बहुत दिनों बाद दर्शकों को ऐसी फिल्म देखने को मिली है जो परिवर के साथ बैठकर देखी जा सकती है। 
हनुमान अंश की कहानी हनुमानभक्त बाबा नीब करौली के जीवन प्रसंगों पर आधारित है। फिल्म में नये कलाकार हैं ,जिनकी कभी कहीं चर्चा नहीं हुई फिर भी फिल्म में कहीं कोई ऊबासी का क्षण नहीं आया। हनुमान अंश मनोरंजक, ज्ञानवर्धक व नये आघ्यात्मिक विचारों को जन्म देने वाली फिल्म है । फिल्म की सफलता का सबसे बड़ा कारण यह है कि आज घरों में  इस प्रकार के आध्यात्मिक चमत्कारों पर कोई चर्चा नहीं होती और सभी के लिए इसमें नयापन है। 
अभी तक लोग केवल महात्मा गांधी के विषय में जानते थे कि उन्हें दक्षिण अफ्रीका में भारतीय होने के नाते ट्रेन से नीचे फेंक दिया गया था किंतु इस फिल्म के माध्यम से दर्शकों को पता चल रहा है कि ऐसी ही एक घटना बाबा नीब करौरी के साथ भी घटित हुई थी। जब बाबा एक ट्रेन के एसी डिब्बे में चढ़ गए थे और अपने सहयेागी के साथ भजन गा रहे थे। वह डिब्बा अंग्रेज अफसरों के लिए  था। ट्रेन में सफर कर रहे अंग्रेज अफसर को यह बात नागवार गुजरी और उसने जबरदस्ती ट्रेन रुकवाकर बाबा को ट्रेन से उतरवा दिया जिसके बाद  वह ट्रेन आगे बढ़ ही नहीं सकी। बाद में बाबा को मनाया गया और उन्हें वापस ट्रेन पर बिठाया गया तब ट्रेन दोबारा चल सकी। 
बाबा नीब करौली की भूमिका निभाने वाले  शोभिनव सत्य व फिल्म में बाबा की पत्नी की भूमिका निभाने वाली पूर्णिमा तिवारी ने अद्भुत अभिनय किया है। लखनऊ  रंगमंच के बड़े चेहरे अनिल रस्तोगी ने भी अपनी भूमिका के साथ न्याय किया है । बाबा के पिता बने लखनऊ के सामान्य से दिखने वाले रंगमंच कलाकार आजाद मिश्रा अपनी छोटी भूमिका में भी अत्यंत प्रभावशाली रहे हैं। 
हनुमान अंश की सफलता में संगीतकार धीरेंद्र मुलकलवार की मेहनत रंग लाई है। उन्हें कई बार असफलता का सामना करना पड़ा किंतु इस फिल्म ने उनका भाग्य चमका दिया है। फिल्म के नेत्रहीन गायक सुनील लोधी के भजन आज घर- घर में गाए जा रहे हैं। नेत्रहीन सुनील लोधी ट्रेनों  में ही भजन गाया करते थे, हनुमान अंश की सफलता से उनके भी अच्छे दिन आ गए हैं। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने उन्हें बुलाकर सम्मानित किया है तथा उनके नेत्रों का सर्वश्रेष्ठ उपचार कराने की घोषणा करी है। 
हनुमान अंश की सफलता से गदगद  फिल्म की दूसरी निर्माता और सहयोगी अनुप्रिया नागर ने कैंचीधाम जाकर बाबा का आशीर्वाद लिया। आज हर कोई “मैंने तेरे ही भरोसे हनुमान“ गाकर बाबा का आशीर्वाद प्राप्त कर रहा है ।अनुप्रिया नागर फिल्म बनाने से पहले प्रेमानंद महाराज से भी मिलने गई थीं। मुंबई में जन्मीं अनुप्रिया ने ब्रिटेन में पढ़ाई की है वो अर्थशास्त्री, कलाकार और फिल्म प्रोड्यूसर हैं ।  
हनुमान अंश ने सिद्ध कर दिया है कि सफल फिल्म के लिए हिंसा और अश्लीलता का मसाला मसाला, बड़े नाम, पैसा, वीएफएक्स की नही बल्कि अच्छी कहानी और और सही तरीके से उसे दिखाने की भावना ही काफी है। 

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