Lucknow News: लखनऊ में राष्ट्रधर्म का स्थापना दिवस: स्वांत रंजन बोले- विचारों को भ्रमित करने की कोशिशों से सतर्क रहे समाज

राष्ट्रवादी विचारों की यात्रा है राष्ट्रधर्म। इसमें निरन्तरता बनी रहनी चाहिये और इसे समाज के सभी वर्गों तक बार-बार पहुँचना

By INA News Desk
Sep 2, 2026 - 12:49
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Lucknow News: लखनऊ में राष्ट्रधर्म का स्थापना दिवस: स्वांत रंजन बोले- विचारों को भ्रमित करने की कोशिशों से सतर्क रहे समाज

लखनऊ। राष्ट्रवादी विचारों की यात्रा है राष्ट्रधर्म। इसमें निरन्तरता बनी रहनी चाहिये और इसे समाज के सभी वर्गों तक बार-बार पहुँचना चाहिये। यह बात राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय प्रचारक प्रमुख स्वांत रंजन ने कही। वे राष्ट्रधर्म मासिक पत्रिका के स्थापना दिवस पर आयोजित कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में बोल रहे थे।

उन्होंने कहा कि आज विचारों को भ्रमित करने का कार्य योजनाबद्ध रूप से किया जा रहा है। इससे सतर्क रहने और इसे समझने की आवश्यकता है। ऐसी परिस्थिति में राष्ट्रधर्म जैसी पत्रिका का महत्त्व अत्यधिक बढ़ जाता है क्योंकि यह राष्ट्रवादी विचारों के साथ निश्चित दिशा में चलकर समाज, संस्कृति और राष्ट्र के हित का कार्य कर रही है। इसी क्रम में स्वांत जी ने दीनदयाल उपाध्याय, अटल बिहारी वाजपेयी और भाउराव देवरस के प्रयासों का उल्लेख किया।

इस अवसर पर राष्ट्रधर्म के संस्थापक निदेशक पंडित दीनदयाल उपाध्याय की जयन्ती के उपलक्ष्य में आयोजित प्रतियोगिता के विजेताओं को कार्यक्रम में सम्मानित किया गया। चित्र प्रतियोगिता में प्रथम स्थान पाने वाले सुधांशु चौहान, द्वितीय स्थान सुदीप्त सिंह और तृतीय स्थान पाने वाली महक रावत को सम्मानित किया गया। प्रोत्साहन पुरस्कार प्रियांशी मिश्रा, लक्ष्मी सिंह और गौरी शुक्ला को दिया गया।

इसी तरह लेख प्रतियोगिता में प्रथम स्थान पाने वाली अंजू, शिवा श्रीवास्तव, द्वितीय स्थान पाने वाले प्रियांशु चौहान, वसुन्धरा बारी तथा तृतीय स्थान पाने प्रियांशु आर्य एवं अंशिका को सम्मानित किया गया। उल्लेखनीय है कि लेख प्रतियोगिता में प्रथम, द्वितीय और तृतीय पुरस्कार दो-दो प्रतिभागियों को दिये गये। प्रोत्साहन पुरस्कार आकांक्षा जय प्रकाश सिंह को दिया गया। कार्यक्रम में राष्ट्रधर्म के सितम्बर अंक का विमोचन भी किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता डॉ. ए.पी. तिवारी ने की। कार्यक्रम का संचालन प्रो. ओमप्रकाश सिंह ने किया। धन्यवाद ज्ञापन सर्वेश चन्द्र द्विवेदी ने किया।

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