महज 100 मीटर दूर था किनारा, फिर भी जलसमाधि बन गई जर्जर नाव: राघोपुर हादसे में 9 बच्चियों समेत 13 की मौत की इनसाइड स्टोरी

वैशाली के राघोपुर में महज 100 मीटर की दूरी पर स्थित किनारे तक पहुंचने से पहले नाव पलट गई, जिससे 9 बच्चियों सहित 13 लोगों की जान चली गई। जानिए इस दर्दनाक हादसे की पूरी इनसाइड स्टोरी।

By INA News Desk
Oct 15, 2026 - 18:27
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महज 100 मीटर दूर था किनारा, फिर भी जलसमाधि बन गई जर्जर नाव: राघोपुर हादसे में 9 बच्चियों समेत 13 की मौत की इनसाइड स्टोरी
  • राघोपुर नाव त्रासदी का सच: 6-8 की क्षमता वाली नाव पर सवार थे 25 लोग, शॉर्टकट के चक्कर में बुझ गए 13 घरों के चिराग
  • एक गांव, दो घर और 12 अर्थियां: श्राद्ध भोज से लौटते वक्त ढाब में समाई नाव, प्रशासनिक लापरवाही पर CO-थानाध्यक्ष नपे
  • वैशाली नाव हादसा इनसाइड स्टोरी: खटिया और रस्सियों के सहारे ग्रामीणों ने निकाले शव, 100 मीटर की दूरी भी पार न कर सकी जर्जर नौका

बिहार में वैशाली जिले के राघोपुर प्रखंड अंतर्गत रामपुर श्यामचंद पंचायत में हुए दर्दनाक नाव हादसे ने पूरे इलाके को गहरे सदमे में डाल दिया है। इस हादसे में 9 बच्चियों सहित 13 लोगों की असमय मौत हो गई। हादसे की इनसाइड स्टोरी बताती है कि यह त्रासदी किसी बहुत गहरे दरिया या मीलों लंबी यात्रा के दौरान नहीं, बल्कि महज 100 मीटर की चौड़ाई वाले पानी के पाट (ढाब) को पार करते वक्त हुई। सुरक्षित किनारा आंखों के ठीक सामने था, लेकिन जर्जर नाव और अत्यधिक भार के कारण चंद मिनटों के फासले ने 13 जिंदगियों को लील लिया।

  • श्राद्ध भोज से लौट रहे थे, 100 मीटर की दूरी बनी काल

घटना मंगलवार देर शाम की है। रामपुर श्यामचंद पंचायत के भगतान टोले में एक श्राद्ध भोज का आयोजन था। इसी पंचायत के दूसरे टोले में रहने वाले लोग भोज में शामिल होने गए थे। आयोजन स्थल और घर के बीच मुख्य संपर्क मार्ग व पुल का रास्ता मौजूद था, लेकिन पैदल चक्कर से बचने के लिए लोगों ने गंगा की उपधारा (ढाब) से होकर सीधे नाव से निकलने का विकल्प चुना।

स्थानीय भूगोल के अनुसार, गर्मियों में इस ढाब का फैलाव बहुत कम रहता है, लेकिन जलस्तर बढ़ने पर दोनों किनारों के बीच की दूरी लगभग 100 मीटर हो गई थी। ढाब भले ही मुख्य गंगा जितनी चौड़ी न दिखती हो, लेकिन तलहटी में मिट्टी के धंसान और तेज धारा के चलते इसकी गहराई कई जगहों पर 12 से 15 फीट तक पहुंच जाती है।

  • 6-8 की क्षमता और नाव पर सवार थे 25 लोग

प्रत्यक्षदर्शियों और ग्रामीणों से मिली जानकारी के मुताबिक, जिस नाव पर लोग सवार हुए वह काफी पुरानी और जर्जर स्थिति में थी। तकनीकी रूप से उस छोटी देशी नाव की वहन क्षमता महज 6 से 8 लोगों की थी, लेकिन उस पर 20 से 25 बच्चे, युवतियां और महिलाएं सवार हो गईं।

नाव जैसे ही किनारे से खुलकर बीच धारा में पहुंची, पेंदी और किनारों से पानी अंदर रिसने लगा। सवार लोगों ने घबराकर पानी को बाहर फेंकने की कोशिश की, लेकिन अनियंत्रित वजन और पानी के भारी दबाव से नाव डगमगा गई। किनारे से महज कुछ मीटर की दूरी पर नाव पूरी तरह असंतुलित होकर पलट गई। चीख-पुकार मचते ही कुछ युवा तैरकर बाहर निकल आए, लेकिन कम उम्र के बच्चे और किशोरियां संभल नहीं सके और गहरे पानी में समा गए।

  • एक ही आंगन से उठीं सात अर्थियां, दो परिवारों पर टूटा कहर

इस हादसे का सबसे मार्मिक और हृदयविदारक पहलू यह रहा कि जान गंवाने वाले अधिकांश लोग एक ही गांव के दो परिवारों से थे। रामपुर श्यामचंद निवासी सुरेश राय के परिवार के सात सदस्यों की जलसमाधि बन गई। इनमें तीन भाइयों के छह बच्चे और उनकी सबसे छोटी इकलौती बहन सोनी कुमारी शामिल थीं।

वहीं दूसरे परिवार में सत्येंद्र राय की बेटी निशु, उनके भतीजे राजकिशोर राय की तीन मासूम बेटियां (अंकिता, अंकि, अमृता) और एक अन्य भतीजे के 8 वर्षीय पुत्र नमन की डूबने से मौत हो गई। बुधवार को जब खालसा घाट पर एक साथ शवों की अंत्येष्टि की गई, तो पूरा गांव फफक पड़ा और कई घरों में चूल्हे तक नहीं जले।

  • सिस्टम की लापरवाही और प्रशासनिक एक्शन

हादसे के बाद ग्रामीणों ने बचाव कार्य में देरी और स्थानीय स्तर पर सुरक्षा उपकरणों की अनुपलब्धता को लेकर कड़ा आक्रोश जताया। स्थानीय लोगों का कहना था कि यदि घाट पर नियमित नाविक, लाइफ जैकेट और मोटरबोट की व्यवस्था होती, तो कई जानें बचाई जा सकती थीं। हादसे की गंभीरता को देखते हुए जिला प्रशासन ने तत्काल प्रभाव से राघोपुर के अंचलाधिकारी (CO) और स्थानीय थानाध्यक्ष (SHO) का वेतन रोकते हुए उनसे स्पष्टीकरण तलब किया है।

घटना के बाद केंद्र और राज्य सरकार की ओर से सहायता की घोषणाएं की गईं। केंद्रीय गृह राज्यमंत्री नित्यानंद राय ने मृतकों के आश्रितों को छह-छह लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने का ऐलान किया। स्थानीय विधायक और नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने गांव पहुंचकर परिजनों को सांत्वना दी और मामले की उच्चस्तरीय न्यायिक जांच कराने तथा पीड़ित परिवारों को जमीन व पुनर्वास सहायता देने की मांग उठाई। वहीं केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने एनएमसीएच (NMCH) पहुंचकर उपचाराधीन बच्चों के स्वास्थ्य की जानकारी ली।

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