मोदी कैबिनेट का बड़ा निर्णय: तीन पेंशन योजनाओं से हटा इंदिरा गांधी का नाम, दिव्यांग पेंशन नियमों में भी बड़े बदलाव
केंद्रीय कैबिनेट ने राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम (NSAP) के तहत तीन प्रमुख पेंशन योजनाओं से पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी का नाम हटा दिया है। जानिए नए नाम, बजट और दिव्यांग पेंशन नियमों के बदलाव।
- NSAP का बदला स्वरूप: अब 'पीएम पेंशन योजना' के नाम से जानी जाएंगी पुरानी योजनाएं, 2031 तक ₹53,428 करोड़ का बजट मंजूर
- केंद्रीय कैबिनेट का फैसला: वृद्धावस्था, विधवा और दिव्यांग पेंशन से हटा इंदिरा गांधी का नाम; पात्रता सीमा घटकर 40% हुई
- सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का नया खाका: इंदिरा गांधी पेंशन स्कीम्स अब कहलाएंगी 'पीएम पेंशन', 3.2 करोड़ लाभार्थियों को सीधा लाभ
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में आयोजित केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में देश के सामाजिक सुरक्षा ढांचे को लेकर कई दूरगामी और महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। केंद्र सरकार ने अपने प्रमुख सामाजिक सुरक्षा कार्यक्रम 'राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम' (NSAP) को अगले पांच वर्षों यानी वर्ष 2031 तक निरंतर जारी रखने की मंजूरी प्रदान कर दी है। इस पुनर्गठन के साथ ही कार्यक्रम का नाम बदलकर 'प्रधानमंत्री सामाजिक सहायता योजना' कर दिया गया है।
इसके अतिरिक्त, इस कार्यक्रम के तहत संचालित होने वाली तीन प्रमुख उप-योजनाओं के शीर्षकों से पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय इंदिरा गांधी का नाम हटाकर उन्हें नया स्वरूप प्रदान किया गया है।
- अब क्या कहलाएंगी तीनों पेंशन योजनाएं?
कैबिनेट के निर्णय के अनुसार, पूर्ववर्ती नामों के स्थान पर अब ये योजनाएं प्रधानमंत्री के नाम से संचालित होंगी:
इंदिरा गांधी राष्ट्रीय वृद्धावस्था पेंशन योजना का नया नाम अब पीएम वृद्धावस्था पेंशन योजना होगा।
इंदिरा गांधी राष्ट्रीय विधवा पेंशन योजना को अब पीएम विधवा पेंशन योजना के रूप में जाना जाएगा।
इंदिरा गांधी राष्ट्रीय दिव्यांग पेंशन योजना का नाम बदलकर अब पीएम दिव्यांगजन पेंशन योजना कर दिया गया है।
इससे पहले भी केंद्र सरकार ने ग्रामीण रोजगार योजना 'मनरेगा' के नाम और ढांचे में नीतिगत सुधार करते हुए उसे नई व्यवस्था से जोड़ा था। अब इसी क्रम में केंद्रीय सामाजिक सहायता की उप-योजनाओं का नामकरण भी मानकीकृत किया गया है।
- ₹53,428 करोड़ का बजट और 3.2 करोड़ लाभार्थियों को लाभ
कैबिनेट ने इस व्यापक सामाजिक सुरक्षा तंत्र को मजबूती देने के लिए 53,428 करोड़ रुपये का भारी-भरकम वित्तीय परिव्यय निर्धारित किया है। इस बजटीय आवंटन से देश भर के करीब 3.2 करोड़ आर्थिक रूप से कमजोर और जरूरतमंद नागरिकों को वित्तीय सहायता की निरंतरता सुनिश्चित होगी। इसमें मुख्य रूप से गरीबी रेखा से नीचे जीवनयापन करने वाले वरिष्ठ नागरिक, निराश्रित विधवा महिलाएं और दिव्यांगजन शामिल हैं।
दिव्यांगजन पेंशन में ऐतिहासिक वृद्धि और पात्रता नियमों में ढील
इस नीतिगत बदलाव का सबसे व्यावहारिक और प्रभावी पहलू दिव्यांगजनों से जुड़े नियमों में संशोधन है। 'दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016' के कानूनी प्रावधानों के अनुरूप नियमों को संशोधित करते हुए सहायता राशि में इजाफा किया गया है:
पात्रता सीमा में बड़ी कटौती: अब तक दिव्यांग पेंशन के लिए बेंचमार्क विकलांगता की न्यूनतम सीमा 80 प्रतिशत तय थी। सरकार ने इसे घटाकर 40 प्रतिशत कर दिया है। इस एक कदम से देश के 27.48 लाख से अधिक नए दिव्यांग नागरिक इस वित्तीय सहायता के दायरे में आ सकेंगे।
मासिक पेंशन में बढ़ोतरी: जन्म से लेकर 79 वर्ष की आयु तक के पात्र दिव्यांगों के लिए केंद्र की ओर से मिलने वाली मासिक सहायता को 300 रुपये से बढ़ाकर 375 रुपये प्रति माह कर दिया गया है।
वरिष्ठ दिव्यांगों को अधिक लाभ: 80 वर्ष या उससे अधिक आयु वर्ग के बुजुर्ग दिव्यांगजनों की मासिक पेंशन 500 रुपये से बढ़ाकर 625 रुपये प्रति माह कर दी गई है।
अधिनियम के तहत यह सुनिश्चित किया गया है कि दिव्यांगजनों को मिलने वाली न्यूनतम सहायता सामान्य पेंशन श्रेणियों की तुलना में कम से कम 25 प्रतिशत अधिक रहे। यह संशोधित व्यवस्था केंद्रीय सहायता के रूप में सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) के जरिए भेजी जाएगी।
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