Bihar Politics: नीतीश और रामविलास के बाद अब लालू प्रसाद की बारी? चिराग पासवान के बयान से गरमाई बिहार की सियासत

केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने बिहार की राजनीति में पीढ़ीगत बदलाव को लेकर बड़ा बयान दिया है। नीतीश, रामविलास के बाद लालू प्रसाद के राजनीतिक दौर के भविष्य पर उठे सवाल।

By INA News Desk
Sep 11, 2026 - 14:03
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Bihar Politics: नीतीश और रामविलास के बाद अब लालू प्रसाद की बारी? चिराग पासवान के बयान से गरमाई बिहार की सियासत
  • Bihar Politics: नीतीश और रामविलास के बाद अब लालू प्रसाद की बारी? चिराग पासवान के बयान से गरमाई बिहार की सियासत
  • चिराग पासवान का बड़ा सियासी संकेत: नीतीश कुमार और रामविलास पासवान के दौर के बाद लालू परिवार के भविष्य पर उठाए सवाल
  • Bihar Political News: पुरानी पीढ़ी की विदाई और नए नेतृत्व की चुनौती, चिराग के बयान पर राजद और जदयू में तीखी हलचल
  • Chirag Paswan Statement: बिहार में 'त्रिमूर्ति' राजनीति के अवसान का दावा, क्या 2025 के बाद बदलेगा सूबे का पूरा समीकरण?

बिहार की राजनीति में दशकों तक सत्ता और विपक्ष की धुरी रहे तीन प्रमुख चेहरों लालू प्रसाद यादव, नीतीश कुमार और दिवंगत रामविलास पासवान के इर्द-गिर्द घूमने वाले दौर के अंत को लेकर लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के प्रमुख और केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान के हालिया बयान ने राज्य के राजनीतिक गलियारों में नई बहस छेड़ दी है। चिराग पासवान ने एक सार्वजनिक कार्यक्रम और मीडिया संवाद के दौरान राज्य में पीढ़ीगत बदलाव की ओर संकेत करते हुए कहा कि जिस तरह उनके पिता रामविलास पासवान अब इस दुनिया में नहीं हैं और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार अपने राजनीतिक जीवन के अंतिम पड़ाव की ओर अग्रसर हैं, ठीक उसी तरह अब राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के प्रमुख लालू प्रसाद यादव के सक्रिय राजनीतिक युग का अवसान भी निकट है।

चिराग पासवान के इस कथन को केवल एक सामान्य राजनीतिक टिप्पणी के रूप में नहीं देखा जा रहा है, बल्कि इसे आगामी विधानसभा चुनावों से पहले बिहार की नई राजनीतिक संरचना और नेतृत्व के पुनर्गठन की दिशा में एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। बयान सामने आते ही सत्तारूढ़ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के सहयोगी दलों के साथ-साथ विपक्षी महागठबंधन के खेमे में भी तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं।

तीन दशकों की 'त्रिमूर्ति' और बिहार की धुरी

बिहार की राजनीति 1990 के दशक से मुख्य रूप से इन तीन बड़े नेताओं के सामाजिक और राजनीतिक समीकरणों पर आधारित रही है।

लालू प्रसाद यादव ने सामाजिक न्याय और पिछड़ा-अल्पसंख्यक गठजोड़ के जरिए राज्य की सत्ता पर 15 वर्षों तक सीधा प्रभाव बनाए रखा।

इसके बाद सुशासन और विकास के एजेंडे के साथ उभरे नीतीश कुमार ने पिछले दो दशकों से राज्य की सत्ता की कमान अपने हाथों में रखी है।

वहीं रामविलास पासवान ने दलित, वंचित और शोषित वर्ग को एक संगठित राजनीतिक शक्ति बनाकर केंद्र और राज्य दोनों स्तरों पर 'किंगमेकर' की स्थायी भूमिका निभाई।

चिराग पासवान का तर्क है कि 1990 के मंडल दौर से निकली यह त्रिमूर्ति अब व्यावहारिक रूप से समाप्त हो रही है। रामविलास पासवान के निधन के बाद उनकी विरासत को चिराग खुद आगे बढ़ा रहे हैं, जबकि जदयू में नीतीश कुमार के बाद कोई सर्वमान्य उत्तराधिकारी स्पष्ट रूप से सामने नहीं आ पा रहा है। ऐसे में चिराग का दावा है कि स्वास्थ्य कारणों और उम्र के तकाजे के चलते लालू प्रसाद यादव की सक्रिय राजनीति से दूरी अब राजद को भी एक बड़े आंतरिक और बाहरी संक्रमण काल में धकेल रही है।

क्या तेजस्वी के सामने नेतृत्व की साख का संकट है?

चिराग पासवान के बयान का सीधा निशाना राजद नेता तेजस्वी यादव की राजनीतिक साख पर माना जा रहा है। चिराग ने इशारों-इशारों में यह सवाल खड़ा किया कि लालू प्रसाद यादव की अनुपस्थिति या निष्क्रियता में क्या राजद अपने पारंपरिक जनाधार विशेष रूप से एम-वाई (मुस्लिम-यादव) समीकरण को पूरी तरह एकजुट रख पाएगी?

राजनीतिक पर्यवेक्षकों के अनुसार, जब तक लालू प्रसाद यादव मंच पर उपस्थित रहते हैं, तब तक पार्टी के पारंपरिक मतदाताओं में एक भावनात्मक जुड़ाव बना रहता है। लेकिन यदि लालू की जगह पूरी तरह से तेजस्वी यादव को केंद्रित किया जाता है, तो पार्टी को गैर-यादव पिछड़ों और अति-पिछड़ों को साधने में भारी मशक्कत करनी पड़ सकती है। चिराग पासवान स्वयं को बिहार के युवाओं के ऐसे प्रतिनिधि के रूप में प्रस्तुत कर रहे हैं जो जातिगत सीमाओं से परे 'बिहार फर्स्ट, बिहारी फर्स्ट' के विजन के साथ आगे बढ़ना चाहता है।

एनडीए और महागठबंधन की ओर से आई प्रतिक्रियाएं

चिराग पासवान की इस टिप्पणी पर राजद प्रवक्ताओं ने कड़ी आपत्ति दर्ज कराई है। राजद का कहना है कि लालू प्रसाद यादव केवल एक व्यक्ति या राजनेता नहीं, बल्कि देश भर में सामाजिक न्याय और धर्मनिरपेक्षता की एक मजबूत विचारधारा हैं। राजद नेताओं का दावा है कि तेजस्वी यादव ने पिछले चुनावों में यह सिद्ध कर दिया है कि वे जनता के असल मुद्दों रोजगार, शिक्षा और स्वास्थ्य पर राजनीति करने में सक्षम हैं और लालू के विचारों की जड़ें बिहार के हर गांव में मजबूत हैं।

दूसरी ओर, जनता दल (यूनाइटेड) के भीतर इस बयान को लेकर सतर्कता बरती जा रही है। जदयू के नेताओं का कहना है कि नीतीश कुमार वर्तमान में न केवल राज्य के निर्विवाद नेता हैं, बल्कि एनडीए के सर्वमान्य चेहरे के रूप में विकास कार्यों का नेतृत्व कर रहे हैं। हालांकि, चिराग द्वारा नीतीश के राजनीतिक भविष्य को लेकर की गई टिप्पणियों पर जदयू के कुछ नेता असहज भी दिखे हैं, लेकिन गठबंधन धर्म के चलते वे खुलकर टकराव से बचते नजर आए।

नई पीढ़ी के हाथों में सत्ता का हस्तांतरण

बिहार में मौजूदा समय में नेतृत्व परिवर्तन की प्रक्रिया जमीन पर साफ दिखाई दे रही है:

चिराग पासवान: दलित और युवा मतों के सहारे अपनी स्वतंत्र राजनीतिक जमीन मजबूत करने में जुटे हैं और केंद्र सरकार में प्रमुख मंत्री के रूप में राष्ट्रीय स्तर पर सक्रिय हैं।

तेजस्वी यादव: महागठबंधन के निर्विवाद नेता के रूप में खुद को मुख्यमंत्री पद के प्रबल दावेदार के रूप में स्थापित कर चुके हैं और लगातार जनसंवाद यात्राओं के जरिए मैदान में हैं।

भाजपा का नया प्रांतीय नेतृत्व: सम्राट चौधरी और विजय कुमार सिन्हा जैसे नेताओं के जरिए भाजपा भी पिछड़ी और सवर्ण जातियों के नए तालमेल के साथ भविष्य की राजनीति का खाका तैयार कर रही है।

जदयू की चुनौतियां: नीतीश कुमार के बाद पार्टी का कैडर और जनाधार किसके साथ जाएगा, यह सवाल अभी भी राज्य की राजनीति में अनुत्तरित बना हुआ है।

2025-26 के चुनावी समीकरणों पर क्या होगा असर?

बिहार में आने वाले विधानसभा चुनावों की बिसात अभी से बिछनी शुरू हो चुकी है। चिराग पासवान का यह बयान दर्शाता है कि राज्य में अब पारंपरिक नारों और पुराने प्रतीकों की जगह सीधे युवा नेतृत्व के बीच मुकाबला तय करने की होड़ मची है। चिराग यह स्थापित करने का प्रयास कर रहे हैं कि पुराने दिग्गजों के हटने के बाद बिहार की राजनीति का अगला बड़ा मुकाबला उनके और तेजस्वी यादव के बीच ही केंद्रित होगा।

यदि लालू प्रसाद यादव का सीधा हस्तक्षेप कम होता है और नीतीश कुमार की सक्रियता भी सीमित होती है, तो बिहार का मतदाता किस नए समीकरण पर भरोसा जताएगा, यह देखना दिलचस्प होगा। चिराग के इस दांव ने स्पष्ट कर दिया है कि आने वाले दिनों में बिहार की राजनीति में बयानों की तल्खी और राजनीतिक खींचतान और तेज होने वाली है।

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