पश्चिम बंगाल के एक स्कूल में अचानक हुई छापेमारी से सभी सन्न, पुलिसिया तलाशी में कमरे के भीतर से बरामद हुआ एक करोड़ सतहत्तर लाख रुपये का भारी-भरकम कैश
पश्चिम बंगाल के उत्तर 24 परगना जिले के कांचरापारा इलाके से एक ऐसी बेहद सनसनीखेज और झकझोर देने वाली खबर सामने
- छात्रों के लिए बने बीमार विश्राम कक्ष यानी 'सिक रूम' की अलमारी से नोटों की गड्डियों के साथ आपत्तिजनक सामग्री मिलने से सनसनी, शिक्षा व्यवस्था की मर्यादा तार-तार
- राजनैतिक भ्रष्टाचार और अनैतिक गतिविधियों के गंभीर आरोपों के घेरे में आया शैक्षणिक संस्थान, स्थानीय प्रशासन ने दो मुख्य लेखा अधिकारियों को हिरासत में लेकर पूछताछ की शुरू
पश्चिम बंगाल के उत्तर 24 परगना जिले के कांचरापारा इलाके से एक ऐसी बेहद सनसनीखेज और झकझोर देने वाली खबर सामने आई है जिसने पूरे देश की शिक्षा व्यवस्था और प्रशासनिक ईमानदारी पर एक बहुत बड़ा प्रश्नचिह्न खड़ा कर दिया है। यहां स्थित एक निजी अंग्रेजी माध्यम स्कूल के परिसर में स्थानीय पुलिस और केंद्रीय सुरक्षा बलों की संयुक्त टीम द्वारा की गई औचक छापेमारी के दौरान भारी मात्रा में नकदी और कई अन्य आपत्तिजनक सामग्रियां बरामद की गई हैं। पुलिस द्वारा रातभर चलाए गए इस व्यापक तलाशी अभियान में स्कूल के प्रशासनिक विंग से कुल एक करोड़ सतहत्तर लाख रुपये की भारी-भरकम नकदी जब्त की गई है। इस घटना की भनक लगते ही पूरे राज्य के प्रशासनिक और राजनैतिक हलकों में एक बड़ा भूचाल आ गया है। शिक्षा के मंदिर कहे जाने वाले स्थान पर इतनी बड़ी राशि का अनधिकृत रूप से रखा होना कई तरह के गंभीर संशयों को जन्म दे रहा है, जिसके बाद कानून प्रवर्तन एजेंसियों ने मामले की गहराई से जांच शुरू कर दी है।
इस पूरे घटनाक्रम ने उस समय एक बेहद शर्मनाक और अनैतिक मोड़ ले लिया जब पुलिस की टीम स्कूल के भीतर बने बीमार बच्चों के विश्राम कक्ष यानी 'सिक रूम' की तलाशी लेने पहुंची। इस कमरे के भीतर रखी एक बड़ी अलमारी को जब खोला गया, तो वहां से न केवल नोटों के बंडल मिले, बल्कि भारी मात्रा में गर्भनिरोधक यानी कंडोम के पैकेट और कुछ विदेशी शराब की बोतलें भी बरामद की गईं। इतना ही नहीं, स्कूल के प्रशासनिक कार्यालय के ठीक बगल वाले हिस्से में एक वातानुकूलित कमरा भी पाया गया जिसे पूरी तरह से एक आलीशान बेडरूम की तरह सजाया गया था। इस कमरे में एक आधुनिक बेड, बड़ा सा शीशा और ऐशो-आराम की तमाम सामग्रियां मौजूद थीं। एक स्कूल परिसर के भीतर जहां छोटे बच्चे शिक्षा ग्रहण करने आते हैं, वहां इस तरह के बेडरूम और आपत्तिजनक सामग्रियों की मौजूदगी ने स्थानीय अभिभावकों और आम जनता के भीतर भारी आक्रोश पैदा कर दिया है।
यह पूरी कार्रवाई उस समय शुरू हुई जब स्थानीय जनप्रतिनिधियों और सुरक्षा एजेंसियों को इस बात की गुप्त सूचना मिली थी कि इस स्कूल के भीतर बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितताएं चल रही हैं और भारी मात्रा में काला धन छुपाकर रखा गया है। सूचना के आधार पर जब पुलिस दल भारी सुरक्षा व्यवस्था के साथ बुधवार की देर रात स्कूल परिसर में दाखिल हुआ, तो शुरुआत में उन्हें कड़े विरोध का सामना करना पड़ा। लेकिन जब कड़ाई से कमरों के तालों को तोड़ा गया, तो वहां का नजारा देखकर खुद पुलिस अधिकारी भी दंग रह गए। नोटों की संख्या इतनी अधिक थी कि उनकी गिनती करने के लिए बैंक के अधिकारियों को विशेष रूप से रात में ही बुलाना पड़ा और सुबह के लगभग चार बजे तक लगातार चली गिनती के बाद इस पूरी राशि को सील कर दिया गया। इस मामले में पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए स्कूल के मुख्य कैशियर और सहायक लेखाकार को हिरासत में ले लिया है और उनसे इस धन के वास्तविक स्रोत को लेकर कड़ी पूछताछ की जा रही है।
इस शर्मनाक खुलासे के बाद स्कूल के कार्यवाहक प्रधानाचार्य ने तुरंत इस पूरे मामले से खुद को अलग करने का प्रयास किया है और अपनी सफाई पेश की है। प्रधानाचार्य का कहना है कि वे केवल स्कूल के शैक्षणिक कार्यों और बच्चों की पढ़ाई-लिखाई के लिए जिम्मेदार हैं और वित्तीय मामलों से उनका सीधा कोई सरोकार नहीं रहता है। उन्होंने दावा किया कि यह पैसा अप्रैल महीने से शुरू हुए नए शैक्षणिक सत्र के दौरान छात्रों से प्रवेश शुल्क और मासिक फीस के रूप में वसूला गया था, जिसे हर दो-तीन दिन में बैंक में जमा किया जाना था। हालांकि, जब उनसे यह पूछा गया कि इतनी बड़ी रकम को बैंक में जमा कराने के बजाय कई महीनों तक स्कूल के गुप्त कमरे में क्यों रखा गया, तो उनके पास इसका कोई संतोषजनक उत्तर नहीं था। इसके साथ ही बीमार कक्ष से मिले कंडोम के पैकेट और बेडरूम को लेकर भी उन्होंने पूरी तरह से अनभिज्ञता जाहिर करते हुए कहा कि यह सब कुछ उनकी कल्पना और जानकारी से परे है।
इस घटना के सामने आने के बाद पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक नया और बेहद आक्रामक मोड़ आ गया है। स्थानीय विपक्षी नेताओं ने सत्ताधारी दल पर सीधा हमला बोलते हुए आरोप लगाया है कि यह भारी-भरकम राशि स्कूल की फीस की नहीं, बल्कि राजनैतिक संरक्षण में पनप रहे भ्रष्टाचार का काला धन है। आरोप लगाया जा रहा है कि केंद्रीय जांच एजेंसियों के डर से कुछ बेहद प्रभावशाली राजनेताओं और नगर पालिका के पूर्व पदाधिकारियों ने इस स्कूल को अपनी अवैध कमाई छुपाने के सेफ हाउस के रूप में इस्तेमाल किया था। विपक्षी दलों का कहना है कि राज्य में पहले भी शिक्षा भर्ती घोटालों में करोड़ों रुपये की बरामदगी हो चुकी है और अब स्कूलों को इस तरह के अनैतिक कार्यों का अड्डा बनाना यह साबित करता है कि राज्य की पूरी व्यवस्था किस कदर सड़ चुकी है।
इस पूरे विवाद के सामाजिक प्रभाव को लेकर भी अब गंभीर चिंताएं जताई जा रही हैं। जिस स्कूल में सैकड़ों अभिभावक अपने बच्चों के सुरक्षित भविष्य और अच्छे संस्कारों की उम्मीद में भारी-भरकम फीस भरकर भेजते हैं, वहां इस तरह की अनैतिक गतिविधियों का चलना बेहद डरावना है। स्थानीय नागरिक और अभिभावक संघ अब स्कूल के बाहर एकत्र होकर प्रदर्शन कर रहे हैं और प्रबंधन के खिलाफ सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। लोगों का कहना है कि इस घटना ने बच्चों के कोमल मन-मस्तिष्क पर बेहद बुरा असर डाला है और जब तक इस पूरे मामले के असली दोषियों को सलाखों के पीछे नहीं भेजा जाता, तब तक वे अपने बच्चों को इस संस्थान में भेजने के लिए तैयार नहीं हैं।
What's Your Reaction?




