Radha Krishna Kishore Security: अनदेखी से नाराज वित्त मंत्री राधा कृष्ण किशोर ने लौटाई सरकारी सुरक्षा, बिना गार्ड सचिवालय पहुंचे

Finance Minister Radha Krishna Kishore Security: पुलिस मुख्यालय द्वारा अनदेखी से नाराज वित्त मंत्री राधा कृष्ण किशोर ने अपने 16 सुरक्षा गार्ड और 3 एस्कॉर्ट वाहन सरकार को वापस कर दिए हैं।

Jul 3, 2026 - 17:28
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Radha Krishna Kishore Security: अनदेखी से नाराज वित्त मंत्री राधा कृष्ण किशोर ने लौटाई सरकारी सुरक्षा, बिना गार्ड सचिवालय पहुंचे
राज्य के वित्त मंत्री राधा कृष्ण किशोर (Radha Krishna Kishore)
  • Finance Minister Security Return: पुलिस मुख्यालय के रवैये से खफा वित्त मंत्री ने वापस किए 16 गार्ड और 3 वाहन, सुरक्षा व्यवस्था पर उठाए सवाल
  • नाराज वित्त मंत्री ने सरकार को लौटा दी अपनी पूरी सुरक्षा! 16 गार्ड और 3 गाड़ियां वापस कर बिना एस्कॉर्ट सचिवालय पहुंचे राधा कृष्ण किशोर, जानिए वजह
  • Political Update: पुलिस मुख्यालय से नाराज वित्त मंत्री राधा कृष्ण किशोर ने सरकारी सुरक्षा और एस्कॉर्ट वाहन वापस लौटाए

राज्य के वित्त मंत्री राधा कृष्ण किशोर (Radha Krishna Kishore) और पुलिस मुख्यालय के बीच सुरक्षा व्यवस्था को लेकर तनातनी खुलकर सामने आ गई है। पुलिस मुख्यालय के कथित उपेक्षित रवैये से नाराज होकर वित्त मंत्री ने शुक्रवार को राज्य सरकार द्वारा उन्हें आवंटित की गई पूरी सुरक्षा व्यवस्था को वापस लौटा दिया है। मंत्री ने अपनी सुरक्षा में तैनात सभी 16 सुरक्षा गार्डों और उनके काफिले में शामिल 3 सरकारी वाहनों को तत्काल प्रभाव से वापस कर दिया। बताया जा रहा है कि काफिले में एक अतिरिक्त वाहन की मांग पर डीजीपी द्वारा कोई त्वरित निर्णय न लिए जाने से वित्त मंत्री नाराज थे। सुरक्षा छोड़ने के अपने इस बड़े फैसले के बाद शुक्रवार की सुबह मंत्री बिना किसी सुरक्षा घेरे और एस्कॉर्ट के ही सार्वजनिक कार्यक्रमों और प्रोजेक्ट भवन सचिवालय पहुंचे। इस घटनाक्रम के बाद प्रशासनिक और राजनीतिक हलकों में खलबली मच गई है।

  • वीवीआईपी सुरक्षा लौटाने का पूरा मामला

यह पूरा मामला राज्य के कैबिनेट मंत्री और वरिष्ठ राजनेता राधा कृष्ण किशोर की आधिकारिक सुरक्षा व्यवस्था से जुड़ा हुआ है। पुलिस मुख्यालय द्वारा उनकी मांगों की अनदेखी किए जाने के बाद, वित्त मंत्री ने एक कड़ा कदम उठाते हुए अपनी सुरक्षा को ही त्याग दिया है। शुक्रवार सुबह उन्होंने अपने आवास पर तैनात और काफिले के साथ चलने वाले 16 जवानों की टुकड़ी को वापस पुलिस लाइन भेज दिया, साथ ही उनके उपयोग में आने वाली तीन बड़ी गाड़ियों की चाबियां भी विभाग को सौंप दीं। मंत्री का तर्क है कि जिस तरह के नियमों और संसाधनों के साथ उन्हें सुरक्षा दी जा रही थी, वह व्यावहारिक नहीं थी।

  • पूरा घटनाक्रम: पत्र पर कार्रवाई न होने से बढ़ा विवाद

इस विवाद की पृष्ठभूमि पिछले दिनों तब तैयार हुई जब वित्त मंत्री राधा कृष्ण किशोर ने राज्य के पुलिस महानिदेशक (DGP) को एक आधिकारिक पत्र लिखा था। इस पत्र के माध्यम से उन्होंने अपने सुरक्षा काफिले की व्यावहारिक दिक्कतों का हवाला देते हुए एक अतिरिक्त एस्कॉर्ट वाहन उपलब्ध कराने का आग्रह किया था। मंत्री के करीबी सूत्रों का कहना है कि वर्तमान में आवंटित तीन वाहनों में जवानों को बेहद तंग स्थिति में, ठूंस-ठूंस कर बैठना पड़ता था, जिससे ड्यूटी पर तैनात जवानों को भी असुविधा होती थी।

इस पत्र को भेजे जाने के बाद भी पुलिस मुख्यालय या डीजीपी कार्यालय की ओर से इस पर कोई सकारात्मक या त्वरित निर्णय नहीं लिया गया। इस प्रशासनिक उदासीनता को वित्त मंत्री ने अपनी अनदेखी के रूप में देखा। इसी बात से क्षुब्ध होकर शुक्रवार सुबह उन्होंने एक बड़ा फैसला लिया। सुरक्षा वापस करने के तुरंत बाद मंत्री सुबह खेल गांव स्टेडियम में आयोजित एक कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होने पहुंचे, जहां उनके साथ कोई भी पुलिसकर्मी तैनात नहीं था। इसके बाद वह उसी बिना सुरक्षा वाले सामान्य वाहन से सचिवालय (प्रोजेक्ट भवन) के लिए रवाना हुए और दिनभर का कामकाज निपटाया।

  • इस संवेदनशील राजनीतिक और प्रशासनिक मुद्दे पर अलग-अलग पक्षों की राय इस प्रकार सामने आ रही है:

वित्त मंत्री राधा कृष्ण किशोर का तर्क: इस कड़े फैसले के पीछे वित्त मंत्री ने सीधे तौर पर प्रशासनिक अव्यवस्था को जिम्मेदार ठहराया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि महज 16 सुरक्षाकर्मियों की आवाजाही के लिए तीन बड़े वाहनों का काफिला रखना सुरक्षा के दृष्टिकोण से न तो उचित है और न ही व्यावहारिक। जब तक जवानों के लिए बैठने की सही व्यवस्था और अतिरिक्त गाड़ी नहीं मिलती, तब तक ऐसी सुरक्षा व्यवस्था रखना सही नहीं है।

मंत्री के नजदीकी सूत्र: मंत्री के करीबियों का कहना है कि यह केवल एक अतिरिक्त गाड़ी का मामला नहीं है, बल्कि एक कैबिनेट मंत्री के प्रोटोकॉल और सुरक्षा बल के जवानों के मानवीय गरिमा से जुड़ा विषय है। जवानों को गाड़ियों में भेड़-बकरियों की तरह बिठाना न्यायसंगत नहीं है।

पुलिस मुख्यालय और डीजीपी कार्यालय: इस पूरे मामले पर पुलिस प्रशासन के आला अधिकारियों ने अभी तक आधिकारिक तौर पर चुप्पी साध रखी है। हालांकि, आंतरिक सूत्रों का कहना है कि वीवीआईपी सुरक्षा नियमों (Security Manual) के तहत ही वाहनों का आवंटन किया जाता है और मंत्री के पत्र पर समीक्षा की जा रही थी।

  • सुरक्षा व्यवस्था और राजनीतिक गलियारों में हलचल

एक कैबिनेट दर्जे के मंत्री द्वारा सुरक्षा वापस लौटाए जाने का असर सीधे तौर पर राज्य की कानून व्यवस्था और प्रशासनिक तालमेल की छवि पर पड़ता है।

प्रशासनिक तालमेल पर सवाल: इस घटना से यह साफ संदेश गया है कि ब्यूरोक्रेसी (नौकरशाही) और कार्यपालिका (मंत्रियों) के बीच संवाद की कमी है।

सुरक्षा को लेकर चिंता: एक वरिष्ठ मंत्री का बिना किसी एस्कॉर्ट और गार्ड के सार्वजनिक स्थानों पर जाना उनकी व्यक्तिगत सुरक्षा के लिए बड़ा जोखिम पैदा करता है, जो खुफिया एजेंसियों के लिए भी चिंता का विषय है।

अन्य मंत्रियों पर असर: इस विवाद के बाद अब सरकार के अन्य मंत्रियों और वीवीआईपी को मिलने वाली सुरक्षा सुविधाओं और वाहनों के आवंटन की नीतियों की भी नए सिरे से समीक्षा शुरू हो सकती है।

शुक्रवार को दिनभर बिना सुरक्षा के घूमने के बाद अब मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) ने इस मामले में संज्ञान लिया है। उम्मीद जताई जा रही है कि गृह विभाग और डीजीपी स्तर पर इस गतिरोध को सुलझाने के लिए जल्द ही एक आपात बैठक बुलाई जा सकती है। गृह विभाग के वरिष्ठ अधिकारी वित्त मंत्री से संपर्क साधकर उन्हें मनाने और उनकी आवश्यकता के अनुसार सुरक्षा काफिले को अपग्रेड करने का प्रस्ताव दे सकते हैं, ताकि उनके प्रोटोकॉल और सुरक्षा को जल्द से जल्द बहाल किया जा सके।

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