Flipkart Fraud Case: मंगाया था iPhone 14 Pro, निकला दाढ़ी बढ़ाने का तेल, कंज्यूमर फोरम ने ठोका 1.81 लाख का जुर्माना
Consumer Forum Action: फ्लिपकार्ट से iPhone 14 Pro मंगवाने पर ग्राहक को दाढ़ी का तेल मिला। शिकायत पर सुनवाई करते हुए कंज्यूमर फोरम ने ₹1.81 लाख भुगतान का आदेश दिया है।
- कंज्यूमर फोरम की फ्लिपकार्ट पर बड़ी कार्रवाई: आईफोन की जगह बियर्ड ऑयल भेजने पर ग्राहक को मिलेंगे 1.81 लाख रुपये
- ऑनलाइन मंगाया ₹1.24 लाख का iPhone 14 Pro, डिब्बे में निकला दाढ़ी का तेल! अब कंज्यूमर फोरम ने फ्लिपकार्ट पर लिया कड़ा एक्शन
- Consumer Court Verdict: फ्लिपकार्ट और सेलर को लगा बड़ा झटका, आईफोन केस में ग्राहक को ₹1.81 लाख चुकाने का आदेश
ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म फ्लिपकार्ट और उसके विक्रेता को उपभोक्ता फोरम (Consumer Forum) ने सेवा में गंभीर लापरवाही और अनुचित व्यापार व्यवहार का दोषी पाते हुए पीड़ित ग्राहक को 1.81 लाख रुपये से अधिक का भुगतान करने का कड़ा निर्देश दिया है। यह मामला एक ग्राहक द्वारा फ्लिपकार्ट से महंगा एप्पल आईफोन 14 प्रो (iPhone 14 Pro) ऑर्डर करने के बाद सामने आया था, लेकिन जब पार्सल डिलीवर हुआ तो उसमें फोन के बजाय दाढ़ी बढ़ाने का तेल (Beard Oil) निकला। बार-बार शिकायत के बावजूद जब ई-कॉमर्स कंपनी और विक्रेता ने रिफंड या रिप्लेसमेंट नहीं दिया, तो पीड़ित ने उपभोक्ता अदालत का दरवाजा खटखटाया। फोरम के इस फैसले ने ऑनलाइन शॉपिंग करने वाले करोड़ों ग्राहकों के अधिकारों को नई ताकत दी है।
ई-कॉमर्स धोखाधड़ी और ग्राहकों की सुनवाई न होने से जुड़े इस मामले में उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (कंज्यूमर फोरम) ने कड़ा रुख अपनाया है। पीड़ित ग्राहक ने फ्लिपकार्ट प्लेटफॉर्म के जरिए 1,24,990 रुपये की कीमत का एप्पल आईफोन 14 प्रो ऑनलाइन ऑर्डर किया था। डिलीवरी के समय जब पार्सल खोला गया, तो अंदर कीमती स्मार्टफोन के स्थान पर बेहद कम कीमत वाली दाढ़ी बढ़ाने की तेल की शीशी निकली। पीड़ित ने जब कंपनी के कस्टमर केयर से संपर्क किया और गलत डिलीवरी की शिकायत दर्ज कराई, तो प्लेटफॉर्म और विक्रेता ने अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लिया। इसके बाद ग्राहक ने उपभोक्ता अदालत का रुख किया, जहां फोरम ने ग्राहक के पक्ष में ऐतिहासिक फैसला सुनाया।
यह घटना तब शुरू हुई जब पीड़ित ग्राहक ने ऑनलाइन शॉपिंग के दौरान पूर्ण भुगतान करके प्रीमियम स्मार्टफोन ऑर्डर किया था। पैकेट मिलने पर जब ग्राहक ने उसे खोला, तो उसमें से फोन न पाकर उनके होश उड़ गए। डिलीवरी में घपला देखकर ग्राहक ने तुरंत फ्लिपकार्ट के सहायता केंद्र पर संपर्क किया और डिलीवरी का प्रमाण प्रस्तुत करते हुए रिफंड या असली आईफोन भेजने का अनुरोध किया।
हालांकि, ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म और उसके सूचीबद्ध विक्रेता ने मामले की निष्पक्ष जांच करने के बजाय ग्राहक की शिकायत को खारिज कर दिया। कंपनी का दावा था कि पार्सल सही स्थिति में डिलीवर हुआ था। लगातार पत्राचार और कस्टमर सपोर्ट के चक्कर काटने के बाद भी जब कोई समाधान नहीं निकला, तो ग्राहक ने अपने उपभोक्ता अधिकारों का प्रयोग करते हुए फोरम में मामला दर्ज कराया। अदालत में साक्ष्यों और रसीदों का अवलोकन करने के बाद फोरम ने पाया कि ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म और विक्रेता दोनों ही सेवा में कमी (Deficiency in Service) और अनुचित व्यापार आचरण के दोषी हैं।
उपभोक्ता फोरम के इस फैसले पर पीड़ित ग्राहक ने राहत व्यक्त करते हुए कहा कि ऑनलाइन कंपनियों को यह समझना होगा कि वे ग्राहकों की मेहनत की कमाई को इस तरह खारिज नहीं कर सकतीं। यह फैसला उन सभी ग्राहकों के लिए उम्मीद की किरण है जो ऑनलाइन धोखाधड़ी का शिकार होकर हताश हो जाते हैं।
वहीं, कानूनी जानकारों और उपभोक्ता अधिकार कार्यकर्ताओं ने फोरम के आदेश का स्वागत किया है। उनका मानना है कि ऑनलाइन मार्केटप्लेस खुद को केवल एक "इमीडिएट मध्यस्थ" (Intermediary) बताकर अपनी जिम्मेदारी से नहीं बच सकते। जब तक डिलीवरी और विक्रेता का सत्यापन पारदर्शी नहीं होगा, तब तक ऐसी घटनाएं होती रहेंगी। दूसरी ओर, फ्लिपकार्ट की तरफ से फैसले को लेकर कोई आधिकारिक विस्तृत सार्वजनिक बयान जारी नहीं किया गया है, लेकिन उम्मीद है कि कंपनी आंतरिक जांच के आदेश देगी।
कंज्यूमर फोरम ने अपने सख्त आदेश में फ्लिपकार्ट और संबंधित विक्रेता को संयुक्त रूप से निर्देश दिया है कि वे ग्राहक को क्षतिपूर्ति की पूरी राशि का भुगतान करें।
आदेश के तहत दिए जाने वाले कुल भुगतान का विवरण इस प्रकार है:
मूल राशि का रिफंड: फोन की मूल कीमत ₹1,24,990 का 12% वार्षिक ब्याज के साथ भुगतान।
मानसिक उत्पीड़न का मुआवजा: ग्राहक को हुई मानसिक परेशानी और असुविधा के लिए ₹50,000 की क्षतिपूर्ति।
मुकदमेबाजी का खर्च: कानूनी प्रक्रिया में हुए खर्च के मद में ₹10,000 का अतिरिक्त भुगतान।
यह कुल राशि मिलाकर ₹1.81 लाख से अधिक बनती है। इस फैसले से ई-कॉमर्स कंपनियों पर अपनी डिलीवरी चेन और सेलर्स के सत्यापन को और अधिक पुख्ता करने का दबाव बढ़ेगा।
उपभोक्ता आयोग द्वारा दिए गए निर्धारित समय के भीतर यदि ई-कॉमर्स कंपनी और सेलर मुआवजे का भुगतान नहीं करते हैं, तो फोरम के पास संपत्ति कुर्क करने या कानूनी कार्रवाई बढ़ाने का अधिकार सुरक्षित है। इस ऐतिहासिक फैसले के बाद विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि ऑनलाइन खरीदारों को महंगे सामान मंगाते समय हमेशा 'ओपन बॉक्स डिलीवरी' (Open Box Delivery) का विकल्प चुनना चाहिए और पार्सल अनबॉक्स करते समय का अनकट वीडियो बनाना चाहिए ताकि भविष्य में किसी भी विवाद की स्थिति में साक्ष्य प्रस्तुत किया जा सके।
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