Noida Consumer Court: 12 लाख के सोलर पैनल पर सिर्फ 2 घंटे का बैकअप, उपभोक्ता आयोग ने ब्याज समेत पूरी रकम लौटाने का दिया आदेश
नोएडा में 12 लाख रुपये खर्च करने के बाद भी सोलर सिस्टम से सिर्फ दो घंटे का बैकअप मिलने पर उपभोक्ता आयोग ने कड़ा रुख अपनाया है। कंपनी को ब्याज सहित पूरी रकम लौटाने का आदेश दिया गया है।
- सोलर पैनल लगवाने के बाद भी अंधेरे में रहा उपभोक्ता, नोएडा कंज्यूमर कोर्ट का सख्त फैसला- कंपनी वापस करेगी ₹12 लाख
- Noida News: सोलर सिस्टम में सेवा दोष पर उपभोक्ता आयोग की बड़ी कार्रवाई, पीड़ित ग्राहक को मिलेगा 12 लाख का रिफंड
- वादे के मुताबिक नहीं मिला बैटरी बैकअप, कोर्ट ने सोलर कंपनी को लगाई फटकार; ब्याज सहित हर्जाना चुकाने का फरमान
नोएडा। भारी-भरकम राशि खर्च करने के बावजूद वादे के मुताबिक बिजली बैकअप न मिलने और सेवा में गंभीर लापरवाही बरतने के मामले में जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग (उपभोक्ता फोरम) ने कड़ा फैसला सुनाया है। आयोग ने एक उपभोक्ता की शिकायत पर सुनवाई करते हुए संबंधित सोलर सिस्टम वेंडर/कंपनी को निर्देश दिया है कि वह उपभोक्ता से ली गई करीब 12 लाख रुपये की पूरी रकम ब्याज सहित वापस करे। इसके साथ ही उपभोक्ता को मानसिक उत्पीड़न और कानूनी खर्च के रूप में भी उचित हर्जाना देने का आदेश पारित किया गया है।
आयोग का यह निर्णय उन सभी उपभोक्ताओं के लिए नजीर माना जा रहा है, जो हरित ऊर्जा और निरंतर बिजली आपूर्ति की उम्मीद में लाखों रुपये की लागत से रूफटॉप सोलर सिस्टम लगवाते हैं, लेकिन तकनीकी कमियों और खराब रखरखाव के कारण ठगा हुआ महसूस करते हैं।
- क्या था पूरा मामला?
गौतम बुद्ध नगर (नोएडा) निवासी उपभोक्ता ने अपने आवासीय परिसर में निरंतर बिजली बैकअप और पावर कट की समस्या से निजात पाने के लिए एक प्रतिष्ठित सोलर वेंडर कंपनी से संपर्क किया था। कंपनी के प्रतिनिधियों ने स्थल निरीक्षण के बाद दावा किया था कि अत्याधुनिक सोलर पैनल, इनवर्टर और उच्च क्षमता के बैटरी बैंक की स्थापना के बाद घर के अधिकांश उपकरण बिना किसी रुकावट के चलेंगे। कंपनी ने कई घंटों के निर्बाध बैकअप का भरोसा दिलाया था।
इस आश्वासन पर भरोसा करते हुए उपभोक्ता ने लगभग 12 लाख रुपये की भारी राशि का भुगतान कर पूरे सिस्टम की स्थापना कराई। लेकिन इंस्टॉलेशन के कुछ ही दिनों बाद सिस्टम की असलियत सामने आ गई। धूप होने के बावजूद बैटरी उचित तरीके से चार्ज नहीं हो रही थी और बिजली गुल होने की स्थिति में पूरा सेटअप मुश्किल से डेढ़ से दो घंटे ही चल पा रहा था। 12 लाख रुपये खर्च करने के बाद भी परिवार को इन्वर्टर ट्रिप होने और अंधेरे का सामना करना पड़ रहा था।
- कंपनी की उदासीनता के बाद आयोग पहुंचे उपभोक्ता
उपभोक्ता ने बैटरी डिस्चार्ज और खराब प्रदर्शन को लेकर कई बार कंपनी के कस्टमर केयर, इंजीनियरों और प्रबंधन से शिकायत दर्ज कराई। कंपनी के तकनीकी कर्मियों ने दो-तीन बार दौरा कर अस्थायी बदलाव किए, लेकिन समस्या जस की तस बनी रही। अंततः कंपनी ने सिस्टम में तकनीकी दोष को स्वीकार करने अथवा बैटरी बदलने से हाथ खड़े कर दिए और उपभोक्ता के संदेशों का जवाब देना बंद कर दिया।
किसी भी स्तर पर समाधान न मिलने पर पीड़ित उपभोक्ता ने उपभोक्ता संरक्षण कानून के तहत जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग की शरण ली। परिवाद में सेवा में घोर कमी (Deficiency in Service) और भ्रामक व्यापारिक आचरण (Unfair Trade Practice) का आरोप लगाते हुए जमा की गई पूरी राशि वापस दिलाने तथा मुआवजे की मांग की गई।
- उपभोक्ता आयोग की सख्त टिप्पणी
मामले की सुनवाई के दौरान आयोग ने दोनों पक्षों के तर्कों, अनुबंध पत्रों, भुगतान रसीदों और तकनीकी लॉग रिपोर्ट का बारीकी से परीक्षण किया। उपभोक्ता की ओर से बिजली आपूर्ति और बैटरी के डिस्चार्ज होने के आंकड़े प्रस्तुत किए गए, जिससे स्पष्ट हुआ कि सिस्टम अपनी घोषित क्षमता का एक चौथाई बैकअप भी देने में असमर्थ रहा।
आयोग ने अपने आदेश में रेखांकित किया कि जब कोई उपभोक्ता हरित ऊर्जा को बढ़ावा देने और बुनियादी सुविधा के लिए अपनी गाढ़ी कमाई का बड़ा हिस्सा निवेश करता है, तो विक्रेता का यह वैधानिक दायित्व है कि वह गुणवत्तापूर्ण उत्पाद और पारदर्शी सेवा दे। 12 लाख रुपये लेने के बाद सिर्फ दो घंटे का बैकअप देना सेवा में स्पष्ट कमी और व्यावसायिक कदाचार की श्रेणी में आता है। कंपनी अपने दावों को तकनीकी धरातल पर साबित करने में विफल रही।
- ब्याज सहित पूरी रकम लौटाने का आदेश
उपभोक्ता आयोग ने परिवाद को स्वीकार करते हुए कंपनी को कड़े दिशा-निर्देश जारी किए:
मूलधन की वापसी: कंपनी को उपभोक्ता द्वारा चुकाए गए लगभग 12 लाख रुपये की पूरी राशि शिकायत दर्ज करने की तिथि से वास्तविक भुगतान तक निर्धारित ब्याज दर (सामान्यतः 6 से 9 प्रतिशत वार्षिक) के साथ लौटानी होगी।
मानसिक प्रताड़ना का मुआवजा: उपभोक्ता को लंबे समय तक अंधेरे में रहने, बार-बार पत्राचार करने और मानसिक तनाव झेलने के एवज में हर्जाना देने का निर्देश दिया गया।
मुकदमा व्यय: कानूनी लड़ाई लड़ने में उपभोक्ता द्वारा खर्च की गई राशि का भुगतान भी कंपनी को करना होगा।
सिस्टम वापस लेने की छूट: आदेश का पूर्ण अनुपालन करने और पूरी राशि का भुगतान करने के बाद ही कंपनी उपभोक्ता के परिसर से अपने उपकरण वापस ले जा सकेगी।
- उपभोक्ताओं के लिए क्या है सबक?
लिखित अनुबंध: कंपनी के किसी भी मौखिक वादे पर भरोसा न करें। बैटरी कितने एम्पीयर-आवर (Ah) की है, सिस्टम कितने किलोवाट (kW) का है और लोड के आधार पर कितने घंटे चलेगा, यह अनुबंध में स्पष्ट दर्ज कराएं।
वारंटी और एएमसी दस्तावेज: इनवर्टर, सोलर प्लेट और बैटरी की वारंटी अलग-अलग होती है। इनके सभी दस्तावेज और कार्यशील स्थिति का प्रमाण पत्र सुरक्षित रखें।
लिखित शिकायत दर्ज करें: यदि सिस्टम अपेक्षित प्रदर्शन नहीं कर रहा है, तो हमेशा ईमेल या पंजीकृत डाक से शिकायत करें ताकि भविष्य में आयोग के समक्ष साक्ष्य प्रस्तुत किया जा सके।
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