Gomti Book Festival 2026: 4.5 लाख पाठकों की मौजूदगी के साथ गोमती पुस्तक महोत्सव संपन्न, ₹2.75 करोड़ की किताबें बिकीं

लखनऊ में 5वें गोमती पुस्तक महोत्सव का समापन हुआ। 9 दिनों में 4.5 लाख पाठकों की भागीदारी रही और ₹2.75 करोड़ की पुस्तकें बिकीं। डिप्टी सीएम ने दो पुस्तकों का लोकार्पण किया।

By INA News Desk
Sep 21, 2026 - 23:10
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Gomti Book Festival 2026: 4.5 लाख पाठकों की मौजूदगी के साथ गोमती पुस्तक महोत्सव संपन्न, ₹2.75 करोड़ की किताबें बिकीं

लखनऊ। नवाबों की ऐतिहासिक नगरी लखनऊ में ज्ञान, विचार, कला और साहित्यिक संवाद का नौ दिवसीय महापर्व 'पांचवां गोमती पुस्तक महोत्सव' रविवार को अत्यंत गरिमामयी और उत्साहपूर्ण वातावरण में संपन्न हो गया। 20 सितंबर 2026 को महोत्सव के अंतिम दिन तक कुल मिलाकर लगभग 4.5 लाख पुस्तक प्रेमियों, शोधार्थियों, विद्यार्थियों और साहित्य अनुरागी दर्शकों ने अपनी सक्रिय उपस्थिति दर्ज कराई। पठन संस्कृति के पुनरुद्धार और बौद्धिक विमर्श को बढ़ावा देने वाले इस मेले में व्यावसायिक दृष्टि से भी अभूतपूर्व सफलता मिली, जहां 250 से अधिक प्रकाशकों व पुस्तक विक्रेताओं के स्टॉलों से कुल 2.75 करोड़ रुपये से अधिक की पुस्तकों की बिक्री दर्ज की गई।

महोत्सव के दौरान बाल गतिविधियों, साहित्यिक संवाद, समकालीन पत्रकारिता और सांस्कृतिक संध्याओं से जुड़े 75 से अधिक विचारोत्तेजक सत्र आयोजित किए गए। इन कार्यक्रमों में देश भर से आए 240 से अधिक प्रख्यात साहित्यकारों, विचारकों, पत्रकारों और कलाकारों ने अपनी सहभागिता से संवाद को समृद्ध बनाया। विशेष रूप से बाल रचनात्मकता को समर्पित गतिविधियों में 15,000 से अधिक बच्चों ने हिस्सा लेकर मेले के शैक्षणिक महत्व को रेखांकित किया।

उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने किया दो ऐतिहासिक पुस्तकों का विमोचन

समापन दिवस के मुख्य आकर्षण के रूप में उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक गोमती पुस्तक महोत्सव परिसर पहुंचे। उन्होंने सबसे पहले विभिन्न प्रकाशकों के स्टॉलों का सूक्ष्मता से मुआयना किया, प्रदर्शित नई कृतियों के विषय में जानकारी ली और पुस्तक विक्रेताओं का उत्साहवर्धन किया। इसके उपरांत मुख्य सभागार में आयोजित औपचारिक समारोह में उन्होंने डॉ. अमिताभ कुमार द्वारा रचित दो शोधपरक पुस्तकों ‘लखनऊ शहर-ए-अदब’ तथा ‘इंडियन रेलवे : फ्रॉम स्टीम टू स्पीड’ का विमोचन किया।

दिव्यांश पब्लिकेशंस द्वारा प्रकाशित इन दोनों कृतियों में विषय वैविध्य का उत्कृष्ट समन्वय देखने को मिलता है। ‘लखनऊ शहर-ए-अदब’ जहां अवध की समृद्ध साहित्यिक, सांस्कृतिक, भाषाई और तहजीबी विरासत के विविध आयामों को परत-दर-परत पाठकों के समक्ष उजागर करती है, वहीं ‘इंडियन रेलवे : फ्रॉम स्टीम टू स्पीड’ में भारतीय रेल के 170 से अधिक वर्षों के विकास यात्रा, भाप के इंजनों से लेकर सेमी-हाई स्पीड वंदे भारत तक की तकनीकी क्रांति और राष्ट्र निर्माण में रेलवे के योगदान का प्रामाणिक दस्तावेजीकरण किया गया है।

समारोह को संबोधित करते हुए उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने लेखकों और प्रकाशकों को बधाई दी। उन्होंने लखनऊ विश्वविद्यालय की ऐतिहासिक शैक्षणिक परंपरा का स्मरण करते हुए कहा कि इस धरती ने देश और दुनिया को शीर्ष नेतृत्व और मेधा दी है।

उन्होंने युवाओं से अपनी जड़ों से जुड़े रहने और सतत अध्ययनशील बनने का आह्वान किया। साथ ही उन्होंने यह भी आश्वस्त किया कि किसी भी जरूरतमंद मेधावी छात्र की पढ़ाई में संसाधन आड़े नहीं आने दिए जाएंगे।

प्रशासनिक व साहित्यिक हस्तियों की गरिमामयी उपस्थिति

विमोचन समारोह में उत्तर प्रदेश के परिवहन मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) दया शंकर सिंह विशिष्ट अतिथि के रूप में सम्मिलित हुए, जबकि अध्यक्षता अनुसंधान अभिकल्प एवं मानक संगठन (RDSO) के अपर महानिदेशक काजी मेराज अहमद ने की।

मंच पर आरवीएनएल के महाप्रबंधक अनिल कुमार सिंह, अखिल भारतीय उद्योग व्यापार मंडल के राष्ट्रीय अध्यक्ष संदीप बंसल, राज्य सूचना आयुक्त मोहम्मद नदीम, वरिष्ठ आईएएस अधिकारी जय सिंह, प्रख्यात स्तंभकार रहीस सिंह, वरिष्ठ पत्रकार नवलकांत सिंह तथा प्रकाशक नीरज अरोड़ा विशेष रूप से उपस्थित रहे।

वक्ताओं ने अपने संबोधन में कहा कि डिजिटल युग में इंटरनेट और सोशल मीडिया के अत्यधिक उपयोग के बीच इस तरह के पुस्तक महोत्सव भौतिक पठन संस्कृति को जीवित रखने में मील का पत्थर साबित हो रहे हैं।

अनिल कुमार सिंह ने सफलता के साथ अपनी जड़ों से जुड़े रहने की बात कही, तो सूचना आयुक्त मोहम्मद नदीम ने लखनऊ की बौद्धिक परंपरा के संस्मरण साझा किए।

एनबीटी के स्टॉल पर बिकीं 7.5 लाख की किताबें, चिल्ड्रन्स कॉर्नर में उमड़े बच्चे

मेले के आयोजक राष्ट्रीय पुस्तक न्यास, भारत (NBT) के स्टॉल पर पाठकों का विशेष तांता लगा रहा। एनबीटी के स्टॉल से 7.5 लाख रुपये से अधिक की आधिकारिक बिक्री हुई।

पाठकों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा लिखित 'एग्जाम वॉरियर्स', भारतीय लोकतांत्रिक परंपरा पर केंद्रित 'द मदर ऑफ डेमोक्रेसी' तथा अंतरिक्ष मिशन पर आधारित 'चंद्रयान' जैसी संदर्भ पुस्तकों की जमकर खरीदारी की।

अंतिम दिन 'चिल्ड्रन्स कॉर्नर' में 2,200 से अधिक स्कूली बच्चों ने कई तरह की कार्यशालाओं में प्रतिभाग किया:

  • बच्चों के लिए योग: प्रतीक केशवानी और ललिता अधिकारी के मार्गदर्शन में बच्चों ने ध्यान, एकाग्रता और शारीरिक संतुलन के आसन सीखे।

  • कहानी की पोटली: अपूर्वा शाह ने संगीत और अभिनय के जरिए बाल साहित्य की रोचक कहानियां सुनाईं।

  • वॉइस-ओवर वर्कशॉप: रूपाली चंद्रा ने बच्चों को आवाज के उतार-चढ़ाव, सही उच्चारण और मॉड्यूलेशन का अभ्यास कराया।

  • आपदा प्रबंधन सत्र: आफिया बानो ने 'फ्लिप फ्लैप रेस' के माध्यम से भूकंप और अन्य आपदाओं के समय त्वरित सुरक्षा सावधानियों की जानकारी दी।

  • मंडला आर्ट: राष्ट्रीय ई-पुस्तकालय की टीम ने बच्चों को रंगों के माध्यम से रचनात्मक मंडला कला सिखाई, जहां ई-पुस्तकालय के शुभंकर 'चीता' ने बच्चों को ऑनलाइन-ऑफलाइन पढ़ने के लिए प्रेरित किया।

गंभीर बौद्धिक विमर्श और 'भक्ति बीट्स' के साथ विदाई

महोत्सव के विचार मंचों पर अंतिम दिन भी गंभीर चर्चाएं हुईं। लेखिका मीरा (समर खान) के उपन्यास The Dust on My Heart पर विशेष चर्चा आयोजित हुई, जिसका लोकार्पण प्रो. रवींद्र प्रताप सिंह (निदेशक, अंतरराष्ट्रीय इकाई, एलयू) की उपस्थिति में हुआ। वहीं, ‘लोकतंत्र का चौथा स्तंभ’ सत्र में वरिष्ठ पत्रकार सुधीर मिश्र और प्रो. संजय मोहन जौहरी ने एआई (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस), सोशल मीडिया और फर्जी खबरों (फेक न्यूज) के दौर में पत्रकारिता की विश्वसनीयता व तथ्य-सत्यापन के सिद्धांतों पर गहन मंथन किया।

इसके अलावा, स्तंभकार रहीस सिंह और डॉ. ललित किशोर मंडोरा ने ‘कैकेयी के राम’ पुस्तक पर संवाद करते हुए वाल्मीकि रामायण और मानस के आधार पर कैकेयी के चरित्र के मानवीय पहलुओं की व्याख्या की। पद्मश्री विद्याबिंदु सिंह और डॉ. रजनी गुप्त ने लोकगीतों के संरक्षण और बच्चों की आधुनिक सोच के अनुरूप बाल साहित्य सृजन पर बल दिया।

महोत्सव की अंतिम सांस्कृतिक संध्या में आरजे प्रतीक द्वारा संचालित ‘भक्ति बीट्स’ (भजन जैमिंग) ने भक्ति संगीत की आधुनिक प्रस्तुतियों से दर्शकों को भावविभोर कर दिया। नौ दिनों का यह बौद्धिक समागम लखनऊ वासियों के दिलों में किताबों और साहित्य के प्रति नई ऊर्जा का संचार करते हुए अगले वर्ष फिर मिलने के वादे के साथ विदा हुआ।

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