Gujarat Bus Robbery Accused Arrested: 45 साल बाद कासगंज से पकड़ा गया बस लूट का आरोपी, कबाड़ी बनकर छुपा था हबीब
Gujarat Bus Robbery Case: 45 साल पुराने बस लूट के मुख्य आरोपी हबीब अहमद को गुजरात पुलिस ने यूपी के कासगंज से गिरफ्तार किया। आरोपी कबाड़ी बनकर रह रहा था।
- Kasganj Crime News: गुजरात पुलिस का बड़ा एक्शन, 45 साल पुराने बस डकैती मामले का आरोपी यूपी से गिरफ्तार
- पहचान बदलकर कबाड़ का काम कर रहा था बस लूट का मुख्य आरोपी, 45 साल बाद गुजरात पुलिस ने यूपी में दबोचा
- Big Arrest: 45 साल पुराने बस लूट कांड का मुख्य आरोपी कासगंज से गिरफ्तार, गुजरात पुलिस ने पहचान बदलकर रह रहे आरोपी को पकड़ा
गुजरात पुलिस ने एक अंतरराज्यीय अभियान के तहत 45 वर्ष पुराने सनसनीखेज बस लूट मामले के मुख्य आरोपी हबीब अहमद अब्दुल को उत्तर प्रदेश के कासगंज जिले से गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी पिछले कई दशकों से अपनी मूल पहचान छिपाकर कासगंज की तातारपुर स्थित कांशीराम आवासीय कॉलोनी में कबाड़ का काम कर रहा था। गुजरात पुलिस ने स्थानीय खुफिया नेटवर्क और दशकों पुराने अभिलेखों की सूक्ष्म जांच के आधार पर इस जटिल अभियान को अंजाम दिया। कानून प्रवर्तन एजेंसियों द्वारा लंबे समय से वांछित चल रहे इस आरोपी को हिरासत में लेने के बाद ट्रांजिट रिमांड और न्यायिक प्रक्रिया के लिए कानूनी औपचारिकताएं पूरी की जा रही हैं।
लगभग साढ़े चार दशक पूर्व गुजरात राज्य के अधिकार क्षेत्र में हुई एक चर्चित बस लूट की घटना में शामिल मुख्य संदिग्ध हबीब अहमद अब्दुल को आखिरकार कानून के शिकंजे में ले लिया गया है। घटना के बाद से ही आरोपी लगातार अपने ठिकाने बदल रहा था और कानून प्रवर्तन एजेंसियों से बचता आ रहा था। हाल ही में गुजरात पुलिस को तकनीकी निगरानी और जमीनी सूचनाओं के आधार पर सूचना मिली थी कि आरोपी उत्तर प्रदेश के कासगंज क्षेत्र में पहचान बदलकर एक आम नागरिक के रूप में जीवन यापन कर रहा है। इस सूचना की पुष्टि होने के बाद पुलिस टीम ने जाल बिछाकर उसे हिरासत में ले लिया।
प्राप्त विवरण के अनुसार, 45 वर्ष पहले गुजरात में एक यात्री बस को निशाना बनाकर लूटपाट की वारदात को अंजाम दिया गया था। इस मामले में हबीब अहमद अब्दुल पर मुख्य षड्यंत्रकर्ता और लूट में प्रत्यक्ष रूप से शामिल होने का आरोप लगा था। घटना के बाद जब अन्य संदिग्धों पर कानूनी कार्रवाई चल रही थी, तब हबीब फरार होने में सफल रहा। समय के साथ उसने अपने गृह क्षेत्र से संपर्क पूरी तरह तोड़ लिया और विभिन्न राज्यों में ठिकाने बदले।
अंततः वह उत्तर प्रदेश के कासगंज जिले में तातारपुर स्थित कांशीराम आवासीय कॉलोनी में बस गया। वहां उसने स्थानीय स्तर पर कबाड़ का व्यापार शुरू किया ताकि किसी को उसके अतीत पर संदेह न हो। हालांकि, गुजरात पुलिस के पुराने अनसुलझे मामलों (कोल्ड केसेज) की समीक्षा शाखा ने पुराने डोजियर को दोबारा खंगालना शुरू किया। तकनीकी साक्ष्यों, फिंगरप्रिंट रिकॉर्ड्स और जमीनी मुखबिरों से मिली कड़ियों को जोड़ते हुए पुलिस टीम ने कासगंज में उसके वर्तमान ठिकाने की पुष्टि की। इसके बाद एक विशेष टीम को उत्तर प्रदेश रवाना किया गया, जिसने स्थानीय प्रशासन के सहयोग से आरोपी को गिरफ्तार कर लिया।
कार्रवाई में शामिल पुलिस अधिकारियों ने बताया कि यह गिरफ्तारी अंतरराज्यीय समन्वय और पुराने मामलों के सतत अनुसंधान का परिणाम है। अधिकारियों के मुताबिक इतने लंबे समय तक फरार रहने के बावजूद अभिलेखों को सुरक्षित रखा गया था और समय-समय पर संदिग्ध के संभावित संपर्कों की निगरानी की जा रही थी। पुलिस का कहना है कि आरोपी के खिलाफ पुराने मामले में दर्ज धाराओं के तहत आगे की न्यायिक प्रक्रिया पूरी की जाएगी। वहीं स्थानीय निवासियों का कहना है कि आरोपी बेहद सामान्य तरीके से कबाड़ का काम करता था और किसी को भी उसके अतीत के बारे में कोई भनक नहीं थी।
इस सफल कानूनी कार्रवाई ने यह साबित किया है कि समय बीतने के बावजूद गंभीर आपराधिक मामलों की फाइलें बंद नहीं होती हैं और कानून प्रवर्तन एजेंसियां फरार आरोपियों की तलाश निरंतर जारी रखती हैं। इस गिरफ्तारी से अंतरराज्यीय पुलिस सहयोग को भी बल मिला है, जहां एक राज्य की पुलिस ने दूसरे राज्य में जाकर दशकों पुराने अपराधी को सफलतापूर्वक चिन्हित किया। यह मामला पुलिस व्यवस्था में रिकॉर्ड प्रबंधन और डिजिटल डेटाबेस की महत्ता को भी दर्शाता है।
गिरफ्तारी के उपरांत गुजरात पुलिस हबीब अहमद अब्दुल को स्थानीय न्यायालय में पेश कर ट्रांजिट रिमांड पर गुजरात ले जाने की तैयारी कर रही है। वहां उसे संबंधित अदालत में पेश किया जाएगा और 45 साल पुराने मामले के मूल आरोप पत्र के आधार पर कानूनी कार्यवाही आगे बढ़ेगी। पुलिस यह भी जांच करेगी कि क्या फरारी के दौरान उसने किसी अन्य आपराधिक गतिविधि में भाग लिया था अथवा फर्जी पहचान से जुड़े कोई दस्तावेज तैयार किए थे।
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