हाथरस: काका हाथरसी जयंती पर गूंजे हास्य-व्यंग्य के तराने, डॉ. उमाशंकर राही और माधुरी वार्ष्णेय हुए सम्मानित

हाथरस में काका हाथरसी जयंती समारोह धूमधाम से मनाया गया। 32 कवियों ने काव्य पाठ किया, डॉ. उमाशंकर राही को जगदीश मित्तल सम्मान और माधुरी को काका हाथरसी सम्मान मिला।

By INA News Desk
Oct 2, 2026 - 22:37
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हाथरस: काका हाथरसी जयंती पर गूंजे हास्य-व्यंग्य के तराने, डॉ. उमाशंकर राही और माधुरी वार्ष्णेय हुए सम्मानित
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हास्य और व्यंग्य के अमर हस्ताक्षर पद्मश्री काका हाथरसी की जयंती पर जनपद हाथरस में एक भव्य और बहुरंगी सांस्कृतिक समारोह का आयोजन किया गया। साहित्यिक व सांस्कृतिक गरिमा से परिपूर्ण इस कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ शरद महेश्वरी, प्रेम सिंह कुशवाह, राजेश गुड्डू और सुनील वर्मा ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्ज्वलित कर किया। समारोह के दौरान काका की कालजयी रचनाओं के पाठ, सुगम संगीत, पारंपरिक वादन, शास्त्रीय नृत्य और नाट्य प्रस्तुतियों के माध्यम से उपस्थित श्रोताओं को हास्य-व्यंग्य की अनूठी फुहारों से सराबोर कर दिया गया।

समारोह के काव्य सत्र में विकास भारद्वाज, राजेश गुड्डू, मीरा दीक्षित, चेतन उपाध्याय, पूरन सागर और सोनाली वार्ष्णेय सहित कुल 32 रचनाकारों व कलाकारों ने काका हाथरसी की लोकप्रिय हास्य-व्यंग्य कविताओं का प्रभावी पाठ किया। इसके अलावा सांस्कृतिक मंच पर प्राची दीक्षित और दीपक रफी ने मधुर गायन, प्रभु दयाल दीक्षित ने पारंपरिक वाद्य वादन, धारणा कौशिक ने भावपूर्ण नृत्य और कनिष्का शर्मा ने काका के सुंदर चित्र का प्रदर्शन किया। वहीं अनिल बौहरे और गाफिल स्वामी द्वारा प्रस्तुत लघु नाटक ने सामाजिक विसंगतियों पर करारा व्यंग्य करते हुए दर्शकों को खूब हंसाया।

साहित्य और कला के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले प्रबुद्ध रचनाकारों को इस अवसर पर विशेष रूप से अलंकृत किया गया। प्रतिष्ठित जगदीश मित्तल सम्मान से डॉक्टर उमाशंकर राही को नवाजा गया, जबकि इस वर्ष का काका हाथरसी सम्मान सुप्रसिद्ध रचनाकार माधुरी वार्ष्णेय रूबी को प्रदान किया गया। इसके अतिरिक्त भावना वरदान, राधा कर्ण, रूपम कुशवाह और सोनाली वार्ष्णेय को भी उनकी विशिष्ट उपलब्धियों के लिए सम्मानित किया गया।

समारोह में उषा गुप्ता, डॉक्टर भरत यादव, चन्द्रगुप्त विक्रमादित्य और विजय सिंह प्रेमी विशेष अतिथि के रूप में मौजूद रहे। कार्यक्रम का कुशल संयोजन प्रेम सिंह यादव एडवोकेट और सह संयोजन श्याम बाबू चिंतन द्वारा किया गया, जबकि संपूर्ण मंच का सफल संचालन वरिष्ठ रचनाकार अनिल बौहरे ने किया। बड़ी संख्या में उपस्थित साहित्य प्रेमियों ने काका के साहित्यिक योगदान को याद करते हुए उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।

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