हाथरस: सड़क पर बिखरे नगर पालिका के सरकारी रिकॉर्ड, ट्रैक्टर-ट्रॉली से गिरती रहीं फाइलें और पासबुक
हाथरस नगर पालिका के रिकॉर्ड ट्रैक्टर-ट्रॉली से ले जाते समय सड़क पर बिखरे। सरकारी फाइलें और डाकघर कर्मचारियों की पासबुक गिरने से प्रशासनिक व्यवस्था पर उठे सवाल।
हाथरस नगर पालिका प्रशासन की घोर लापरवाही का एक अजीबोगरीब मामला सामने आया है, जहां ट्रैक्टर-ट्रॉली में लादकर ले जाए जा रहे नगर पालिका के पुराने रिकॉर्ड और दस्तावेज बीच सड़क पर बिखरते चले गए। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार खुली ट्रैक्टर-ट्रॉली में पुराने कागजात, फाइलें और डाकघर कर्मचारियों की पासबुक सहित कई अन्य दस्तावेज भरे हुए थे। ट्रॉली को तिरपाल या किसी अन्य सुरक्षा साधन से ठीक से ढका नहीं गया था, जिसके चलते तेज हवा और झटकों के कारण कागजात उड़-उड़कर दूर तक सड़क पर फैल गए। सड़क पर बिखरी पत्रावलियों को देखकर मौके से गुजर रहे कई राहगीरों और कबाड़ बीनने वालों ने उन्हें उठा लिया।
स्थानीय नागरिकों ने जब दस्तावेजों को इस तरह सड़क पर उड़ते देखा तो उन्होंने ट्रैक्टर चालक को आवाज देकर रोकने का प्रयास भी किया, लेकिन चालक गति कम किए बिना वाहन को आगे लेकर निकल गया। सड़क पर बिखरे कागजों का वीडियो भी राहगीरों द्वारा बनाकर साझा किया गया है, जिसके बाद नगर पालिका के रिकॉर्ड संधारण और ढुलाई व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। हालांकि, ट्रॉली में ले जाए जा रहे कागजात केवल निष्प्रयोज्य रद्दी थे अथवा उनमें कोई संवेदनशील और अति महत्वपूर्ण सरकारी पत्रावली भी शामिल थी, इसकी अभी तक आधिकारिक स्तर से स्वतंत्र पुष्टि नहीं की गई है।
इस घटना के बाद प्रशासनिक जवाबदेही पर चर्चाएं तेज हो गई हैं। सवाल यह उठाया जा रहा है कि इन कागजातों को किस सक्षम अधिकारी के आदेश पर और कहां स्थानांतरित किया जा रहा था तथा ढुलाई के दौरान सुरक्षा के बुनियादी प्रबंध क्यों नहीं किए गए। नगर पालिका के अधिशासी अधिकारी रोहित सिंह और पालिका की जिम्मेदारी संभाल रहे अपर जिलाधिकारी राजस्व प्रशांत तिवारी के समक्ष स्थिति स्पष्ट करने की चुनौती है।
यदि जांच के दौरान किसी भी महत्वपूर्ण सरकारी फाइल या अभिलेख के गायब होने की बात सामने आती है, तो उसकी जवाबदेही किस स्तर पर तय की जाएगी, यह सबसे बड़ा प्रश्न बना हुआ है। नियमानुसार सरकारी दस्तावेजों के निस्तारण या स्थानांतरण से पूर्व उनकी विधिवत छंटाई, सूचीकरण और भौतिक सत्यापन किया जाना अनिवार्य होता है। स्थानीय लोगों और प्रबुद्ध नागरिकों ने प्रशासन से मांग की है कि सड़क पर गिरे कागजातों को एकत्र करवाकर कार्यालय के मूल स्टॉक से उनका तत्काल मिलान कराया जाए, ताकि किसी भी तरह के अभिलेखीय नुकसान से बचा जा सके।
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