New Delhi: भारत ने COP31 से पहले उठाई संतुलित और महत्वाकांक्षी जलवायु कार्रवाई की आवाज
भारत ने आगामी संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन रूपरेखा संधि (UNFCCC) के COP31 में महत्वाकांक्षी, संतुलित और
नई दिल्ली/फिजी। भारत ने आगामी संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन रूपरेखा संधि (UNFCCC) के COP31 में महत्वाकांक्षी, संतुलित और न्यायसंगत परिणाम हासिल करने के लिए सभी देशों से लचीलापन, व्यावहारिकता और पारस्परिक सम्मान के साथ आगे बढ़ने की अपील की है। फिजी में आयोजित पूर्व-COP31 बैठक में केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने कहा कि जलवायु परिवर्तन के बढ़ते प्रभावों के बीच अब केवल चर्चा और बयानबाजी तक सीमित रहने के बजाय कार्यान्वयन और वैश्विक समन्वय पर ध्यान केंद्रित करने की आवश्यकता है।
- जलवायु वित्त और तकनीक हस्तांतरण पर जोर
भूपेंद्र यादव ने कहा कि वैश्विक तापमान वृद्धि को 1.5 डिग्री सेल्सियस तक सीमित करने के लक्ष्य को लेकर व्यापक सहमति है। इसके लिए विकासशील देशों को जलवायु वित्त, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण और क्षमता निर्माण के क्षेत्र में पर्याप्त सहयोग उपलब्ध कराना जरूरी है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक देश की अपनी राष्ट्रीय परिस्थितियां और विकास संबंधी आवश्यकताएं हैं। ऐसे में जलवायु कार्रवाई के कार्यान्वयन में राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित मार्गों का सम्मान किया जाना चाहिए।
- चर्चा से आगे बढ़कर कार्यान्वयन की जरूरत
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि वैश्विक लक्ष्य भले ही साझा हों, लेकिन उन्हें हासिल करने के तरीकों में अधिक सामंजस्य की आवश्यकता है। उन्होंने सभी पक्षों से लचीलापन दिखाने की अपील करते हुए कहा कि पेरिस समझौते और सम्मेलन के तहत पहले से उपलब्ध साधनों का बेहतर इस्तेमाल किया जाना चाहिए। उन्होंने अनुच्छेद 9.1 को विकासशील देशों की जरूरतों के अनुरूप जलवायु वित्त को आगे बढ़ाने का महत्वपूर्ण अवसर बताया। साथ ही, सतत विकास और कार्यान्वयन के साधनों में मौजूद कमियों को दूर करने के लिए अनुच्छेद 6 के तहत सहयोगात्मक दृष्टिकोण के रणनीतिक उपयोग पर भी जोर दिया।
- अंताल्या में संतुलित परिणाम की उम्मीद
भारत ने COP31 से सहभागिता, तकनीकी सहयोग और क्षमता निर्माण के लिए लक्षित समर्थन बढ़ाने की अपेक्षा जताई है। भूपेंद्र यादव ने कहा कि भारत खुले और पारदर्शी संवाद के जरिए लंबित मुद्दों को सुलझाने के लिए तैयार है। उन्होंने कहा कि COP31 का अंतिम परिणाम महत्वाकांक्षी, संतुलित, न्यायसंगत और समावेशी होना चाहिए, जिसमें विकासशील देशों को आवश्यक कार्यान्वयन साधन उपलब्ध कराने के साथ-साथ शमन और अनुकूलन को भी बढ़ावा मिले। COP31 का आयोजन इस वर्ष नवंबर में तुर्की के अंताल्या में किया जाएगा। भारत ने प्रेसीडेंसी, अध्यक्षों और सभी पक्षों के साथ मिलकर सम्मेलन को सफल बनाने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है।
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