India Forex Reserves: भारत के विदेशी मुद्रा भंडार में $10.51 अरब की भारी बढ़त, आंकड़ा $692.87 अरब पर पहुंचा
India Forex Reserves Update: भारतीय रिजर्व बैंक के ताजा आंकड़ों के अनुसार 31 जुलाई 2026 को समाप्त सप्ताह में भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 10.51 अरब डॉलर बढ़कर 692.87 अरब डॉलर हो गया है।
- India Forex Reserves Rise: भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 10.51 अरब डॉलर बढ़ा, 692.87 अरब डॉलर पर पहुंचा
- RBI Forex Data: भारत के खजाने में आई भारी तेजी, विदेशी मुद्रा भंडार बढ़कर 692.87 अरब डॉलर हुआ
- India Forex Reserve Jump: भारतीय रिजर्व बैंक के खजाने में बड़ा उछाल, 10.51 अरब डॉलर बढ़ा विदेशी मुद्रा भंडार
- Forex Reserve India: 31 जुलाई को समाप्त सप्ताह में भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 10.51 अरब डॉलर बढ़ा
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा जारी साप्ताहिक आंकड़ों के अनुसार, 31 जुलाई 2026 को समाप्त हुए सप्ताह में देश के विदेशी मुद्रा भंडार में भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। एक ही सप्ताह में भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 10.51 अरब डॉलर उछलकर 692.87 अरब डॉलर के स्तर पर पहुंच गया है। इस दौरान विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियों (FCA) में जोरदार बढ़त देखने को मिली, वहीं स्वर्ण भंडार के मूल्य में भी 1.68 अरब डॉलर का इजाफा दर्ज किया गया है। वैश्विक बाजार में जारी अनिश्चितताओं और भू-राजनीतिक तनावों के बीच विदेशी मुद्रा भंडार में आया यह तेज उछाल भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती और बाहरी वित्तीय स्थिरता को और अधिक सुदृढ़ बनाता है।
भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा साझा की गई जानकारी के अनुसार, 31 जुलाई 2026 को समाप्त समीक्षाधीन सप्ताह में भारत का कुल विदेशी मुद्रा भंडार 10.512 अरब डॉलर बढ़कर 692.866 अरब डॉलर हो गया है। इससे पिछले सप्ताह में भी मुद्रा भंडार में 6.118 अरब डॉलर की अच्छी बढ़त देखी गई थी।
रिजर्व बैंक के खजाने में आई यह एक सप्ताह की सबसे बड़ी तेजी मानी जा रही है, जिससे भारत का विदेशी मुद्रा भंडार एक बार फिर 700 अरब डॉलर के ऐतिहासिक मील के पत्थर के करीब पहुंच गया है। मुद्रा भंडार के सभी प्रमुख घटकों—विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियों, स्वर्ण भंडार, और विशेष आहरण अधिकार (SDR) में सकारात्मक वृद्धि देखी गई है।
31 जुलाई को समाप्त सप्ताह के दौरान विदेशी मुद्रा भंडार का सबसे बड़ा हिस्सा मानी जाने वाली विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियां (FCAs) 8.75 अरब डॉलर बढ़कर 564.68 अरब डॉलर हो गईं। डॉलर में दर्शाए जाने वाले इस घटक में गैर-अमेरिकी मुद्राओं जैसे यूरो, पौंड और येन की विनिमय दरों में हुए उतार-चढ़ाव का असर भी शामिल होता है।
इसके अलावा, समीक्षाधीन अवधि के दौरान भारत के स्वर्ण भंडार (Gold Reserves) के मूल्य में 1.685 अरब डॉलर की बढ़ोतरी दर्ज की गई, जिसके बाद कुल स्वर्ण भंडार की वैल्यू बढ़कर 104.743 अरब डॉलर हो गई है। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के पास मौजूद विशेष आहरण अधिकार (SDR) 48 मिलियन डॉलर बढ़कर 18.666 अरब डॉलर पर पहुंच गए। साथ ही, आईएमएफ में भारत की रिजर्व स्थिति भी 28 मिलियन डॉलर बढ़कर 4.778 अरब डॉलर दर्ज की गई। बाजार विश्लेषकों का मानना है कि भारतीय रिजर्व बैंक की विशेष योजनाओं, विदेशी पूंजी के प्रवाह और एफसीएनआर (FCNR) जमा योजनाओं के तहत हुई मजबूत आवक ने विदेशी मुद्रा भंडार को तेजी से बढ़ाने में प्रमुख भूमिका निभाई है।
विदेशी मुद्रा भंडार का घटकवार ब्योरा (31 जुलाई 2026):
कुल विदेशी मुद्रा भंडार: $692.87 अरब (+ $10.51 अरब)
विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियां (FCA): $564.68 अरब (+ $8.75 अरब)
स्वर्ण भंडार (Gold Reserves): $104.74 अरब (+ $1.68 अरब)
विशेष आहरण अधिकार (SDR): $18.67 अरब (+ $48 मिलियन)
IMF में रिजर्व पोजीशन: $4.78 अरब (+ $28 मिलियन)
अर्थशास्त्रियों और वित्तीय विशेषज्ञों ने इस भारी उछाल को भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए बेहद सकारात्मक संकेत बताया है। आर्थिक विश्लेषकों का कहना है कि वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और विदेशी बाजारों में ब्याज दरों को लेकर जारी अनिश्चितता के बावजूद भारत का विदेशी मुद्रा भंडार मजबूत स्थिति में बना हुआ है। आरबीआई गवर्नर ने हालिया मौद्रिक नीति वक्तव्य में भरोसा जताया था कि देश का विदेशी मुद्रा भंडार मानक पैमानों पर पूरी तरह पर्याप्त है। यह भंडार भारत के लगभग 10 महीने से अधिक के आयात बिल को कवर करने में सक्षम है, जो विदेशी व्यापार संतुलन और आर्थिक सुरक्षा की दृष्टि से एक मजबूत स्थिति मानी जाती है।
विदेशी मुद्रा भंडार में 10.51 अरब डॉलर की यह बढ़ोतरी भारतीय रुपये की विनिमय दर को स्थिरता प्रदान करने में मददगार साबित होगी। जब भी वैश्विक दबावों या कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के कारण भारतीय रुपये पर दबाव बनता है, तो रिजर्व बैंक अपने इसी खजाने का इस्तेमाल करके बाजार की अस्थिरता को नियंत्रित करता है। इसके अतिरिक्त, विशाल विदेशी मुद्रा भंडार अंतरराष्ट्रीय रेटिंग एजेंसियों और विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) के बीच भारतीय अर्थव्यवस्था के प्रति विश्वास को और मजबूत करता है। इससे देश में विदेशी प्रत्यक्ष निवेश (FDI) और अन्य पूंजीगत प्रवाह को बढ़ावा मिलता है। आने वाले हफ्तों में विदेशी मुद्रा भंडार के 700 अरब डॉलर के आंकड़े को दोबारा छूने या पार करने की संभावना जताई जा रही है। विश्लेषकों का मानना है कि यदि वैश्विक शेयर बाजारों और मुद्रा विनिमय दरों में स्थिरता बनी रहती है, तो भारत का विदेशी मुद्रा कोष नया रिकॉर्ड बना सकता है। रिजर्व बैंक अंतरराष्ट्रीय बाजार के घटनाक्रमों पर पैनी नजर बनाए हुए है ताकि घरेलू बाजार को किसी भी वैश्विक आर्थिक झटके से सुरक्षित रखा जा सके।
What's Your Reaction?



