ITR Filing Deadline Missed: 31 जुलाई की डेडलाइन छूटने के बाद भी दाखिल कर सकते हैं टैक्स रिटर्न? जानें 3 आसान विकल्प

31 जुलाई तक आईटीआर दाखिल नहीं कर पाए तो घबराने की जरूरत नहीं है। जानिए बिलेटेड रिटर्न कैसे भरें, कितनी लगेगी लेट फीस और 31 दिसंबर तक क्या हैं तीन विकल्प।

Aug 1, 2026 - 15:14
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ITR Filing Deadline Missed: 31 जुलाई की डेडलाइन छूटने के बाद भी दाखिल कर सकते हैं टैक्स रिटर्न? जानें 3 आसान विकल्प
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  • आयकर अपडेट: 31 जुलाई की डेडलाइन खत्म, करदाताओं के पास 31 दिसंबर तक बिलेटेड ITR दाखिल करने का मौका

वित्त वर्ष 2025-26 (कर निर्धारण वर्ष 2026-27) के लिए व्यक्तिगत करदाताओं के पास बिना किसी पेनल्टी के आयकर रिटर्न दाखिल करने की अंतिम समय सीमा 31 जुलाई को समाप्त हो गई है। आयकर विभाग के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार करोड़ों टैक्सपेयर्स ने अपना रिटर्न समय पर जमा कर दिया है, लेकिन तकनीकी दिक्कतों, कागजात की अनुपलब्धता या व्यक्तिगत कारणों से कई लोग इस डेडलाइन को चूक गए हैं। हालांकि, डेडलाइन निकलने के बाद भी करदाताओं को घबराने की आवश्यकता नहीं है। आयकर कानून के प्रावधानों के तहत ऐसे करदाताओं के पास 31 दिसंबर 2026 तक बिलेटेड रिटर्न (Belated Return) दाखिल करने और कानूनी कार्रवाई से बचने के तीन मुख्य विकल्प मौजूद हैं। अब आगे करदाताओं को अपनी कर योग्य आय के अनुसार उचित लेट फीस भरकर इस प्रक्रिया को जल्द से जल्द पूरा करना होगा।

आयकर विभाग द्वारा साधारण व्यक्तिगत करदाताओं और गैर-ऑडिट मामलों के लिए आईटीआर फाइल करने की मानक अंतिम तिथि 31 जुलाई निर्धारित की गई थी। इस तिथि के बीत जाने के बाद, जो करदाता अपना रिटर्न समय पर नहीं भर पाए हैं, वे अब सामान्य रूप से मूल रिटर्न (Section 139(1)) दाखिल नहीं कर सकते।

इसके बावजूद, भारतीय आयकर अधिनियम 1961 में ऐसे करदाताओं को राहत देने के लिए विशेष प्रावधान बनाए गए हैं। टैक्सपेयर्स अब लेट फीस और नियमानुसार ब्याज का भुगतान करके अपना रिटर्न पूरा कर सकते हैं, जिससे वे नोटिस और बड़े जुर्माने की आशंका से बच सकेंगे।

31 जुलाई की समय सीमा समाप्त होने के साथ ही ई-फाइलिंग पोर्टल पर 'फाइल रिटर्न' के मुख्य विकल्प में बदलाव हो चुका है। जिन लोगों ने 31 जुलाई तक आईटीआर दाखिल नहीं किया है, उनके पास अब तीन प्रमुख रास्ते उपलब्ध हैं।

पहला रास्ता बिलेटेड रिटर्न दाखिल करने का है। आयकर अधिनियम की धारा 139(4) के तहत करदाता 31 दिसंबर 2026 तक अपना बिलेटेड रिटर्न (विलंबित रिटर्न) दाखिल कर सकते हैं। इसके लिए करदाताओं को धारा 234F के तहत लेट फीस देनी होगी। यदि करदाता की कुल वार्षिक आय 5 लाख रुपये से कम है, तो उसे 1,000 रुपये की लेट फीस देनी होगी। यदि वार्षिक आय 5 लाख रुपये से अधिक है, तो लेट फीस 5,000 रुपये निर्धारित है। हालांकि, जिन व्यक्तियों की कुल आय कर योग्य सीमा (कर छूट सीमा) से कम है, उन्हें बिना किसी पेनल्टी के बिलेटेड रिटर्न भरने की अनुमति मिलती है।

दूसरा रास्ता अपडेटेड रिटर्न (ITR-U) का है। यदि कोई करदाता 31 दिसंबर 2026 की बिलेटेड रिटर्न की समय सीमा भी चूक जाता है, तो धारा 139(8A) के तहत संबंधित कर निर्धारण वर्ष के अंत से 24 महीने (2 साल) के भीतर अपडेटेड रिटर्न भरा जा सकता है। हालांकि, इसमें अतिरिक्त कर (25% से 50% तक) का भुगतान करना पड़ता है और इसके जरिए घाटे का रिटर्न दाखिल नहीं किया जा सकता।

तीसरा रास्ता सीबीडीटी (CBDT) से माफी की याचिका (Condonation of Delay) दाखिल करना है। यदि कोई करदाता किसी अत्यंत गंभीर स्वास्थ्य कारण, दुर्घटना या ऐसी स्थिति के कारण रिटर्न नहीं भर पाया जो उसके नियंत्रण से बाहर थी, तो वह आयकर अधिनियम की धारा 119(2)(b) के तहत देरी को माफ करने के लिए आवेदन कर सकता है। सीबीडीटी द्वारा स्वीकृति मिलने पर पेनल्टी में राहत मिल सकती है।

कर सलाहकारों और टैक्स विशेषज्ञों का कहना है कि 31 जुलाई की डेडलाइन छूटने पर पैनिक करने की जरूरत नहीं है, लेकिन प्रक्रिया में ज्यादा देरी करना नुकसानदेह साबित हो सकता है। टैक्स जानकारों के मुताबिक, बिलेटेड रिटर्न दाखिल करते समय करदाता को इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि उन्हें धारा 234A के तहत बकाए टैक्स पर 1 प्रतिशत प्रति माह की दर से ब्याज भी देना होगा।

वहीं, आयकर विभाग ने करदाताओं को सलाह दी है कि वे 31 दिसंबर की अगली समय सीमा का इंतजार करने के बजाय जल्द से जल्द बिलेटेड रिटर्न दाखिल करें ताकि अतिरिक्त ब्याज के बोझ से बचा जा सके। विभाग के अनुसार, समय पर प्रक्रिया पूरी करने से टैक्स रिफंड की प्रोसेसिंग में भी आसानी होती है।

डेडलाइन छूटने का असर सीधे तौर पर करदाताओं की जेब और उनके वित्तीय रिकॉर्ड पर पड़ता है। 31 जुलाई के बाद आईटीआर दाखिल करने पर करदाता चालू वर्ष के दौरान हुए कुछ व्यावसायिक या पूंजीगत नुकसान (Capital Losses) को अगले वर्षों के लिए कैरी फॉरवर्ड (Carry Forward) नहीं कर पाते हैं। केवल मकान संपत्ति से हुए नुकसान को ही बिलेटेड रिटर्न में कैरी फॉरवर्ड करने की छूट मिलती है।

इसके अलावा, समय सीमा समाप्त होने के बाद टैक्स रिफंड पर मिलने वाले ब्याज (Section 234D) का नुकसान भी करदाता को उठाना पड़ सकता है। इसलिए बिलेटेड फाइलिंग की सुविधा होने के बावजूद देरी के वित्तीय परिणाम होते हैं।

जिन करदाताओं का रिटर्न दाखिल करना बाकी है, उन्हें तुरंत अपने बैंक विवरण, फॉर्म 26AS, एनुअल इंफॉर्मेशन स्टेटमेंट (AIS) और टैक्स पेमेंट चालान एकत्र कर लेने चाहिए। 31 दिसंबर 2026 तक बिलेटेड रिटर्न दाखिल करने की विंडो खुली रहेगी।

विशेषज्ञों का सुझाव है कि करदाता जल्द से जल्द अपना कैलकुलेशन पूरा करके लेट फीस के साथ बिलेटेड रिटर्न सबमिट करें और जमा करने के 30 दिनों के भीतर उसका ई-वेरिफिकेशन (e-Verification) जरूर पूरा करें। बिना ई-वेरिफिकेशन के रिटर्न को अमान्य माना जाता है।

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