Uttar Pradesh News: किशाऊ परियोजना समझौते पर हस्ताक्षर, यूपी समेत 6 राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने जताई सहमति
किशाऊ परियोजना समझौते पर छह राज्यों ने किए हस्ताक्षर, अमित शाह बोले- जल विवादों के समाधान की दिशा में ऐतिहासिक कदम
नई दिल्ली। केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह और केन्द्रीय जल शक्ति मंत्री सी. आर. पाटिल की उपस्थिति में मंगलवार को किशाऊ बहुउद्देशीय परियोजना को लेकर महत्वपूर्ण समझौता हुआ। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू, राजस्थान के मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा, दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने समझौते पर हस्ताक्षर किए। इस अवसर पर केन्द्रीय गृह सचिव, जल संसाधन, नदी विकास एवं गंगा संरक्षण विभाग की सचिव तथा संबंधित राज्यों के मुख्य सचिव मौजूद रहे।
समझौते को ऐतिहासिक बताते हुए अमित शाह ने कहा कि किशाऊ परियोजना के पूरा होने के बाद यह देश के इतिहास का महत्वपूर्ण अध्याय बनेगी। उन्होंने कहा कि परियोजना से हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, राजस्थान और दिल्ली किसी न किसी रूप में लाभान्वित होंगे। छह राज्यों की सहमति और समझौते पर हस्ताक्षर को उन्होंने बड़ी उपलब्धि बताया तथा सभी मुख्यमंत्रियों और केन्द्रीय जल शक्ति मंत्री सी. आर. पाटिल को बधाई दी।
अमित शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में लंबे समय से चले आ रहे जल विवादों के समाधान की दिशा में लगातार काम किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि 2018 से अब तक कई महत्वपूर्ण जल परियोजनाओं से जुड़े विवादों का समाधान हुआ है। इनमें लखवार बहुउद्देशीय परियोजना, शाहपुर कंडी बांध परियोजना, रेणुकाजी बहुउद्देशीय बांध परियोजना, केन-बेतवा लिंक परियोजना, पार्वती-कालीसिंध-चंबल रिवर लिंक योजना तथा अन्य परियोजनाएं शामिल हैं। उन्होंने कहा कि किशाऊ परियोजना पर सहमति इसी क्रम में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।
गृह मंत्री ने कहा कि वर्ष 1994 में हुए समझौते के तहत बेसिन में आने वाली प्रत्येक भंडारण परियोजना के लिए अलग-अलग समझौते किए जाने थे। वर्ष 2019 में लखवार और रेणुकाजी परियोजनाओं से जुड़े विवादों के समाधान के बाद किशाऊ परियोजना पर भी कार्य आगे बढ़ा। बीते 16 जून को इस पर औपचारिक सहमति बनी और जल शक्ति मंत्रालय ने सभी राज्यों के हितों को ध्यान में रखते हुए तकनीकी एवं आर्थिक पहलुओं पर विचार कर इसे समझौते तक पहुंचाया।
उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में केन्द्र सरकार ने किशाऊ परियोजना को राष्ट्रीय परियोजना घोषित किया है। परियोजना की करीब 90 प्रतिशत वित्तीय लागत केन्द्र सरकार वहन करेगी, जबकि शेष 10 प्रतिशत राशि 1994 के समझौते के अनुसार संबंधित राज्य वहन करेंगे। अमित शाह ने कहा कि उत्तराखंड की वित्तीय कठिनाइयों को देखते हुए केन्द्र सरकार ने उसकी मांगों को अपनी योजनाओं में समाहित करने तथा भविष्य के वित्तीय भार में सहयोग का आश्वासन दिया है।
अमित शाह के मुताबिक उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश की सीमा पर टोंस नदी पर 232.6 मीटर ऊंचा कंक्रीट ग्रेविटी डैम बनाया जाएगा। इसमें 1,562 मिलियन क्यूबिक मीटर जल संग्रहण की क्षमता होगी। परियोजना से करीब 97 हजार हेक्टेयर भूमि की सिंचाई और 1,476 मिलियन यूनिट स्वच्छ जलविद्युत उत्पादन होने की उम्मीद है। उन्होंने कहा कि इसका सबसे बड़ा लाभ दिल्ली को मिलेगा।
उन्होंने कहा कि यमुना के जल बंटवारे के समय पर्यावरणीय प्रवाह का पर्याप्त ध्यान नहीं रखा गया और उपलब्ध पानी राज्यों के बीच बांट दिया गया। इससे नदी के लिए पर्याप्त जल प्रवाह नहीं बचा। किशाऊ परियोजना से यमुना में 25 प्रतिशत अतिरिक्त जल उपलब्ध होगा, जिससे दिल्ली की जल जरूरतों के साथ-साथ यमुना के पर्यावरण संरक्षण को भी लाभ मिलेगा।
अमित शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में यमुना को स्वच्छ बनाने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि यमुना की स्वच्छता का सीधा संबंध गंगा की स्वच्छता से है, क्योंकि यमुना प्रयागराज में गंगा में मिलती है। इसलिए यमुना को स्वच्छ किए बिना गंगा की स्वच्छता का लक्ष्य भी पूरा नहीं हो सकता।
गृह मंत्री ने कहा कि किशाऊ परियोजना पर छह राज्यों की सहमति प्रधानमंत्री मोदी के “सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास” तथा टीम इंडिया की भावना का उदाहरण है। उन्होंने विश्वास जताया कि सभी राज्य इसी सहयोग और एकजुटता के साथ परियोजना को जल्द पूरा करने की दिशा में काम करेंगे। इससे करोड़ों लोगों को पेयजल, सिंचाई, औद्योगिक उपयोग और विकास के लिए जल उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।
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