उत्तराखंड भाषा संस्थान: शायर अफजल मंगलौरी बने सदस्य, मुख्यमंत्री ने किया सम्मान
उत्तराखंड भाषा संस्थान में प्रसिद्ध शायर अफजल मंगलौरी को सदस्य बनाया गया। मुख्यमंत्री आवास पर आयोजित कार्यक्रम में सभी सदस्यों का सम्मान किया गया।
देहरादून। राज्य सरकार ने जाने-माने शायर और उत्तराखंड उर्दू अकादमी के संस्थापक उपाध्यक्ष अफजल मंगलौरी को तीन साल की अवधि के लिए उत्तराखंड भाषा संस्थान की प्रबंध कार्यकारिणी में सदस्य के तौर पर शामिल किया है। मुख्यमंत्री आवास में आयोजित एक विशेष कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अफजल मंगलौरी के साथ संस्थान में शामिल किए गए सभी सदस्यों का स्वागत और सम्मान किया।
उत्तराखंड भाषा संस्थान के सचिव और आईएएस अधिकारी उमेश नारायण पांडे ने इस व्यवस्था की पृष्ठभूमि साझा करते हुए बताया कि सरकार ने पुरानी व्यवस्था में बदलाव किया है। इसके तहत पूर्व में अलग-अलग काम कर रहीं हिंदी अकादमी, उर्दू अकादमी, पंजाबी अकादमी और लोकभाषा अकादमी का विलय करके एक संयुक्त इकाई ‘उत्तराखंड भाषा संस्थान’ को प्रभावी बनाया गया है। इस नए एकीकृत मंच का मुख्य उद्देश्य राज्य की सभी प्रमुख भाषाओं और उनके साहित्य का एक साथ संवर्धन करना है।
संस्थान की नई संरचना में राज्य के दो विश्वविद्यालयों के कुलपतियों को पदेन दायित्व दिया गया है। इसके साथ ही विभिन्न भाषाओं के प्रतिनिधियों को स्थान मिला है, जिनमें लोकभाषाओं के छह साहित्यकार, हिंदी के दो, नेपाली के दो, पंजाबी के दो और उर्दू भाषा के प्रतिनिधित्व के लिए प्रोफेसर अफजल मंगलौरी शामिल हैं। कुल मिलाकर तेरह सदस्यों को संस्थान से जोड़ा गया है।
हिंदी दिवस के अवसर पर देहरादून स्थित मुख्यमंत्री आवास पर आयोजित भव्य कार्यक्रम में इन सभी सदस्यों की उपस्थिति रही, जहां उन्हें औपचारिक तौर पर सम्मानित किया गया। समारोह में उत्तराखंड भाषा संस्थान की निदेशक स्वाति एस. भदौरिया (कार्यकारी निदेशक स्तर), सचिव उमेश नारायण पांडे, उपनिदेशक जसविंदर कौर, कृषि मंत्री गणेश जोशी, विधायक सविता कपूर, विधायक उमेश शर्मा काऊ सहित कई प्रशासनिक अधिकारी, साहित्यकार और पत्रकार मौजूद रहे।
साहित्य जगत से जुड़ी शख्सियतों ने अफजल मंगलौरी के चयन का स्वागत करते हुए इसे उर्दू साहित्य और भाषाई सद्भाव के विकास के लिए एक अहम कदम बताया है।
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