Uttarakhand Revenue Police System: उत्तराखंड के 2440 गांवों में बदलेगी पुलिसिंग, धामी सरकार ने तैयार किया खाका
Uttarakhand Law and Order: धामी सरकार उत्तराखंड के शेष 2440 गांवों को सिविल पुलिस में शामिल करने जा रही है। इसके लिए 9 नए थाने और 44 चौकियां बनाने का खाका तैयार किया गया है।
- Uttarakhand News: उत्तराखंड के 2440 राजस्व गांव सिविल पुलिस के दायरे में आएंगे, बनेंगे 9 नए थाने और 44 चौकियां
- उत्तराखंड के 2440 गांवों की कानून व्यवस्था में बड़ा बदलाव: खत्म होगी औपनिवेशिक राजस्व पुलिस व्यवस्था, धामी सरकार ने उठाया यह ठोस कदम!
- Uttarakhand Law and Order Update: उत्तराखंड के शेष 2440 गांवों को सिविल पुलिस के दायरे में लाने की तैयारी, 9 नए थाने और 44 चौकियां बनेंगी
उत्तराखंड सरकार ने राज्य में सदियों पुरानी राजस्व पुलिस व्यवस्था को पूरी तरह समाप्त कर शेष बचे क्षेत्रों को भी सिविल पुलिस प्रणाली के दायरे में लाने के लिए ठोस कदम उठाया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में राज्य सरकार ने शेष 2440 राजस्व गांवों को नियमित पुलिस व्यवस्था से जोड़ने का एक विस्तृत खाका तैयार किया है। इस योजना को अमलीजामा पहनाने के लिए प्रदेश में 9 नए पुलिस थाने और 44 पुलिस चौकियां स्थापित करने का प्रस्ताव तैयार किया गया है। इस ऐतिहासिक निर्णय का मुख्य उद्देश्य पर्वतीय व ग्रामीण इलाकों में अपराध नियंत्रण को प्रभावी बनाना, त्वरित पुलिस सहायता सुनिश्चित करना और राज्य भर की कानून व्यवस्था में एकरूपता स्थापित करना है।
उत्तराखंड के ग्रामीण क्षेत्रों में कानून व्यवस्था का ढांचा पूरी तरह बदलने वाला है। राज्य सरकार ने पारंपरिक पटवारी व राजस्व पुलिस व्यवस्था की जगह नियमित सिविल पुलिस को तैनात करने का फैसला किया है।
प्रथम चरण में 1983 राजस्व गांवों को मौजूदा सिविल पुलिस थानों और चौकियों के क्षेत्राधिकार में शामिल किया जा चुका है। अब दूसरे व अंतिम चरण के तहत बचे हुए 2440 गांवों को सिविल पुलिस के अधीन लाया जा रहा है। इसके लिए नए ढांचागत संसाधनों और पुलिस थानों के सृजन की प्रशासनिक प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
अंग्रेजों के जमाने से चली आ रही राजस्व पुलिस व्यवस्था के तहत पटवारी, कानूनगो और तहसीलदार के पास ही अपराधों की रोकथाम, प्राथमिक जांच दर्ज करने और कानूनी कार्रवाई करने के अधिकार थे। हालांकि, आधुनिक समय में अपराधों के बदलते तौर-तरीकों, फॉरेंसिक जांच की जरूरतों और राज्य में पर्यटन गतिविधियों के विस्तार के कारण राजस्व पुलिस की सीमाएं उजागर होने लगी थीं।
इस व्यवस्था को बदलने की मांग कई सालों से उठ रही थी। हाईकोर्ट के कड़े निर्देशों के बाद धामी सरकार ने चरणबद्ध तरीके से राजस्व क्षेत्रों को सिविल पुलिस के सुपुर्द करना शुरू किया। पूर्व में 3,000 से अधिक गांवों को नियमित पुलिस क्षेत्र में मिलाया गया था। अब 2440 गांवों के लिए गृह विभाग और पुलिस मुख्यालय द्वारा नया प्रस्ताव तैयार किया गया है।
इस नए प्रस्ताव के अनुसार, पौड़ी जिले में 4 थाने और 9 चौकियां, चमोली में 2 थाने और 10 चौकियां, उत्तरकाशी में 6 चौकियां, टिहरी में 5 चौकियां और रुद्रप्रयाग में 1 थाना व 2 चौकियां स्थापित करने का खाका खींचा गया है।
गृह सचिव शैलेश बगौली ने इस संदर्भ में जानकारी देते हुए पुष्टि की है कि पुलिस विभाग की ओर से 2440 राजस्व गांवों को सिविल पुलिस के दायरे में लाने का प्रस्ताव प्राप्त हुआ है। शासन स्तर पर इस प्रस्ताव का गहन अध्ययन किया जा रहा है और वित्तीय व ढांचागत पहलुओं की जांच की जा रही है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने पूर्व में स्पष्ट किया था कि राज्य के दूरस्थ और ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले नागरिकों की सुरक्षा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। सिविल पुलिस व्यवस्था लागू होने से जनता में सुरक्षा का भाव बढ़ेगा और पुलिस प्रणाली अधिक जवाबदेह व आधुनिक बनेगी। स्थानीय ग्रामीणों और पूर्व पुलिस अधिकारियों ने भी इस कदम को एक आवश्यक और दूरगामी सुधार बताया है।
राजस्व पुलिस व्यवस्था के हटने और सिविल पुलिस के आने से उत्तराखंड के गांवों में अपराध अनुसंधान और नियंत्रण की गुणवत्ता में भारी सुधार होगा। पटवारियों के पास पुलिसिंग का पेशेवर प्रशिक्षण और आधुनिक फॉरेंसिक व तकनीकी संसाधन नहीं होते थे, जिससे संगीन अपराधों की जांच में देरी होती थी।
अब सिविल पुलिस के थाने और चौकियां बनने से घटनास्थल पर तुरंत पुलिस पहुंचेगी, एफआईआर दर्ज करने में देरी नहीं होगी और अपराधियों पर कड़ा शिकंजा कसा जा सकेगा। साथ ही, पटवारी अपने मूल कार्य यानी राजस्व संग्रह, भूमि अभिलेखों के रखरखाव और प्रशासनिक कार्यों पर ध्यान केंद्रित कर सकेंगे।
गृह विभाग से प्रशासनिक मंजूरी मिलने और वित्त विभाग के स्तर पर बजटीय स्वीकृति के बाद नए पुलिस थानों व चौकियों के निर्माण का कार्य तेजी से शुरू किया जाएगा। पुलिस बल में आवश्यक पदों के सृजन और पुलिस कर्मियों की तैनाती की प्रक्रिया भी जल्द शुरू होगी। सरकार का लक्ष्य है कि आने वाले समय में राज्य का एक भी गांव अप्रशिक्षित राजस्व पुलिस के भरोसे न रहे और संपूर्ण उत्तराखंड में एक समान, कुशल तथा आधुनिक सिविल पुलिस प्रणाली कार्य करे।
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