Weather Alert: सीएम सुक्खू ने केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह से की मुलाकात, हिमाचल में मौसम चेतावनी, लैवेंडर खेती और एस्ट्रो-टूरिज्म पर चर्चा

हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने बुधवार को केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह से मुलाकात कर राज्य से जुड़े कई

By INA News Desk
Sep 10, 2026 - 12:25
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Weather Alert: सीएम सुक्खू ने केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह से की मुलाकात, हिमाचल में मौसम चेतावनी, लैवेंडर खेती और एस्ट्रो-टूरिज्म पर चर्चा

नई दिल्ली। हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने बुधवार को केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह से मुलाकात कर राज्य से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा की। बैठक में मौसम निगरानी एवं पूर्व-चेतावनी प्रणाली को मजबूत करने, लैवेंडर की खेती के विस्तार, स्पीति में उच्च-ऊंचाई वाली आकाश वेधशाला और राज्य कैडर से जुड़े विषयों पर विचार-विमर्श हुआ।

मुख्यमंत्री ने हिमाचल प्रदेश में पांच डॉप्लर मौसम रडार उपलब्ध कराने के लिए केंद्र सरकार का आभार जताया। वर्तमान में कुफरी, जोत और मुरारी देवी में तीन डॉप्लर मौसम रडार कार्यरत हैं, जबकि दो अन्य निर्माणाधीन हैं। प्रस्तावित विस्तार के तहत लाहौल-स्पीति और किन्नौर में दो अतिरिक्त रडार लगाने के लिए उपयुक्त स्थलों की जांच की जा रही है।

बैठक में ग्राम पंचायत स्तर तक मौसम पूर्वानुमान पहुंचाने वाली ‘मौसमग्राम’ सेवा पर भी चर्चा हुई। इसका उद्देश्य किसानों और आम लोगों को स्थानीय स्तर पर मौसम की जानकारी उपलब्ध कराकर दैनिक निर्णय लेने में मदद करना है।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने हिमाचल में सीएसआईआर अरोमा मिशन के तहत लैवेंडर खेती के सफल मॉडल के विस्तार की संभावनाओं पर भी चर्चा की। मंडी जिले के ऊपरी भामला में 20 हजार लैवेंडर पौधे लगाए गए हैं और करीब 150 किसान इससे जुड़े हैं। आगे और क्षेत्र को लैवेंडर खेती के दायरे में लाने तथा किसानों को आसवन इकाइयां उपलब्ध कराने की योजना पर भी विचार किया गया। इसके अलावा स्पीति में अत्यधिक ऊंचाई वाली खगोलीय वेधशाला स्थापित करने की संभावनाओं पर भी चर्चा हुई। प्रस्तावित सुविधा से वैज्ञानिक अध्ययन और छात्रों को लाभ मिलने के साथ-साथ एस्ट्रो-टूरिज्म और तारों के अवलोकन को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

बैठक में हिमाचल प्रदेश राज्य कैडर से जुड़े मुद्दों पर भी चर्चा हुई। हालांकि, कैडर की संख्या या पुनर्गठन को लेकर कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया। बैठक में हिमाचल की पर्वतीय चुनौतियों के समाधान में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के उपयोग पर विशेष जोर दिया गया।

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