लखनऊ के अलीगंज अग्निकांड वाली अवैध इमारत पर चला हथौड़ा, एलडीए के आदेश के बाद बिल्डर ने खुद शुरू कराया ध्वस्तीकरण
लखनऊ के अलीगंज में अग्निकांड का शिकार हुई अवैध व्यावसायिक इमारत का ध्वस्तीकरण शुरू हो गया है। एलडीए के नोटिस के बाद निर्माणकर्ताओं ने खुद इसे तोड़ना शुरू किया।
लखनऊ के अलीगंज में भीषण हादसे का शिकार बनी अवैध इमारत पर चला हथौड़ा, एलडीए के आदेश पर निर्माणकर्ताओं ने खुद शुरू किया ध्वस्तीकरण
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के अलीगंज में भीषण आग की चपेट में आई अवैध व्यावसायिक इमारत का ध्वस्तीकरण कार्य शुरू कर दिया गया है। लखनऊ विकास प्राधिकरण द्वारा जारी आधिकारिक आदेशों का पालन करते हुए निर्माणकर्ताओं ने स्वयं ही इस अवैध ढांचे को ध्वस्त करना शुरू कर दिया।
लखनऊ विकास प्राधिकरण के सचिव विवेक श्रीवास्तव के अनुसार, अलीगंज के सेक्टर-डी में प्लॉट संख्या एम-102 पर वीरेंद्र शुक्ला, सुरेंद्र शुक्ला तथा अन्य सहयोगियों द्वारा गैर-कानूनी तरीके से व्यावसायिक इमारत का निर्माण कराया गया था। नियमानुसार सक्षम अधिकारी की अदालत ने उत्तर प्रदेश नगर योजना एवं विकास अधिनियम की धारा-27(1) के अंतर्गत नोटिस जारी कर पक्षकारों से निर्माण की वैधता को लेकर साक्ष्य प्रस्तुत करने के निर्देश दिए थे। अदालत में मामले की सुनवाई और प्रस्तुत साक्ष्यों व आपत्तियों का परीक्षण करने के बाद उक्त व्यावसायिक निर्माण को पूरी तरह अवैध पाया गया।
मामले की गंभीरता को देखते हुए विहित प्राधिकारी न्यायालय ने अवैध ढांचे को ध्वस्त करने का निर्णय सुनाया। निर्णय के तहत पक्षकारों को स्वयं अपना अनधिकृत निर्माण हटाने के लिए निश्चित समय-सीमा दी गई थी, जिसकी अवधि समाप्त होने से पूर्व ही विपक्षी पक्ष द्वारा इमारत के अवैध हिस्से को गिराने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई।
कार्रवाई की सूचना मिलते ही प्रवर्तन टीम के जोनल अधिकारी माधवेश कुमार ने अपनी टीम के साथ मौके का मुआयना किया। उन्होंने बताया कि बारिश के मौसम को ध्यान में रखते हुए निर्माणकर्ताओं को सख्त हिदायत दी गई है कि ध्वस्तीकरण के दौरान सुरक्षा के सभी जरूरी मानकों का पूरी तरह पालन किया जाए। किसी भी प्रकार की असावधानी या लापरवाही से यदि कोई हादसा होता है, तो उसकी पूरी जवाबदेही निर्माणकर्ताओं की ही होगी। प्राधिकरण द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के तहत दी गई समय-सीमा पूरी होने के बाद मौके का दोबारा निरीक्षण किया जाएगा। यदि नियत समय तक ध्वस्तीकरण का कार्य पूरा नहीं पाया जाता है, तो प्राधिकरण खुद बाकी बचे अवैध ढांचे को ध्वस्त करने की कार्रवाई करेगा।
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