लखनऊ के बीकेटी में आईटीआई कॉलेज पर बड़ा आरोप, फीस के नाम पर छात्रों को प्रैक्टिकल परीक्षा से रोका, थाने पहुंचे छात्र

लखनऊ के बीकेटी स्थित कुसुम आईटीआई कॉलेज में फीस विवाद को लेकर छात्रों को प्रैक्टिकल परीक्षा से रोकने का आरोप। छात्रों ने पुलिस से शिकायत कर कार्रवाई की मांग की।

Jul 9, 2026 - 23:09
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लखनऊ के बीकेटी में आईटीआई कॉलेज पर बड़ा आरोप, फीस के नाम पर छात्रों को प्रैक्टिकल परीक्षा से रोका, थाने पहुंचे छात्र
लखनऊ के बीकेटी में आईटीआई कॉलेज प्रबंधन की मनमानी, पूरी फीस देने के बाद भी छात्रों को प्रैक्टिकल परीक्षा से वंचित करने का आरोप, पीड़ित पहुंचे थाने

राजधानी लखनऊ के बख्शी का तालाब (बीकेटी) तहसील क्षेत्र के अंतर्गत एक तकनीकी शिक्षण संस्थान में परीक्षा के दौरान भारी हंगामा देखने को मिला। इटौंजा थाना क्षेत्र की महोना चौकी के पास महोना-कुम्हरावां मार्ग पर स्थित कुसुम आईटीआई कॉलेज में इलेक्ट्रॉनिक ट्रेड के अंतिम वर्ष की प्रैक्टिकल परीक्षा चल रही थी, तभी कॉलेज प्रशासन और छात्रों के बीच विवाद खड़ा हो गया। कई पीड़ित छात्रों ने संस्थान के जिम्मेदारों पर परीक्षा से जानबूझकर दूर रखने और नियमों के खिलाफ जाकर मनमानी करने के बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं। इस घटना को लेकर कॉलेज परिसर के बाहर काफी समय तक अफरा-तफरी की स्थिति बनी रही।

परेशान छात्र अरविंद, अभिषेक, राज वर्मा और विपिन ने अपनी आपबीती बताते हुए कहा कि वे परीक्षा के लिए तय किए गए सुबह के समय पर कॉलेज परिसर पहुंच गए थे। समय से उपस्थिति दर्ज कराने के बाद भी उन्हें प्रैक्टिकल रूम में जाने की अनुमति नहीं दी गई और गेट पर ही रोक दिया गया। पीड़ित छात्रों का कहना है कि संस्थान के इस अड़ियल और तानाशाही पूर्ण रवैये के कारण वे अपनी मुख्य परीक्षा में शामिल नहीं हो सके, जिससे उनका पूरा साल बर्बाद होने की कगार पर पहुंच गया है।

हताश होकर छात्रों ने मुख्यमंत्री हेल्पलाइन नंबर 1076 पर फोन करके अपनी शिकायत दर्ज कराई। सरकारी हेल्पलाइन पर सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस की टीम तुरंत मौके पर पहुंची। पुलिस कर्मियों ने जब इस मामले में हस्तक्षेप किया और कॉलेज प्रशासन से बात की, तब जाकर छात्रों को कॉलेज परिसर के भीतर जाने का रास्ता मिल सका। हालांकि, पुलिस के जाते ही कॉलेज प्रबंधन ने एक नया बहाना बना दिया। प्रबंधन की ओर से छात्रों को साफ कह दिया गया कि उनकी प्रैक्टिकल की फीस पूरी जमा नहीं है, इसलिए वे परीक्षा में नहीं बैठ सकते।

इस दलील को पूरी तरह गलत बताते हुए पीड़ित छात्रों ने कहा कि वे पहले ही अपनी पूरी निर्धारित फीस रसीद के साथ जमा कर चुके हैं। छात्रों का आरोप है कि परीक्षा के नाम पर तय की गई 600 रुपये की सरकारी फीस के बदले कॉलेज प्रबंधन उनसे अवैध रूप से कहीं अधिक रुपयों की मांग कर रहा है। जब छात्रों ने इस अतिरिक्त धनराशि को देने में असमर्थता जताई, तो उन्हें परीक्षा से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया। छात्रों ने दुख जताते हुए कहा कि संस्थान की इस अवैध वसूली और मनमानी के कारण उनका पूरा भविष्य अब दांव पर लग गया है। इस पूरे घटनाक्रम से नाराज होकर सभी पीड़ित छात्रों ने एकजुट होकर इटौंजा थाने में जाकर कॉलेज प्रबंधन के खिलाफ एक लिखित शिकायत पत्र सौंपा है और दोषियों पर सख्त कानूनी कार्रवाई करने की मांग की है।

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