Lucknow : पूर्व वाद मध्यस्थता से मिल रहा त्वरित एवं सौहार्दपूर्ण न्याय- अभिषेक गुप्ता
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, लखनऊ के प्रभारी सचिव अभिषेक गुप्ता ने बताया कि न्याय तक आसान और शीघ्र पहुंच सुनिश्चित करने के उद्देश्य से पूर्व वाद मध्यस्थता की व्यवस्था को प्रभावी ढंग से संचालित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि बैंक ऋण विवाद, पारिवारिक
न्यायालय में वाद दायर करने से पहले मध्यस्थता केंद्र से संपर्क करने की अपील
लखनऊ : जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (डीएलएसए), लखनऊ द्वारा आमजन को न्यायालय में वाद दायर करने से पूर्व विवादों के सौहार्दपूर्ण एवं त्वरित निस्तारण हेतु पूर्व वाद मध्यस्थता (प्री-लिटिगेशन मेडिएशन) की सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। इस व्यवस्था के माध्यम से पक्षकार आपसी संवाद और प्रशिक्षित मध्यस्थों की सहायता से अपने विवादों का समाधान कर सकते हैं, जिससे समय, धन और अनावश्यक मुकदमेबाजी से बचाव संभव हो रहा है।
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, लखनऊ के प्रभारी सचिव अभिषेक गुप्ता ने बताया कि न्याय तक आसान और शीघ्र पहुंच सुनिश्चित करने के उद्देश्य से पूर्व वाद मध्यस्थता की व्यवस्था को प्रभावी ढंग से संचालित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि बैंक ऋण विवाद, पारिवारिक विवाद, चेक बाउंस के मामले, संपत्ति संबंधी विवाद, बीमा दावा विवाद तथा अन्य सिविल प्रकृति के मामलों का निस्तारण इस प्रक्रिया के माध्यम से कराया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि मध्यस्थता प्रक्रिया पूरी तरह गोपनीय, सरल, कम खर्चीली और प्रभावी होती है। इसमें किसी पक्ष की हार या जीत नहीं होती, बल्कि दोनों पक्षों की सहमति और संतुष्टि के आधार पर समाधान खोजा जाता है। यही कारण है कि इस प्रक्रिया से न केवल विवादों का स्थायी समाधान होता है, बल्कि पक्षकारों के आपसी संबंध भी सुरक्षित बने रहते हैं।
अभिषेक गुप्ता ने बताया कि पूर्व वाद मध्यस्थता का प्रमुख उद्देश्य न्यायालयों पर लंबित मुकदमों का भार कम करना तथा नागरिकों को सुलभ, त्वरित और प्रभावी न्याय उपलब्ध कराना है। यदि दोनों पक्ष आपसी सहमति से किसी समाधान पर पहुंचते हैं तो मध्यस्थता केंद्र द्वारा समझौता पत्र तैयार कराया जाता है, जो विवाद के स्थायी एवं शांतिपूर्ण समाधान का आधार बनता है।
उन्होंने जनसामान्य से अपील की कि किसी भी उपयुक्त सिविल विवाद में न्यायालय की शरण लेने से पूर्व जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, लखनऊ के मध्यस्थता केंद्र से संपर्क कर पूर्व वाद मध्यस्थता की सुविधा का लाभ उठाएं। उन्होंने कहा कि “बातचीत से समाधान, मुकदमे से नहीं” की भावना को अपनाकर समाज में सौहार्द, आपसी विश्वास और न्यायपूर्ण वातावरण को और अधिक मजबूत बनाया जा सकता है।
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