मदरसे मजदूर नहीं, IAS-IPS और डॉक्टर देते हैं - मंत्री धर्मपाल के बयान पर मुफ़्ती आलम रज़ा नूरी का पलटवार
उत्तर प्रदेश सरकार के पशुधन एवं दुग्ध विकास मंत्री धर्मपाल सिंह के मदरसों को लेकर दिए गए बयान पर सम्भल में
उवैस दानिश, सम्भल
उत्तर प्रदेश सरकार के पशुधन एवं दुग्ध विकास मंत्री धर्मपाल सिंह के मदरसों को लेकर दिए गए बयान पर सम्भल में तीखी प्रतिक्रिया सामने आई है। मंत्री ने कहा था कि 12 साल पहले सम्भल में मदरसा शिक्षा को बढ़ावा दिया गया, सार्वजनिक शिक्षा की अनदेखी हुई और विदेशी फंडिंग के जरिए बच्चों को मजदूर बनाने का काम किया गया। साथ ही उन्होंने नई शिक्षा नीति की सराहना करते हुए कहा कि अब मजदूर का बेटा भी हज़ूर बनेगा और सम्भल अब संभल रहा है।
मंत्री के इस बयान पर मुस्लिम धर्मगुरु मुफ़्ती आलम रज़ा नूरी ने कड़ा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि मदरसों में केवल दीन की शिक्षा ही नहीं, बल्कि दुनियावी शिक्षा भी दी जाती है। उनके अनुसार मदरसों से पढ़कर अनेक छात्र डॉक्टर, इंजीनियर, शिक्षक, वकील, IAS और IPS जैसे प्रतिष्ठित पदों तक पहुंचे हैं। मुफ़्ती नूरी ने दावा किया कि उनके क्षेत्र के कई छात्र मदरसे की शिक्षा के बाद प्रशासनिक सेवा और चिकित्सा क्षेत्र में सफल हुए हैं। उन्होंने कहा कि मदरसे
इंसानियत, सामाजिक सद्भाव और पड़ोसी के अधिकारों का सम्मान करना सिखाते हैं। उनके मुताबिक आज़ादी की लड़ाई में भी मदरसों का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। विदेशी फंडिंग के मंत्री के आरोप पर उन्होंने कहा कि उनकी जानकारी में ऐसा कुछ नहीं है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि मदरसों को बच्चों को मजदूर बनाने वाला बताना पूरी तरह गलत है और इससे मदरसा शिक्षा की वास्तविक भूमिका को नजरअंदाज किया जा रहा है। मंत्री धर्मपाल सिंह के बयान और मुफ़्ती आलम रज़ा नूरी की प्रतिक्रिया के बाद सम्भल में मदरसा शिक्षा को लेकर राजनीतिक और सामाजिक बहस तेज हो गई है।
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