मेरठ में पीएम आवास की फाइल पास कराने के नाम पर घूस लेते पकड़ा गया कर्मचारी, एंटी करप्शन टीम का बड़ा एक्शन

मेरठ में एंटी करप्शन टीम ने आवास विकास परिषद के आउटसोर्सिंग कर्मी अभिनव शर्मा को 6 हजार रुपये घूस लेते रंगेहाथ पकड़ा। पीएम आवास की फाइल बढ़ाने के नाम पर मांगी थी रिश्वत।

By INA News Desk
Sep 15, 2026 - 22:39
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मेरठ में पीएम आवास की फाइल पास कराने के नाम पर घूस लेते पकड़ा गया कर्मचारी, एंटी करप्शन टीम का बड़ा एक्शन

मेरठ। सरकारी योजनाओं में पारदर्शिता और भ्रष्टाचार के विरुद्ध चल रही सख्त मुहिम के बीच एंटी करप्शन ब्यूरो की टीम ने बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है। उत्तर प्रदेश आवास एवं विकास परिषद में तैनात आउटसोर्सिंग कर्मचारी अभिनव शर्मा को प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत आवंटित मकान की पत्रावली आगे बढ़ाने की एवज में छह हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगेहाथ गिरफ्तार किया गया है। भ्रष्टाचार निवारण संगठन की इस त्वरित कार्रवाई से विभागीय कर्मचारियों और बिचौलियों में हड़कंप मच गया है।

मामले के विवरण के अनुसार कीनानगर क्षेत्र की निवासी पीड़िता रंजना को प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत एक आवास आवंटित हुआ था। योजना के निर्धारित नियमों के तहत उन्होंने लगभग 76 हजार रुपये की राशि अधिकृत खाते में पूर्व में ही जमा करा दी थी। इसके बावजूद आवास से संबंधित औपचारिक पत्रावली को विभागीय स्तर पर आगे नहीं बढ़ाया जा रहा था। आरोप है कि आवास विकास परिषद के दफ्तर में आउटसोर्सिंग कर्मी के रूप में कार्यरत अभिनव शर्मा ने शेष औपचारिकताएं पूर्ण कराने और कागजी कार्रवाई को आगे बढ़ाने के लिए पीड़िता से छह हजार रुपये की अनुचित मांग रखी।

बार-बार चक्कर काटने से परेशान होकर पीड़िता ने रिश्वत मांगने की पूरी जानकारी एंटी करप्शन यूनिट को लिखित रूप से दी। शिकायत का प्राथमिक सत्यापन कराने के बाद जांच दल ने आरोपी को रंगेहाथ पकड़ने के लिए पुख्ता जाल बिछाया। तय योजना के तहत पीड़िता जैसे ही रिश्वत की निर्धारित रकम लेकर आरोपी अभिनव शर्मा को देने पहुंची, पहले से घात लगाकर बैठी भ्रष्टाचार निवारण संगठन की टीम ने आरोपी को नोट लेते ही दबोच लिया। टीम ने उसके हाथ धुलवाए तो केमिकल का रंग सामने आ गया, जिससे घूस लेने की पुष्टि हो गई। आरोपी को हिरासत में लेकर संबंधित थाने ले जाया गया, जहां उसके खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज कर विधिक कार्रवाई पूरी की जा रही है। जांच एजेंसी अब इस बात की भी पड़ताल कर रही है कि इस अनुचित लेन-देन में विभाग के किसी अन्य नियमित अधिकारी अथवा कर्मचारी की संलिप्तता तो नहीं थी।

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