मिर्जापुर में बना यूपी का पहला विकसित ग्राम पंचायत प्लान: छह सेक्टर में बंटा गांव, वाटरशेड तकनीक से तैयार हुआ मॉडल
मिर्जापुर के बघेड़ा खुर्द में प्रदेश का पहला विकसित ग्राम पंचायत प्लान तैयार किया गया। वाटरशेड पद्धति और ग्रामीणों के संवाद से बना यह मॉडल पूरे यूपी में लागू होगा।
ग्रामीण अंचलों को आत्मनिर्भर बनाने और विकास को वैज्ञानिक रूप देने की दिशा में एक नया मॉडल तैयार किया गया है। विकसित भारत के व्यापक विजन के तहत मिर्जापुर जिले के छानबे विकासखंड स्थित बघेड़ा खुर्द गांव में उत्तर प्रदेश का पहला ‘विकसित ग्राम पंचायत प्लान’ तैयार किया गया है। केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय के तकनीकी सहयोग और प्रशिक्षित विशेषज्ञों की देखरेख में बना यह प्रारूप अब राज्य की अन्य पंचायतों के लिए एक मानक बनेगा।
इस योजना के निर्माण में पारंपरिक तरीकों से अलग हटकर सहभागिता आधारित पद्धति अपनाई गई। गांव के शीर्ष भाग से लेकर निचले इलाके तक वाटरशेड पद्धति से स्थलीय मुआयना किया गया, जिससे प्राकृतिक संसाधनों और भौगोलिक स्थिति की सही समझ बनाई जा सके। कार्ययोजना को व्यवस्थित रूप देने के लिए पूरे गांव को छह अलग-अलग हिस्सों में बांटकर स्थानीय स्तर पर चौपाल और बैठकें आयोजित की गईं। इन बैठकों में प्रशासनिक अधिकारियों और गांव के लोगों ने आमने-सामने बैठकर आवश्यकताओं और प्राथमिकताओं पर सीधा विमर्श किया।
संवाद के दौरान ग्रामीणों ने शिक्षा, चिकित्सा, पक्के संपर्क मार्ग, शुद्ध पेयजल और स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन से जुड़ी जरूरतें सामने रखीं। ग्रामीणों का मत था कि उपलब्ध संसाधनों का बेहतर समन्वय कर आजीविका के नए साधन विकसित किए जा सकते हैं। इस योजना का मुख्य केंद्र केवल नाली और खड़ंजा निर्माण तक सीमित न रहकर जल, मिट्टी और प्राकृतिक संपदा का वैज्ञानिक मानचित्रण करना है, ताकि टिकाऊ परिसंपत्तियों का निर्माण हो सके।
इस प्रारूप में चार प्रमुख ग्रामीण विकास योजनाओं को एक साथ जोड़ा गया है, जिससे वित्तीय संसाधनों और विभिन्न विभागों के कार्यों में दोहराव न हो और बजट का सदुपयोग सुनिश्चित किया जा सके। मिर्जापुर के इस सफल परीक्षण के बाद ग्राम्य विकास विभाग इसे एक विशेष पोर्टल के माध्यम से पूरे प्रदेश की ग्राम पंचायतों में लागू करने जा रहा है। इसके लिए ब्लॉक और पंचायत स्तर के कर्मचारियों को तकनीकी प्रशिक्षण दिया जाएगा। कार्यक्रम में स्थानीय पंचायत प्रतिनिधियों, महिला स्वयं सहायता समूहों और बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने सक्रिय भागीदारी निभाई।
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