Nepal News: नेपाल के चितवन में अस्पतालों में जगह की भारी कमी, दफ्तर में शव रखने से फैली दुर्गंध, स्वास्थ्य संकट गहराया
Nepal Chitwan News: नेपाल के चितवन के अस्पताल में जगह न होने से सरकारी दफ्तर में रखे जा रहे हैं शव। इलाके में दुर्गंध और संक्रमण का खतरा, पढ़ें पूरी रिपोर्ट।
- Nepal Chitwan Hospital Crisis: चितवन के अस्पताल में शवगृह भरा, सरकारी दफ्तर में रखे गए शव, स्थिति गंभीर
- Nepal Chitwan Crisis: अस्पताल के शवगृह में जगह नहीं, सरकारी दफ्तर में रखे जा रहे हैं शव, इलाके में फैली दुर्गंध
- Nepal Breaking: नेपाल के चितवन में अस्पताल में जगह कम पड़ने से सरकारी दफ्तर में रखे गए शव, गहराया संकट
नेपाल के चितवन जिले से एक अत्यंत चिंताजनक और गंभीर स्थिति सामने आई है, जहां स्थानीय अस्पताल के शवगृह में जगह समाप्त होने के बाद पार्थिव शरीरों को एक सरकारी कार्यालय के परिसर में रखना पड़ रहा है। लगातार बढ़ रहे शवों के दबाव और बुनियादी ढांचे की कमी के चलते यह अप्रत्याशित कदम उठाना पड़ा है। जमीनी स्थिति का जायजा ले रहे प्रत्यक्षदर्शियों और स्थानीय संवाददाताओं के अनुसार, उचित शीतलन और भंडारण व्यवस्था न होने के कारण संबंधित क्षेत्र में तेज दुर्गंध फैलने लगी है। स्वास्थ्य संकट और संक्रमण के खतरे को देखते हुए स्थानीय प्रशासन पर अब शवों के सम्मानजनक संरक्षण और अंतिम संस्कार की प्रक्रिया में तेजी लाने का भारी दबाव है।
नेपाल के प्रमुख जिलों में शामिल चितवन में स्वास्थ्य और प्रशासनिक तंत्र इस समय भारी दबाव का सामना कर रहा है। अस्पताल की मोर्चरी में क्षमता से अधिक शव आने के कारण अतिरिक्त शवों को रखने के लिए जगह नहीं बची है। इसके समाधान के रूप में स्थानीय स्तर पर शवों को अस्थायी रूप से एक नजदीकी सरकारी दफ्तर के कमरों में शिफ्ट किया गया है। रेफ्रिजरेशन की समुचित व्यवस्था न होने और देरी होने की वजह से आसपास के पूरे रिहायशी और प्रशासनिक इलाके में दुर्गंध फैल रही है, जिससे स्थानीय लोगों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका पैदा हो गई है।
पिछले दिनों हुई प्राकृतिक आपदा और दुर्घटनाओं के चलते चितवन के क्षेत्रीय अस्पताल में लगातार पार्थिव शरीरों को लाया जा रहा था। अस्पताल का शवगृह सीमित क्षमता का होने के कारण कुछ ही समय में पूरी तरह भर गया। आपातकालीन स्थिति को देखते हुए स्थानीय प्रशासन ने शवों को खुले में रखने के बजाय पास के सरकारी कार्यालय में सुरक्षित रखने का अस्थायी निर्णय लिया।
जैसे-जैसे समय बीतता गया और पहचान व पोस्टमार्टम की औपचारिकताओं में देरी हुई, वैसे-वैसे स्थिति और अधिक जटिल होती चली गई। क्षेत्र में मौजूद ग्राउंड रिपोर्टर्स और मीडिया कर्मियों के अनुसार, दफ्तर परिसर और उसके आसपास बदबू फैलने लगी है, जिससे वहां काम करने वाले कर्मचारियों और राहगीरों का सांस लेना भी दूभर हो गया है। संसाधनों के अभाव में स्थानीय प्रशासन शवों की पहचान और उनके सुरक्षित निस्तारण के लिए संघर्ष करता नजर आ रहा है।
मौके पर मौजूद स्थानीय संवाददाताओं और प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि स्थिति बेहद संवेदनशील और मानवीय दृष्टिकोण से पीड़ादायक हो चुकी है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने आगाह किया है कि शवों का इस प्रकार सामान्य कमरों में रखा जाना न केवल अमानवीय है बल्कि इससे वातावरण में बैक्टीरिया और संक्रामक बीमारियां फैलने का गंभीर जोखिम भी खड़ा हो सकता है।
प्रशासनिक अधिकारियों ने इस बात को स्वीकार किया है कि अचानक शवों की संख्या में हुई वृद्धि के कारण उपलब्ध संसाधन नाकाफी साबित हुए हैं। अधिकारियों का कहना है कि यह एक आपातकालीन और अस्थायी व्यवस्था थी, और वे स्थिति को सामान्य बनाने के लिए अतिरिक्त शीतलन उपकरणों तथा शव वाहनों की व्यवस्था करने का प्रयास कर रहे हैं।
इस संकट ने चितवन और आसपास के इलाकों में सार्वजनिक स्वास्थ्य के बुनियादी ढांचे की कमजोरियों को उजागर कर दिया है। सरकारी दफ्तर में शव रखे जाने के कारण उस कार्यालय का सामान्य कामकाज पूरी तरह ठप हो गया है। आसपास रहने वाले नागरिकों में संक्रमण का भय बना हुआ है और लोग घरों की खिड़कियां बंद रखने को मजबूर हैं।
इसके साथ ही, मृतकों के परिजनों को अपने प्रियजनों के पार्थिव शरीर प्राप्त करने और उनकी शिनाख्त करने में भी भारी मानसिक तनाव और कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है। इस घटना ने आपदा प्रबंधन के दौरान शव प्रबंधन (डेड बॉडी मैनेजमेंट) प्रोटोकॉल के क्रियान्वयन पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
स्थानीय प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता अब शवों की पहचान प्रक्रिया को तेजी से पूरा कराकर उन्हें परिजनों को सौंपने अथवा नियमानुसार उनका सामूहिक या व्यक्तिगत अंतिम संस्कार सुनिश्चित करने की है। अतिरिक्त मोबाइल मॉर्चरी वैन या अस्थायी डीप फ्रीजर इकाइयों की व्यवस्था के लिए उच्च अधिकारियों से संपर्क साधा गया है।
स्वास्थ्य विभाग की टीमों को इलाके में सैनिटाइजेशन और कीटाणुनाशन का छिड़काव करने के निर्देश दिए गए हैं ताकि महामारी के खतरे को समय रहते टाला जा सके। जानकारों का मानना है कि भविष्य में ऐसी त्रासदियों से निपटने के लिए नेपाल के जिला अस्पतालों में शवगृहों की क्षमता का तत्काल विस्तार किया जाना बेहद आवश्यक है।
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