Nepal Flood Disaster: नेपाल में कुदरत का कहर, चितवन और नवलपरासी में भारी तबाही; भारत ने भेजी 11 टन राहत सामग्री
नेपाल में आई भीषण बाढ़ में मृतकों की संख्या 781 तक पहुंच गई है और 2502 लोग लापता हैं। भारत ने 149 भारतीय नागरिकों को सुरक्षित निकाल 11 टन राहत सामग्री भेजी है।
- नेपाल में भीषण बाढ़ और भूस्खलन से हाहाकार, अब तक 781 शव बरामद; 149 भारतीय नागरिकों को सुरक्षित निकाला गया
- नेपाल जलप्रलय में अब तक 781 लोगों की मौत, 2500 से अधिक लापता; भारतीय वायुसेना और दूतावास ने 149 भारतीयों को बचाया
- नेपाल बाढ़ त्रासदी: मृतकों की संख्या बढ़कर 781 हुई, 2502 लापता; भारत से चौथी राहत उड़ान काठमांडू पहुंची
पड़ोसी देश नेपाल में मूसलाधार बारिश के बाद आई विनाशकारी बाढ़ और भूस्खलन ने भारी तबाही मचाई है। नेपाल पुलिस और राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण द्वारा जारी आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, देश के विभिन्न हिस्सों से अब तक 781 शव बरामद किए जा चुके हैं, जबकि 2500 से अधिक नागरिक अभी भी लापता हैं। सबसे गंभीर असर चितवन और नवलपरासी जिलों में देखा गया है। इस मानवीय संकट के बीच भारत सरकार ने व्यापक स्तर पर राहत और बचाव कार्य शुरू करते हुए अब तक 149 भारतीय नागरिकों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया है। भारत ने राहत सामग्री की चौथी खेप के रूप में 11 टन आवश्यक सामग्री नेपाल प्रशासन को सौंप दी है, जबकि सेना और स्थानीय बचाव दल सुदूर इलाकों में फंसे लोगों की तलाश में जुटे हैं।
नेपाल के कई पर्वतीय और मैदानी इलाकों में लगातार हुई भारी वर्षा के बाद नदियों का जलस्तर खतरे के निशान को पार कर गया, जिससे रिहायशी बस्तियों, राजमार्गों और पुलों को व्यापक नुकसान पहुंचा है। नेपाल पुलिस मुख्यालय द्वारा साझा की गई जानकारी के मुताबिक, खोज और बचाव अभियानों के दौरान 781 मृतकों के शव निकाले जा चुके हैं। इस प्राकृतिक आपदा में चितवन जिला सबसे अधिक प्रभावित हुआ है, जहां अकेले 264 लोगों की जान गई है।
नवलपरासी ईस्ट में 194 और नवलपरासी वेस्ट में 120 लोगों के शव बरामद हुए हैं। इसके अलावा गोरखा में 58, नुवाकोट में 52, धाडिंग में 50, तनहुन में 37 और रसुवा में 13 लोगों की मृत्यु की पुष्टि की जा चुकी है। मलबे और पानी के तेज बहाव के कारण कई शवों की शिनाख्त नहीं हो पाई है, जिन्हें सुरक्षित रखने के लिए देश भर के 21 प्रमुख अस्पतालों में भेजा गया है।
नेपाल के नेशनल डिजास्टर रिस्क रिडक्शन एंड मैनेजमेंट अथॉरिटी (NDRRMA) की रिपोर्ट के अनुसार, आपदा के बाद से 2502 लोग लापता दर्ज हैं, जिनकी तलाश के लिए सेना, सशस्त्र पुलिस बल और स्थानीय स्वयंसेवकों की टीमें दिन-रात जुटी हुई हैं। कई पहाड़ी इलाकों में भूस्खलन से सड़कें टूट जाने के कारण हेलीकॉप्टरों की मदद से दूरदराज के गांवों तक पहुंचने का प्रयास किया जा रहा है।
आपदा की इस घड़ी में भारत के विदेश मंत्रालय (MEA) ने नेपाल में मौजूद भारतीय नागरिकों की सुरक्षा और निकासी के लिए एक विशेष नियंत्रण कक्ष स्थापित किया। विदेश मंत्रालय ने पुष्टि की है कि राहत दलों ने तेजी से समन्वय करते हुए 149 भारतीय नागरिकों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचा दिया है। बचाए गए सभी नागरिकों का विवरण आधिकारिक तौर पर जारी किया गया है ताकि उनके परिजन संपर्क कर सकें।
इसके साथ ही भारत सरकार की ओर से मानवीय सहायता की निरंतर आपूर्ति जारी है। भारत से 11 टन जरूरी दवाइयां, टेंट, खाद्य सामग्री और पेयजल लेकर चौथी विशेष राहत उड़ान नेपाल के त्रिभुवन अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर पहुंची, जहां राहत सामग्री को नेपाली अधिकारियों के सुपुर्द कर दिया गया।
नेपाली आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के अधिकारियों ने कहा है कि यह हाल के वर्षों की सबसे भयानक जलप्रलय में से एक है। प्रशासन का मुख्य ध्यान वर्तमान में लापता लोगों की खोज, घायलों के त्वरित उपचार और महामारी की रोकथाम पर केंद्रित है। अधिकारियों ने बताया कि डीएनए परीक्षण और बायोमेट्रिक पहचान के जरिए अज्ञात शवों की शिनाख्त करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
भारत के विदेश मंत्रालय ने अपने बयान में कहा कि भारत इस कठिन समय में नेपाल के साथ पूरी एकजुटता से खड़ा है। विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि काठमांडू स्थित भारतीय दूतावास लगातार स्थानीय प्रशासन के संपर्क में है और आवश्यकता पड़ने पर आगे भी अतिरिक्त राहत उड़ानें और विशेषज्ञ दल भेजने के लिए तैयार है।
इस भीषण आपदा ने नेपाल के बुनियादी ढांचे को तहस-नहस कर दिया है। प्रमुख राजमार्गों के बह जाने से देश के आंतरिक परिवहन और आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति श्रृंखला बाधित हो गई है। हजारों परिवार बेघर होकर अस्थायी शिविरों में शरण लेने को मजबूर हैं।
जलस्रोतों के दूषित होने के कारण प्रभावित क्षेत्रों में जलजनित बीमारियों के फैलने का जोखिम बढ़ गया है। नेपाल की अर्थव्यवस्था और विशेष रूप से पर्यटन क्षेत्र को इस आपदा से बड़ा झटका लगा है, क्योंकि कई प्रमुख पर्यटन मार्ग और ट्रेकिंग बेस कैंप बाढ़ की चपेट में आ गए हैं।
राहत और बचाव एजेंसियों के लिए आने वाले दिन अत्यंत चुनौतीपूर्ण रहने वाले हैं, क्योंकि बड़े पैमाने पर जमा कीचड़ और मलबे को हटाना एक जटिल कार्य बन चुका है। नेपाली प्रशासन अब लापता लोगों की खोज के साथ-साथ विस्थापित परिवारों के पुनर्वास, अस्थायी आवासों के निर्माण और संचार लाइनों को बहाल करने की योजना पर काम कर रहा है। वहीं, अंतरराष्ट्रीय समुदाय और पड़ोसी देशों से मानवीय सहायता की खेप लगातार प्रभावित इलाकों तक पहुंचाई जा रही है।
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