रूपापुर में मुआवजे को लेकर किसानों का धरना 20वें दिन भी जारी: वार्ताएं रहीं बेनतीजा, अब डीएम से लगाई गुहार

हरदोई के रूपापुर में औद्योगिक क्षेत्र की जमीन के मुआवजे को लेकर किसान 20 दिन से धरने पर हैं। वार्ताएं विफल रहने के बाद किसानों ने डीएम से न्याय की गुहार लगाई।

By INA News Desk
Nov 1, 2026 - 22:51
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रूपापुर में मुआवजे को लेकर किसानों का धरना 20वें दिन भी जारी: वार्ताएं रहीं बेनतीजा, अब डीएम से लगाई गुहार
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हरदोई जनपद के रूपापुर स्थित औद्योगिक क्षेत्र में जमीन अधिग्रहण के बदले उचित मुआवजे और अन्य अधिकारों की मांग को लेकर किसानों का धरना-प्रदर्शन लगातार जारी है। लगभग बीस दिनों से किसान फैक्ट्री परिसर में डटे हुए हैं, लेकिन प्रशासनिक अधिकारियों और किसानों के बीच अब तक कोई सहमति नहीं बन सकी है। पाली व सवायजपुर पुलिस और सवायजपुर की उपजिलाधिकारी शिवानी सिंह के साथ हुई कई दौर की वार्ताएं भी बेनतीजा साबित हुई हैं।

लगातार प्रयासों के बावजूद समस्या का समाधान न निकलने पर किसानों ने जिलाधिकारी से हस्तक्षेप की अपील की है। आंदोलनकारियों का कहना है कि वे कई बार जिला मुख्यालय जाकर अपनी बात रखने का प्रयास कर चुके हैं, लेकिन अधिकारियों से भेंट नहीं हो पाई। ऐसे में किसानों ने मांग की है कि जिलाधिकारी स्वयं धरना स्थल पर पहुंचकर धरातलीय स्थिति देखें और उनकी मांगों पर न्यायसंगत निर्णय लें।

काश्तकारों ने जमीन के मूल्यांकन और सर्किल रेट को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। किसानों का आरोप है कि विगत वर्षों में तत्कालीन सर्किल रेट के हिसाब से जमीनों की रजिस्ट्री कराई गई थी, जबकि जमीन का वास्तविक बाजार भाव काफी अधिक था। रजिस्ट्री के कुछ ही समय बाद सर्किल रेट में वृद्धि कर दी गई, जिसके चलते उन्हें वाजिब आर्थिक लाभ से वंचित रहना पड़ा। किसान इसे अपने साथ अन्याय बताते हुए दरों की पुनः समीक्षा की मांग कर रहे हैं।

इसके साथ ही पट्टे की भूमि पर दशकों से काबिज किसानों का मामला भी सामने आया है। प्रभावित परिवारों का कहना है कि कई दशक पूर्व भूमिहीन और निर्धन परिवारों को जीवन-यापन के लिए पट्टे आवंटित किए गए थे, जिनका वे नियमित रूप से लगान भी जमा करते आ रहे थे। आरोप है कि नए बंदोबस्त और औद्योगिक विकास के दौरान पुराने अभिलेखों का हवाला देकर इन जमीनों को जंगल खाते में दर्ज कर दिया गया, जिससे उन परिवारों को कोई क्षतिपूर्ति नहीं मिल सकी। इसके अलावा स्थानीय युवाओं के लिए उद्योगों में रोजगार की पक्की व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग भी प्रमुखता से उठाई जा रही है।

इस आंदोलन को भारतीय किसान यूनियन (टिकैत गुट), भारतीय कृषक दल और किसान यूनियन दशहरी सहित विभिन्न किसान संगठनों का समर्थन मिल रहा है। किसान नेता नन्हे सिंह ने चेतावनी दी है कि यदि प्रशासन ने समय रहते संवाद स्थापित कर किसानों के हितों की रक्षा नहीं की, तो इस आंदोलन को व्यापक रूप देते हुए जिला मुख्यालय स्तर पर ले जाया जाएगा। किसानों का कहना है कि जब तक उनकी जायज मांगों का स्थायी समाधान नहीं होता, धरना अनवरत जारी रहेगा।

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