लखनऊ: वरुण विहार और नैमिष नगर के किसानों ने सराहा मुआवजा, खाते में पहुंचे करोड़ों रुपये
लखनऊ में वरुण विहार और नैमिष नगर परियोजना के किसानों ने पारदर्शी मुआवजा प्रणाली की सराहना की। किसानों ने मिली राशि से नई जमीन खरीदी और मकान बनवाए।
लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए) की महत्वाकांक्षी आवासीय योजनाओं 'वरुण विहार' और 'नैमिष नगर' के लिए अपनी भूमि देने वाले किसानों और खातेदारों ने राज्य सरकार की पारदर्शी भुगतान प्रणाली पर संतोष व्यक्त किया है। मुख्यमंत्री की मौजूदगी में आयोजित भूमिपूजन कार्यक्रम के दौरान किसानों ने एक स्वर में कहा कि बिना किसी बिचौलिए या प्रशासनिक बाधा के उचित मुआवजा सीधे उनके बैंक खातों में पहुंचा है। प्राप्त धनराशि का सदुपयोग कर किसानों ने न केवल दूसरी जगहों पर उपजाऊ भूमि खरीदी है, बल्कि नए पक्के मकान बनाने और बच्चों की उच्च शिक्षा की व्यवस्था भी सुरक्षित कर ली है।
किसानों को मिली पारदर्शी आर्थिक शक्ति
कमलेश कुमार (ग्राम दोना): एक हेक्टेयर कृषि भूमि के बदले 2 करोड़ 80 लाख रुपये का मुआवजा मिला, जिससे उन्नाव में जमीन लेकर नया मकान बनवाया।
ओम प्रकाश अवस्थी (बक्शी का तालाब): करीब डेढ़ बीघा भूमि के बदले 1 करोड़ 96 लाख रुपये प्राप्त हुए, जिससे सीतापुर रोड पर 16 बीघे खेती की जमीन खरीदी।
सुषमा सिंह (कमलाबाद): नैमिष नगर योजना में भूमि शामिल होने पर 2 करोड़ 90 लाख रुपये का एकमुश्त पारदर्शी भुगतान मिला।
मुलेश्वर सिंह व रामदेई: सहमति से जमीन देकर उचित मुआवजा प्राप्त किया और अन्य स्थानों पर अचल संपत्ति जोड़कर भविष्य संवारा।
नैमिष नगर योजना के तहत अपनी जमीन देने वाली छात्रा नमरा फातिमा ने बताया कि उन्होंने हाल ही में बारहवीं कक्षा उत्तीर्ण की है और वर्तमान में राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (नीट) की तैयारी कर रही हैं। सैदापुर स्थित उनकी पैतृक भूमि योजना में शामिल होने के बाद उन्हें बिना किसी अड़चन के 70 लाख 58 हजार रुपये की धनराशि डिमांड ड्राफ्ट के माध्यम से मिली। उन्होंने बताया कि इस राशि से परिवार ने नई जमीन खरीदी है और शेष धन को अपनी मेडिकल की पढ़ाई के लिए सुरक्षित रख लिया है। उन्होंने विश्वास जताया कि इस योजना से क्षेत्र में युवाओं के लिए रोजगार और बेहतर रिहायशी विकल्पों का तेजी से विस्तार होगा।
दफ्तरों के चक्करों और बिचौलियों से मिली मुक्ति
त्वरित कागजी प्रक्रिया: किसानों को बार-बार दफ्तरों के चक्कर काटने से निजात मिली; सहमति पत्र देने के महज पंद्रह दिनों के भीतर रजिस्ट्री और भुगतान पूरा हुआ।
सीधा बैंक खाता हस्तांतरण: बैंक ड्राफ्ट और सीधे खाते में धनराशि आने से पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता बनी रही।
भविष्य की सुरक्षा: किसानों ने प्राप्त भारी-भरकम मुआवजे का इस्तेमाल फालतू खर्चों में करने के बजाय कृषि भूमि विस्तार और बैंक सावधि जमा (एफडी) में किया।
लाभार्थी किसानों ने अनुभव साझा करते हुए कहा कि पहले भूमि अधिग्रहण के मामलों में मुआवजे के लिए वर्षों तक दफ्तरों की दौड़ लगानी पड़ती थी, लेकिन इस बार सहमति पत्र भरने के दो सप्ताह के भीतर ही रजिस्ट्री कराकर भुगतान सुनिश्चित कर दिया गया। खातेदारों का कहना है कि सरकार की इस सकारात्मक नीति से उन्हें अपनी संपत्ति का बेहतर मूल्यांकन और वास्तविक बाजार लाभ मिला है, जिससे ग्रामीण परिवारों का भविष्य आर्थिक रूप से अधिक मजबूत और सुरक्षित हुआ है।
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