Hardoi News: रूपापुर इंडस्ट्रियल कॉरिडोर: किसानों ने उठाई उचित मुआवजे और पुनर्वास की मांग, डीएम को सौंपा मांग-पत्र
रूपापुर औद्योगिक गलियारा परियोजना के तहत भूमि अधिग्रहण को लेकर किसानों और किसान संगठनों ने प्रभावित परिवारों
हरदोई। रूपापुर औद्योगिक गलियारा परियोजना के तहत भूमि अधिग्रहण को लेकर किसानों और किसान संगठनों ने प्रभावित परिवारों के अधिकारों की आवाज उठाई है। भारतीय कृषक दल एवं विभिन्न किसान संगठनों के संयुक्त प्रतिनिधिमंडल ने जिलाधिकारी को संबोधित मांग-पत्र सौंपकर किसानों को वर्तमान बाजार मूल्य के आधार पर उचित मुआवजा देने और भूमिहीन श्रमिकों सहित आजीविका के लिए कृषि भूमि पर निर्भर परिवारों के हितों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है।
भारतीय कृषक दल एवं किसान संगठनों के राष्ट्रीय अध्यक्ष (विधि प्रकोष्ठ) राज प्रकाश सिंह एडवोकेट की ओर से दिए गए मांग-पत्र में कहा गया है कि औद्योगिक विकास के नाम पर किसानों की जमीन अधिग्रहित करते समय उनके जीवन, आजीविका और भविष्य को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। भूमि अधिग्रहण, पुनर्वासन और पुनर्व्यवस्थापन में उचित प्रतिकर एवं पारदर्शिता का अधिकार अधिनियम, 2013 के तहत सभी प्रभावित परिवारों को उनके अधिकार दिए जाएं।
बाजार मूल्य के आधार पर मिले मुआवजा
किसान संगठनों ने मांग की है कि अधिग्रहित भूमि का मुआवजा सर्किल रेट के बजाय वास्तविक बाजार मूल्य को ध्यान में रखकर निर्धारित किया जाए। इसके लिए अधिनियम की धारा 26 से 28 के प्रावधानों के अनुसार निष्पक्ष मूल्यांकन कराया जाए। साथ ही भूमि की व्यावसायिक संभावनाओं और भविष्य में बढ़ने वाली कीमतों को भी ध्यान में रखने की मांग की गई है।
मकान, दुकान और परिसंपत्तियों का हो उचित मूल्यांकन
प्रतिनिधिमंडल ने भूमि पर बने मकान, दुकान, बागवानी, बोरिंग और अन्य निर्माणों का पारदर्शी तरीके से वास्तविक बाजार मूल्यांकन कराने की मांग उठाई, ताकि प्रभावित परिवारों को उनकी संपत्तियों का उचित प्रतिकर मिल सके।
भूमिहीन श्रमिकों और छोटे किसानों के लिए विशेष पैकेज
मांग-पत्र में भूमिहीन कृषि श्रमिकों, छोटे किसानों और कृषि कार्य पर निर्भर परिवारों के लिए विशेष सहायता एवं पुनर्वास पैकेज की मांग की गई है। इसमें रोजगार के अवसर, वैकल्पिक आजीविका और प्रभावित परिवारों की आर्थिक सुरक्षा को प्राथमिकता देने पर जोर दिया गया है।
शिक्षा, स्वास्थ्य और आवास की सुविधाएं सुनिश्चित हों
किसान संगठनों ने प्रभावित परिवारों के लिए रोटी, कपड़ा, मकान, शिक्षा, चिकित्सा और सुरक्षा जैसी बुनियादी सुविधाएं सुनिश्चित करने की मांग की है। साथ ही पुनर्वास एवं पुनर्स्थापन की प्रक्रिया में पारदर्शिता बरतने और किसानों की भागीदारी सुनिश्चित करने की बात कही गई है।
प्रतिनिधिमंडल ने यह भी मांग की है कि परियोजना निर्माण शुरू होने से पहले प्रभावित किसानों और प्रशासन के बीच लिखित समझौता (एमओयू) किया जाए, जिससे मुआवजे, पुनर्वास और अन्य सुविधाओं को लेकर भविष्य में विवाद की स्थिति न बने। इसके अलावा मुआवजे के निर्धारण के लिए निष्पक्ष समिति गठित करने की मांग भी की गई है। किसान संगठनों ने स्पष्ट किया कि वे औद्योगिक विकास के विरोधी नहीं हैं, लेकिन विकास की प्रक्रिया में किसानों और मजदूरों के अधिकारों की अनदेखी नहीं होनी चाहिए। प्रभावित परिवारों को उचित मुआवजा, सम्मानजनक पुनर्वास और आजीविका की सुरक्षा मिलना आवश्यक है।
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