Sitapur News: मिड-डे मील का खाद्यान्न न पहुंचाने पर परिवहन ठेकेदार पर एफआईआर, ब्लैकलिस्ट करने के आदेश
सीतापुर में मिड-डे मील का राशन कोटेदारों तक न पहुंचाने पर परिवहन ठेकेदार पर एफआईआर और फर्म को ब्लैकलिस्ट करने का निर्देश। लापरवाह अधिकारियों की भी जिम्मेदारी तय होगी।
- UP Food and Civil Supplies: सीतापुर में राशन आपूर्ति में लापरवाही पर मंत्री का कड़ा रुख, ठेकेदार पर मुकदमा और अफसरों पर भी गिरेगी गाज
- Mid-Day Meal Ration Irregularities: बच्चों के राशन से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं, सीतापुर डीएम को मिला ट्रांसपोर्टर पर कार्रवाई का निर्देश
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लखनऊ/सीतापुर। परिषदीय विद्यालयों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों के पोषण और नियमित दोपहर के भोजन (मिड-डे मील) के राशन वितरण में घोर लापरवाही सामने आने के बाद शासन ने अत्यंत सख्त रुख अपनाया है। सीतापुर जिले में सिंगल स्टेज खाद्यान्न परिवहन व्यवस्था के तहत तय समयसीमा के भीतर उचित दर विक्रेताओं (कोटेदारों) तक राशन न पहुंचाने के मामले को खाद्य एवं रसद विभाग ने गंभीरता से लिया है। मामले में विभागीय मंत्री मनोज कुमार पाण्डेय ने जिलाधिकारी सीतापुर को संबंधित परिवहन ठेकेदार के विरुद्ध तत्काल प्रथम सूचना रिपोर्ट (एफआईआर) दर्ज कराने और संबंधित परिवहन फर्म को ब्लैकलिस्ट (काली सूची में डालने) करने के स्पष्ट निर्देश दिए हैं।
शासन स्तर से जारी आदेशों में यह भी साफ कर दिया गया है कि कार्रवाई का दायरा केवल बाहरी ठेकेदार तक सीमित नहीं रहेगा। जिले में खाद्यान्न वितरण, उठान और उसकी निगरानी के लिए तैनात उन सभी विभागीय और प्रशासनिक अधिकारियों की भूमिका की भी सघन जांच की जाएगी, जिनकी निगरानी में यह चूक हुई है।
राशन आपूर्ति में लापरवाही पर कड़ा प्रशासनिक प्रहार
प्राप्त विवरण के अनुसार, सीतापुर जनपद के अंतर्गत सरकारी और सहायता प्राप्त विद्यालयों के लिए आवंटित मिड-डे मील का खाद्यान्न भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) अथवा राज्य भंडारण निगम के बेस गोदामों से सीधे उचित दर विक्रेताओं के यहां तक पहुंचाया जाना था। उत्तर प्रदेश में खाद्यान्न की बर्बादी, लीकेज और बिचौलियों की भूमिका समाप्त करने के लिए सरकार ने सिंगल स्टेज परिवहन व्यवस्था लागू कर रखी है। इसके तहत अनुबंधित ट्रांसपोर्टर की सीधी जिम्मेदारी होती है कि वह निर्धारित अवधि में राशन का उठान कर उसे सीधे राशन दुकानों तक सुरक्षित पहुंचाए।
समीक्षा के दौरान पाया गया कि सीतापुर में अनुबंधित ठेकेदार ने नियमों और शर्तों का खुला उल्लंघन करते हुए कई क्षेत्रों में कोटेदारों तक मिड-डे मील का गेहूं और चावल समय से नहीं पहुंचाया। इस लापरवाही के चलते कई प्राथमिक व उच्च प्राथमिक विद्यालयों में बच्चों के भोजन निर्माण के लिए राशन की किल्लत की स्थिति उत्पन्न होने लगी थी। जब यह मामला संज्ञान में आया तो शासन ने बिना किसी विलंब के कठोर कदम उठाने का निर्णय लिया।
लापरवाह अधिकारियों की भी तय होगी सीधी जवाबदेही
खाद्य एवं रसद मंत्री ने निर्देश दिया कि ठेकेदार पर कानूनी शिकंजा कसने के साथ-साथ इस बात की भी विस्तृत जांच कराई जाए कि स्थानीय स्तर पर सप्लाई इंस्पेक्टर, क्षेत्रीय खाद्य अधिकारी और जिला पूर्ति अधिकारी कार्यालय के संबंधित नोडल कर्मचारियों ने समय पर स्टॉक और परिवहन की स्थिति का सत्यापन क्यों नहीं किया।
यदि ठेकेदार द्वारा गाड़ियां नहीं लगाई जा रही थीं या कोटेदारों तक राशन नहीं पहुंच रहा था, तो इसकी रिपोर्ट उच्च स्तर पर समय रहते क्यों प्रेषित नहीं की गई। मंत्री ने दो टूक शब्दों में कहा कि पर्यवेक्षण (सुपरविजन) और अनुश्रवण (मॉनिटरिंग) में ढिलाई बरतने वाले किसी भी कार्मिक को बख्शा नहीं जाएगा। जांच में जिस स्तर पर भी शिथिलता प्रमाणित होगी, उनके विरुद्ध विभागीय सेवा नियमों के तहत अनुशासनात्मक कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
'बच्चों के हक के निवाले से खिलवाड़ कतई बर्दाश्त नहीं'
विभागीय मंत्री मनोज कुमार पाण्डेय ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में सरकार जीरो टॉलरेंस की नीति पर काम कर रही है। उन्होंने कहा कि सरकारी कल्याणकारी योजनाओं, विशेष रूप से निर्धन परिवारों के राशन और स्कूली बच्चों के मिड-डे मील से जुड़ी आपूर्ति में किसी भी प्रकार का भ्रष्टाचार या कर्तव्य में लापरवाही पूरी तरह अक्षम्य है।
मंत्री ने कहा कि सरकारी तंत्र की सर्वोच्च प्राथमिकता यह है कि राज्य के किसी भी नागरिक और बच्चे को उसके तय अधिकार से वंचित न होना पड़े। जब सरकार समय से खाद्यान्न का आवंटन कर रही है और बजट उपलब्ध करा रही है, तो निजी वेंडरों या अधिकारियों की सुस्ती के चलते राशन वितरण बाधित होना गंभीर अपराध की श्रेणी में आता है। ठेकेदार के खिलाफ कानूनी कार्रवाई कर यह संदेश दिया गया है कि सरकारी व्यवस्था में मनमानी करने वालों के लिए कोई जगह नहीं है।
निगरानी तंत्र को और अधिक पुख्ता करने के निर्देश
इस घटनाक्रम के बाद पूरे प्रदेश में सिंगल स्टेज खाद्यान्न परिवहन प्रणाली की समीक्षा तेज कर दी गई है। खाद्य एवं रसद विभाग के उच्चाधिकारियों को निर्देशित किया गया है कि वे जीपीएस ट्रैकिंग, वाहनों के मूवमेंट और कोटेदारों से प्राप्त होने वाली डिजिटल रिसीविंग (पावती) की नियमित समीक्षा करें।
विभाग ने सभी जनपदों के जिला पूर्ति अधिकारियों को यह चेतावनी दी है कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में ठेकेदारों की दैनिक कार्यप्रणाली पर नजर रखें। यदि कोई ट्रांसपोर्टर समय से अनाज नहीं उठाता है या कोटेदारों तक आपूर्ति में हीलाहवाली करता है, तो तत्काल उसकी बैंक गारंटी जब्त करने और अनुबंध निरस्त करने की प्रक्रिया शुरू की जाए। सीतापुर के जिलाधिकारी को निर्देशित किया गया है कि वे एफआईआर दर्ज कराने के बाद संबंधित फर्म पर अब तक की गई कार्रवाई की अद्यतन आख्या शीघ्र शासन को उपलब्ध कराएं।
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